राम रहीम 17वीं बार जेल से बाहर: लैंड क्रूजर और फॉर्च्यूनर के काफिले के साथ पहुंचा सिरसा डेरा

जनसमाज संवाददाता, सिरसा: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर सुनारिया जेल से बाहर आ गया है। इस बार उसे 21 दिनों की फरलो (या पैरोल) मिली है, जिसके बाद वह कड़े सुरक्षा घेरे और गाड़ियों के विशाल काफिले के साथ हरियाणा के सिरसा स्थित अपने मुख्य आश्रम (डेरा) पहुंचा। टोयोटा लैंड क्रूजर, फॉर्च्यूनर और कई अन्य लग्जरी गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ राम रहीम की रवानगी और सिरसा डेरे में उसके स्वागत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

उल्लेखनीय है कि यह पिछले कुछ वर्षों में 17वां मौका है जब राम रहीम को जेल से अस्थायी रिहाई (पैरोल या फरलो) मिली है। साधवियों के यौन शोषण और पत्रकार छत्रपति की हत्या के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे डेरा प्रमुख की बार-बार बाहर आने की प्रक्रिया पर कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक नियमों और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भव्य काफिला

राम रहीम की जेल से रिहाई को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए थे। रोहतक की सुनारिया जेल के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। जेल के मुख्य गेट से बाहर निकलते ही राम रहीम अपने चुनिंदा सेवादारों और समर्थकों के साथ गाड़ियों के काफिले में सवार हुआ।

काफिले में सबसे आगे और पीछे हरियाणा पुलिस की गाड़ियां चल रही थीं, जबकि बीच में राम रहीम की निजी सुरक्षा और उनके मुख्य सेवादारों की लैंड क्रूजर व फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियां शामिल थीं। जैसे ही यह काफिला रोहतक से निकलकर सिरसा की ओर बढ़ा, मार्ग में कई जगह सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखा गया ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले। सिरसा डेरा सच्चा सौदा पहुंचने पर अनुयायियों ने उसका जोरदार स्वागत किया, हालांकि प्रशासन ने डेरे के आसपास भीड़ जमा न होने देने के कड़े निर्देश दिए हैं।

17वीं बार जेल से बाहर आया डेरा प्रमुख

यह पहली बार नहीं है जब राम रहीम को जेल से रिहाई मिली है। आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2017 में पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद से यह 17वां अवसर है जब उसे पैरोल या फरलो दी गई है।

हर बार जब भी राम रहीम को अस्थाई रिहाई मिलती है, तो यह मामला मीडिया और जनमानस के बीच चर्चा का केंद्र बन जाता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जेल मैनुअल के तहत प्रत्येक सजायाफ्ता कैदी को वर्ष में निश्चित दिनों के लिए पैरोल और फरलो पाने का अधिकार होता है, बशर्ते उसका जेल में आचरण सही रहे और प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर कोई नकारात्मक रिपोर्ट न आए। हालांकि, आलोचकों और याचिकाकर्ताओं का मानना है कि इतनी बार और इतने कम अंतराल में रिहाई मिलना आम कैदियों के मुकाबले एक विशेष रियायत की तरह दिखता है।

सिरसा डेरे का माहौल और अनुयायियों में उत्साह

राम रहीम के सिरसा डेरे में पहुंचने की खबर मिलते ही उसके देश-विदेश में फैले लाखों समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। हालांकि, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने डेरा परिसर और उसके आसपास धारा 144 व अन्य सुरक्षा प्रतिबंधों को लागू रखा है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।

डेरा प्रबंधन की ओर से समर्थकों को अपील की गई है कि वे अपने-अपने घरों में रहकर ही संत का संदेश सुनें और डेरे में भारी भीड़ जमा करने से बचें। इसके बावजूद, सिरसा आश्रम के आसपास चहल-पहल काफी बढ़ गई है। राम रहीम अपने इस रिहाई काल के दौरान ऑनलाइन सत्संग आयोजित कर सकता है और अपने अनुयायियों से वर्चुअली जुड़ सकता है, जैसा कि उसने अपनी पिछली पैरोल/फरलो की अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश के बागपत (बरनावा आश्रम) में रहते हुए किया था।

कानूनी विवाद और राजनीतिक चर्चाएं

राम रहीम की बार-बार रिहाई पर अक्सर कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़े होते रहे हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव हों या स्थानीय निकाय चुनाव, कई मौकों पर विपक्ष ने सरकार पर चुनावी फायदे के लिए डेरा प्रमुख को पैरोल देने के आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव के समय या राजनीतिक रूप से संवेदनशील माहौल में राम रहीम की रिहाई से वोट बैंक प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों का रुख हमेशा यही रहा है कि पैरोल या फरलो देना पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है, जो जेल नियमों के अधीन होती है। अधिकारियों के मुताबिक, हर नागरिक और कैदी की तरह कानून के दायरे में रहकर आवेदन करने पर नियमानुसार ही पैरोल स्वीकृत की जाती है।

इसके अलावा, पत्रकार छत्रपति के परिवार और कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने राम रहीम की लगातार रिहाई को अदालत में चुनौती भी दी है। उनकी ओर से याचिकाएं दाखिल कर यह मांग की जाती रही है कि संगीन अपराधों में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बार-बार इस तरह की छूट नहीं मिलनी चाहिए।

राम रहीम की 17वीं बार जेल से बाहर आने की खबर ने एक बार फिर जेल सुधार, पैरोल नियमों और कानून के समान अनुप्रयोग पर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां उसके अनुयायी अपने गुरु के बाहर आने का जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली को लेकर सवाल उठाने वाले वर्ग अपनी आवाज मुखर कर रहे हैं। सिरसा डेरे में 21 दिनों की इस अवधि के दौरान प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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  • Rahul Kaushik

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    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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