जनसमाज संवाददाता,मेरठ : सोशल मीडिया का बुखार इन दिनों हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है। चाहे आम नागरिक हो या फिर कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले जिम्मेदार अधिकारी, रील और लाइक्स की दुनिया का आकर्षण हर किसी को अपनी ओर खींच रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां वर्दी की गरिमा और नियम-कायदों को ताक पर रखकर एक महिला उपनिरीक्षक (महिला दरोगा) को सोशल मीडिया पर स्टार बनना भारी पड़ गया। अपनी ड्यूटी से ज्यादा रील्स और वीडियो कंटेंट पर ध्यान देने की सजा उन्हें निलंबन (सस्पेंशन) के रूप में भुगतनी पड़ी है। हालांकि, इस पूरी घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक नया ड्रामा देखने को मिल रहा है, जहां उनके फॉलोअर्स अब उन्हें लाइव आकर आर्थिक मदद लेने की सलाह दे रहे हैं।
वर्दी का रोब और रील का क्रेज: 4 यूट्यूब चैनल और लाखों फॉलोअर्स
मामला उत्तर प्रदेश का है, जहां तैनात एक महिला दरोगा पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी सेवा नियमों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी एक अलग डिजिटल दुनिया बसा ली थी। लोकप्रिय होने और इंटरनेट से अच्छी-खासी कमाई करने की चाहत में मैडम ने एक या दो नहीं, बल्कि पूरे चार यूट्यूब चैनल बना रखे थे। इसके अलावा इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी वह लगातार सक्रिय थीं।
इन चैनलों और अकाउंट्स पर महिला दरोगा अपनी ड्यूटी के दौरान, पुलिस थानों में, सरकारी गाड़ियों में और यहां तक कि वर्दी पहने हुए फिल्मी गानों, संवादों और ट्रेंडिंग गानों पर रील्स बनाकर अपलोड करती थीं। धीरे-धीरे उनके वीडियो वायरल होने लगे और देखते ही देखते उनके फॉलोअर्स की संख्या लाखों में पहुंच गई। सोशल मीडिया की इस चकाचौंध में उन्हें मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स और शेयर ने उनके इस शौक को और बढ़ा दिया, लेकिन वह यह भूल गईं कि पुलिस महकमे के भी कुछ कड़े नियम और आचार संहिता होती है।

पुलिस नियमावली की उड़ाईं धज्जियां, जांच के बाद गिरी गाज
उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इन नियमों के मुताबिक, कोई भी पुलिसकर्मी ऑन-ड्यूटी या वर्दी में निजी सोशल मीडिया अकाउंट्स के लिए वीडियो नहीं बना सकता, ना ही थानों या सरकारी परिसरों का इस्तेमाल किसी रील्स अथवा व्यावसायिक कंटेंट के लिए कर सकता है।
इसके बावजूद, महिला दरोगा लगातार इन नियमों की अनदेखी कर रही थीं। जब उनके वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल होने लगे और आम जनता के बीच पुलिस की छवि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हुईं, तो वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। विभागीय जांच बैठाने के बाद यह बात साफ हो गई कि महिला अधिकारी ड्यूटी से अधिक समय कंटेंट क्रिएशन में बिता रही थीं। इसके बाद अनुशासनहीनता और सेवा नियमावली का उल्लंघन करने के आरोप में विभागीय अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया।
सस्पेंशन के बाद इंटरनेट पर नया मोड़: ‘मैडम लाइव आओ, QR स्कैन करना है’
महिला दरोगा के निलंबन की खबर जैसे ही मीडिया और सोशल मीडिया पर फैली, उनके यूट्यूब चैनलों और इंस्टाग्राम पेजों पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। उनके फैंस और फॉलोअर्स इस कार्रवाई से काफी आहत नजर आए, लेकिन इसके साथ ही इंटरनेट की दुनिया का एक अनोखा रूप भी देखने को मिला।
जैसे ही उनके निलंबित होने की पुष्टि हुई, उनके कमेंट सेक्शन में उनके फॉलोअर्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कई प्रशंसकों ने लिखा, “मैडम, आप घबराइए मत, हम आपके साथ हैं।” वहीं, दर्जनों यूजर्स ने उनसे लाइव आने की अपील करना शुरू कर दिया। प्रशंसकों का कहना था, “मैडम, आप यूट्यूब या इंस्टाग्राम पर लाइव आइए और स्क्रीन पर अपना QR कोड लगा दीजिए। हम सब मिलकर आपको डोनेशन देंगे और पैसों की कमी नहीं होने देंगे।”
फैंस का मानना था कि अगर सस्पेंशन के कारण उनकी सैलरी रुकती है या उन पर आर्थिक संकट आता है, तो उनके लाखों फॉलोअर्स क्राउडफंडिंग के जरिए उनकी भरपाई कर देंगे। कुछ कमेंट्स में तो यूजर्स ने यहां तक लिख दिया कि “आप पुलिस की नौकरी छोड़ दीजिए और फुल-टाइम यूट्यूबर बन जाइए, आप इससे कहीं ज्यादा पैसा और नाम कमाएंगी।”
क्या सोशल मीडिया का नशा खाकी पर भारी पड़ रहा है?
यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों से पुलिसकर्मियों के रील बनाने और ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने के कई मामले सामने आ चुके हैं। खाकी वर्दी का एक अपना आकर्षण होता है और जब पुलिसकर्मी वर्दी में वीडियो डालते हैं, तो उन्हें व्यूज भी तेजी से मिलते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या जनसेवा और सुरक्षा के लिए ली गई शपथ पर सोशल मीडिया के लाइक्स भारी पड़ रहे हैं?
निलंबन की इस कार्रवाई ने एक बार फिर महकमे के भीतर यह संदेश देने की कोशिश की है कि अनुशासन से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, महिला दरोगा के मामले में उनके फॉलोअर्स का यह रवैया दिखाता है कि कैसे आज की डिजिटल पीढ़ी के लिए नियम-कानूनों से ज्यादा सोशल मीडिया की स्टारडम मायने रखती है।
फिलहाल, निलंबित महिला दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच जारी है और उन्हें अपनी सफाई पेश करने का मौका दिया जाएगा। लेकिन इस पूरी घटना ने एक बात फिर साबित कर दी है कि सोशल मीडिया की आभासी दुनिया का चस्का अगर एक बार लग जाए, तो यह इंसान को अपनी असली जिम्मेदारियों से भटका सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या मैडम अपने फॉलोअर्स की सलाह मानकर लाइव आती हैं या फिर से वर्दी की गरिमा को बहाल करने के लिए कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ती हैं।
यह भी पढ़ें: ‘राजनीतिक साधु’ CM विजय: सुबह 4 बजे से ही प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त