लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद राहुल गांधी के एक हालिया बयान ने देश के सियासी गलियारों में एक बार फिर तीखी बहस छेड़ दी है। पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने ‘पितृसत्ता को तोड़ने’ (Smash the Patriarchy) और महिलाओं की स्वायत्तता का समर्थन किया था। हालांकि, उनके इस बयान के बाद सत्तारूढ़ दल और राजनीतिक विरोधियों ने उन पर जमकर निशाना साधा है। इस क्रम में शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा पलटवार करते हुए उनके बयानों को “ढोंग” और दोहरा रवैया करार दिया है।
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में क्या कहा था?
महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की असली ताकत उसकी महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं; वे न तो अपने पिता, न पति और न ही बेटों की अधीनता में रहने के लिए बनी हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि महिलाएं स्वयं की मालिक हैं और उन्हें अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए, अपने अधिकार की लड़ाई लड़नी चाहिए और समाज में पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करना चाहिए। अपने संबोधन में उन्होंने “मनुस्मृति मानसिकता” की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि देश में महिलाओं को पीछे धकेलने वाली विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
शहजाद पूनावाला का तीखा हमला: “ढोंग बंद कीजिए”
राहुल गांधी के इस बयान पर शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो संदेश जारी कर कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला बोला। पूनावाला ने राहुल गांधी के बयानों को खोखला बताते हुए कहा कि दूसरों को उपदेश देने से पहले राहुल गांधी को अपने परिवार और अपनी पार्टी के भीतर व्याप्त पितृसत्ता को खत्म करना चाहिए।
पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में नेतृत्व के मामले में हमेशा ‘बेटे’ को प्राथमिकता दी गई और ‘बेटी’ को पीछे रखा गया। उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा के संदर्भ में सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस वाकई महिला सशक्तिकरण और समानता में विश्वास रखती है, तो पार्टी नेतृत्व में उन्हें उचित स्थान क्यों नहीं दिया गया।
कांग्रेस के अंदरूनी मामलों और दोहरे रवैये पर उठाए सवाल
शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पार्टी पर महिला सुरक्षा और महिला अधिकारों के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जब पार्टी के भीतर महिलाओं के साथ उत्पीड़न या शिकायत के मामले सामने आते हैं, तब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व मौन साधे रहता है।
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी केवल हिंदू परंपराओं और रीति-रिवाजों को महिला विरोधी बताकर निशाना बनाते हैं, लेकिन ट्रिपल तलाक, हलाला, शाह बानो केस या समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं। पूनावाला ने कहा कि जब बात मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की आती है, तो कांग्रेस का प्रगतिशील रवैया गायब हो जाता है।
भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
केवल पूनावाला ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के कई अन्य प्रमुख नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने भी राहुल गांधी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है:
- योगी आदित्यनाथ का हमला: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि संसद में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी को भारत की परंपराओं और विरासत का अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राचीन ग्रंथों और परंपराओं को समझे बिना उन पर टिप्पणी करना अनुचित है।
- देवेंद्र फडणवीस का बयान: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जब महिला आरक्षण विधेयक संसद में लाया गया था, तब कांग्रेस का रुख टालमटोल वाला था। उन्होंने राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को राजनीतिक हथकंडा बताया।
- महिला राष्ट्रपति के मुद्दे पर घेरा: भाजपा नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि जब देश की पहली आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था, तब कांग्रेस ने उनका विरोध किया था, जो उनके महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलता है।
महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और छात्र जुड़ाव कार्यक्रमों के बीच राहुल गांधी का ‘पितृसत्ता’ वाला बयान अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जहां कांग्रेस इसे महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक बराबरी की लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा और पूनावाला इसे कांग्रेस का राजनैतिक ढोंग और दोहरी नीति करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में इस बयानबाजी के और तेज होने के आसार हैं।
यह भी पढ़ें: राम रहीम 17वीं बार जेल से बाहर: लैंड क्रूजर और फॉर्च्यूनर के काफिले के साथ पहुंचा सिरसा डेरा