पाकिस्तान और उसकी सरजमीं से पनपने वाले आतंकवाद का एक और खौफनाक व काला चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा (Lashkar-e-Taiba) और जमात-उद-दावा (Jamaat-ud-Dawa) के सरगना हाफिज सईद को लेकर एक पाकिस्तानी मौलाना ने सरेआम आतंकी मंच से ऐसा खुलासा किया है जिसने पाकिस्तान के उन तमाम दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जिनमें वह खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता रहा है।
पाकिस्तान में आयोजित एक सार्वजनिक जनसभा के दौरान मौलाना ने मंच से कबूल किया कि 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अशांति, हिंसा और कत्लेआम फैलाने के लिए हजारों की तादाद में प्रशिक्षित आतंकवादियों को भेजा था।
सार्वजनिक मंच से कबूला सच: पाकिस्तान में हुआ खुलासा
पाकिस्तान की धरती पर आयोजित एक धार्मिक-राजनीतिक सम्मेलन के दौरान दिए गए इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया हलकों में तेजी से वायरल हो रहा है। मंच पर मौजूद कट्टरपंथी मौलाना ने जोश-जोश में हाफिज सईद के ‘कारनामों’ का बखान करते हुए कहा कि कश्मीर घाटी में भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने के नाम पर हजारों नौजवानों को ट्रेनिंग दी गई और उन्हें सीमा पार (Line of Control – LoC) भेजा गया।
मौलाना ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि हाफिज सईद ने न केवल आतंकवादियों की भर्ती की, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक हथियारों, नक्शों और फंडिंग के साथ भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने का पूरा ढांचा तैयार किया था। इस बयान ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि कश्मीर में दशकों से जारी रक्तपात और आम नागरिकों की मौतों के पीछे सीधे तौर पर हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठनों का हाथ रहा है।

पाकिस्तान के सरकारी झूठ का पर्दाफाश
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों—चाहे वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) हो या फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF)—पर यह साबित करता आया है कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म (सीमा पार आतंकवाद) के लिए किया जाता है। हालांकि, इस्लामाबाद हर बार इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है और हाफिज सईद को केवल एक “धार्मिक और कल्याणकारी कार्यकर्ता” बताता रहा है।
लेकिन अब पाकिस्तान के भीतर ही आतंकी मंचों से आ रहे ये बयान उसकी पूरी विदेश नीति और रणनीतिक झूठ की कलई खोलते हैं। जब खुद पाकिस्तान का एक धार्मिक-आतंकी रहनुमा मंच से चीख-चीखकर हजारों आतंकियों की घुसपैठ की बात स्वीकार करता है, तो पाकिस्तान के पास रक्षात्मक होने का भी कोई रास्ता नहीं बचता।
हाफिज सईद और लश्कर का खौफनाक नेटवर्क
हाफिज मोहम्मद सईद, जो संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित एक वैश्विक आतंकवादी है, लश्कर-ए-तय्यबा का संस्थापक है। उसने भारत में कई बड़े और आत्मघाती आतंकी हमलों की साजिश रची है:
- 2001 भारतीय संसद हमला: देश के लोकतंत्र के मंदिर पर हमला करने की साजिश में लश्कर का सीधा हाथ था।
- 2008 मुंबई हमला (26/11): 10 हथियारबंद आतंकवादियों को कराची के समुद्री रास्ते से मुंबई भेजकर 166 निर्दोष लोगों की हत्या करवा दी गई।
- कश्मीर में घुसपैठ व टारगेट किलिंग्स: घाटी में सुरक्षा बलों, स्थानीय पुलिसकर्मियों, कश्मीरी पंडितों और गैर-स्थानीय मजदूरों पर हमले कराने का काम लश्कर के स्लीपर सेल्स करते रहे हैं।
पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई (ISI) और सेना के संरक्षण में हाफिज सईद ने मुजफ्फराबाद (PoK) और पंजाब प्रांत में कई ट्रेनिंग कैंप चलाए, जहां नौजवानों का ब्रेनवॉश करके उन्हें ‘फिदायीन’ बनाया जाता था।
वैश्विक बिरादरी पर दबाव और भारत का कड़ा रुख
इस खुलासे के बाद भारत का पक्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत हुआ है। भारतीय विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान के ‘आतंकवादी तंत्र’ (Terror Infrastructure) का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
विश्लेषकों का मानना है कि:
- FATF की नजर: पाकिस्तान भले ही ग्रे-लिस्ट से बाहर आ गया हो, लेकिन आतंकी फंडिंग और लश्कर-फलाह-ए-इंसानियत जैसे मुखौटा संगठनों पर नकेल न कसने के कारण उस पर दोबारा वैश्विक वित्तीय प्रतिबंधों का खतरा मंडरा सकता है।
- सख्त कार्रवाई की मांग: भारत हमेशा से हाफिज सईद के प्रत्यर्पण या उस पर पाकिस्तान में ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत मुकदमा चलाने की मांग करता रहा है। पाकिस्तान की जेलों में बंद होने का ड्रामा करने वाला हाफिज सईद आज भी वहां के आतंकी नेटवर्क को अप्रत्यक्ष रूप से संचालित कर रहा है।
बदल चुका है कश्मीर का परिदृश्य
पाकिस्तान और हाफिज सईद जैसे आतंकी आकाओं की तमाम कोशिशों के बावजूद, आज का जम्मू-कश्मीर काफी बदल चुका है। धारा 370 के हटने के बाद से घाटी में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और टेरर फंडिंग पर करारी चोट की गई है। भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त अभियानों के तहत ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ के जरिए लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन के शीर्ष कमांडरों का सफाया कर दिया गया है।
पाकिस्तानी मौलाना का यह कबूलनामा दरअसल उस बौखलाहट का नतीजा है जो कश्मीर में आतंकवाद का बाजार बंद होने से पाकिस्तान के आतंकी आकाओं में पैदा हुई है। दुनिया के सामने अब यह पूरी तरह शीशे की तरह साफ है कि कश्मीर में हिंसा का असली सूत्रधार कोई और नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं पर पलने वाला हाफिज सईद और उसे पनाह देने वाली पाकिस्तानी हुकूमत है।
यह भी पढ़ें: ‘द रेबेल किड’ अपूर्वा मुखीजा ने भारत छोड़ न्यूयॉर्क में बसाया डेरा: बोलीं- ‘MBA की यह डिग्री मेरे किसी काम की नहीं’