मेरठ (उत्तर प्रदेश)। क्रांतिधरा मेरठ में बाल श्रम के पूर्ण उन्मूलन को लेकर प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। श्रम विभाग, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), स्थानीय पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) की संयुक्त टीम ने शहर के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों में औचक छापेमारी की। इस विशेष अभियान के तहत विभिन्न दुकानों, होटलों और वर्कशॉप्स में काम कर रहे 5 बाल श्रमिकों को सकुशल रेस्क्यू (मुक्त) कराया गया।
टीम की इस अचानक हुई कार्रवाई से शहर के प्रमुख बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई सेवा प्रदाता और दुकान संचालक अपने-अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराकर भागते नजर आए।
संयुक्त टीम की रणनीति और औचक छापेमारी
प्रशासन को पिछले काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और ऑटोमोबाइल गैराजों में छोटे-छोटे बच्चों से जबरन मजदूरी कराई जा रही है। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर एक विशेष कार्यबल (Task Force) का गठन किया गया था।
रेस्क्यू ऑपरेशन की योजना काफी गुप्त रखी गई थी ताकि संचालकों को संभलने का मौका न मिले। श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की अगुवाई में पुलिस और एएचटीयू की टीम ने सुबह से ही शहर के अति व्यस्त और व्यावसायिक क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान शुरू किया।
प्रमुख बिंदु और कार्रवाई के आंकड़े:
- मुक्त कराए गए बच्चे: 5 मासूम बाल श्रमिक (आयु 10 से 14 वर्ष के बीच)।
- कार्रवाई का दायरा: ऑटो मोबाइल रिपेयर शॉप, ढाबे, चाय की दुकानें और स्थानीय विनिर्माण इकाइयां।
- शामिल संस्थाएं: श्रम विभाग, एएचटीयू (AHTU), बाल कल्याण समिति (CWC) और स्थानीय पुलिस बल।
मुक्त कराए गए बच्चों का पुनर्वास और स्वास्थ्य परीक्षण
रेस्क्यू किए गए सभी 5 बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। नियमों के मुताबिक, सबसे पहले सभी बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण (Medical Check-up) कराया गया ताकि उनके स्वास्थ्य और सही उम्र का निर्धारण हो सके।
इसके बाद सभी बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया। समिति ने बच्चों को अस्थाई रूप से बाल गृह (Child Home) भेजने का आदेश दिया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है।

दोषी सेवा योजकों पर कसेगा कानूनी शिकंजा
बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का काम कराना पूरी तरह से गैर-कानूनी और संज्ञेय अपराध है।
इस कार्रवाई के दौरान पाए गए दोषी दुकानदारों और प्रतिष्ठान स्वामियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है:
- चालान एवं एफआईआर: सभी संबंधित सेवा योजकों को नोटिस जारी कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- भारी जुर्माना और सजा: बाल श्रम कानून के उल्लंघन पर 20,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का जुर्माना या 6 महीने से 2 साल तक की जेल (अथवा दोनों) का प्रावधान है।
- पुनर्वास कोष: वसूले गए जुर्माने की राशि को सीधे बाल श्रम पुनर्वास कोष में जमा कराया जाएगा, जिसका उपयोग इन बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के सुधार के लिए होगा।
शहरभर के कारोबारियों में हड़कंप, अभियान रहेगा जारी
इस अचानक हुई कार्रवाई की खबर फैलते ही शहर के अन्य प्रमुख बाजारों—जैसे शास्त्रीनगर, दिल्ली रोड, बेगमपुल और कंकरखेड़ा क्षेत्र—में हड़कंप मच गया। श्रम विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में जिलेभर में यह अभियान और तेजी से चलाया जाएगा।
श्रम विभाग ने आम जनता और व्यापारियों से अपील की है कि वे किसी भी बच्चे के बचपन को मजदूरी की भट्टी में न झोंकें। यदि किसी को भी कहीं पर बाल श्रम की सूचना मिलती है, तो वे तुरंत टोल-फ्री नंबर 1098 (चाइल्डहेल्पलाइन) या जिला प्रशासन को सूचित करें।
यह भी पढ़ें: वर्ल्ड कप हार नहीं पचा पाए अर्जेंटीना के खिलाड़ी, स्पेनिश प्लेयर्स से की हाथापाई; अब FIFA लगा सकता है बैन