उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में हुए चर्चित और सनसनीखेज ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस वीभत्स मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है। फैसले के बाद से जहां एक ओर समाज में इस जघन्य अपराध को लेकर आक्रोश है, वहीं दूसरी ओर इस मामले से जुड़े मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर एक संवेदनशील मानवीय पहलू भी सामने आया है। हाल ही में, देश के जाने-माने कवि दंपती—सौरभ सुमन और मशहूर कवयित्री डॉ. अनामिका जैन अंबर ने मेरठ जेल में पहुंचकर मौत की सजा का सामना कर रही मुस्कान से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने न केवल मुस्कान की मनोदशा को करीब से देखा, बल्कि उसकी दोनों मासूम बेटियों के लालन-पालन और शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाने का भी बड़ा ऐलान किया है।
जेल के भीतर का खौफनाक मंजर और मुस्कान की मानसिक स्थिति
मीडिया रिपोर्ट्स और मुलाकात के बाद सामने आए बयानों के मुताबिक, जब कवि दंपती सौरभ सुमन और अनामिका अंबर ने जेल में मुस्कान से मुलाकात की, तो उसकी हालत बेहद दयनीय और डरी हुई थी। कवि सौरभ सुमन ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि मुस्कान की आंखों में अपने किए गए कृत्य को लेकर गहरा पछतावा और मौत का खौफ साफ झलक रहा था। अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद उसके चेहरे पर जो भय और आंसू थे, वे यह बयां कर रहे थे कि उसे अपने अपराध की गंभीरता का अहसास अब पूरी तरह हो चुका है।
मुस्कान ने अपने ही पति सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर शव के टुकड़े एक नीले ड्रम में छुपा दिए थे, जिसके बाद समाज के हर वर्ग ने उसकी इस दरिंदगी की निंदा की थी। लेकिन जेल की सलाखों के पीछे पहुंचते ही कानून के शिकंजे और फांसी के फंदे के डर ने उसे अंदर से तोड़ दिया है। कवि दंपती का कहना है कि उन्होंने मुस्कान के चेहरे पर एक मां की लाचारी और अपने बच्चों से बिछड़ने का असीम दर्द भी महसूस किया।
मासूम बच्चियों का इस अपराध से क्या दोष?
कवयित्री अनामिका अंबर ने इस मुलाकात के बाद एक बेहद संवेदनशील और विचारणीय पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मुस्कान ने जो जघन्य अपराध किया है, उसके लिए कानूनन उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और अदालत के फैसले पर किसी भी प्रकार का सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। अपराध की प्रकृति इतनी भयानक है कि उसके लिए कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
अनामिका अंबर ने इस बात पर जोर दिया कि इस पूरे घटनाक्रम में दो मासूम बच्चियां ऐसी भी हैं, जिनका अपनी मां के इस कुकर्म से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इनमें से एक बच्ची का जन्म तो जेल के अंदर ही हुआ है। इन बेकसूर बच्चियों का भविष्य क्या होगा? समाज में उनका पालन-पोषण कैसे होगा? यह एक ऐसा गंभीर सवाल है, जिस पर मानवता के नाते विचार किया जाना बेहद आवश्यक है।
कवि दंपती ने उठाया बेटियों की शिक्षा और परवरिश का बीड़ा
इस मानवीय संकट को समझते हुए कवि सौरभ सुमन और अनामिका अंबर ने एक सराहनीय और अनुकरणीय कदम उठाया है। दंपती ने घोषणा की है कि वे मुस्कान की दोनों बेटियों की आजीवन पढ़ाई-लिखाई और शिक्षा का पूरा खर्च उठाएंगे। उनका मानना है कि माता-पिता के गलत कृत्यों की सजा मासूम बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए। बच्चियों को अच्छी परवरिश, बेहतरीन शिक्षा और एक सुरक्षित माहौल मिलना उनका मौलिक अधिकार है, ताकि वे बड़ी होकर समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
कवि दंपती ने यह भी कहा कि वे न्यायालय से यह गुजारिश करने पर विचार कर रहे हैं कि कम से कम तब तक जब तक ये बच्चियां थोड़ी सक्षम और समझदार नहीं हो जातीं, मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए सजा के क्रियान्वयन पर विचार किया जाए ताकि बच्चों का शुरुआती साया न छिने। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उनकी यह पहल केवल और केवल निर्दोष बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है, न कि किसी भी रूप में अपराध या अपराधी का समर्थन करने के लिए।
समाज के लिए एक बड़ा संदेश
मेरठ के इस बहुचर्चित मामले में कवि दंपती द्वारा उठाया गया यह कदम समाज के सामने एक मजबूत संदेश पेश करता है। यह घटना हमें यह सिखाती है कि अपराध की आलोचना और अपराधी को दंडित करना न्याय व्यवस्था का काम है, लेकिन उस अपराध की आड़ में किसी बेकसूर और मासूम बच्चे के जीवन को अंधेरे में धकेलने से बचाना समाज का नैतिक कर्तव्य है। सौरभ सुमन और अनामिका अंबर की इस पहल से कम से कम उन दो अभागिन बच्चियों को जीवन में आगे बढ़ने की एक नई उम्मीद जरूर मिली है, जिनका अपना परिवार इस खौफनाक साये की वजह से बिखर चुका है।
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