IIT बॉम्बे में छात्र ने की आत्महत्या, कैंपस में भारी हंगामा और प्रदर्शन; परीक्षा में ChatGPT के इस्तेमाल का लगा था आरोप

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे एक बार फिर एक दुखद घटना और उसके बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में है। संस्थान के कैंपस में एक मेधावी छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद से ही पूरे कैंपस में माहौल तनावपूर्ण हो गया है और छात्रों ने प्रशासन के रवैये तथा मानसिक दबाव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बताया जा रहा है कि पिछले 7 महीनों के भीतर IIT बॉम्बे परिसर में आत्महत्या का यह तीसरा मामला है, जिसने न केवल संस्थान के आंतरिक माहौल बल्कि देश की उच्च शिक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण और मुख्य कारण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र बी.टेक अंतिम वर्ष का छात्र था। शुरुआती रिपोर्ट्स और छात्रों के दावों के मुताबिक, हाल ही में हुई एक परीक्षा के दौरान छात्र पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ‘ChatGPT’ का उपयोग करके नकल करने का आरोप लगा था। परीक्षा पर्यवेक्षकों ने उसे कथित तौर पर एआई की मदद लेते हुए पकड़ा था, जिसके बाद मामले को संस्थान की अकादमिक अनुशासन समिति (Academic Disciplinary Committee) के पास भेज दिया गया था।

अनुशासन समिति द्वारा जांच शुरू किए जाने के बाद से ही छात्र अत्यधिक मानसिक तनाव में था। सहपाठियों का कहना है कि परीक्षा में अयोग्य ठहराए जाने या करियर खराब होने के डर से वह पिछले कुछ दिनों से काफी परेशान चल रहा था। इसी तनाव के बीच छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में यह आत्मघाती कदम उठा लिया। हालांकि, पुलिस को मौके से कोई आधिकारिक सुसाइड नोट बरामद हुआ है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।

कैंपस में छात्रों का उग्र प्रदर्शन

छात्र की मौत की खबर फैलते ही IIT बॉम्बे के परिसर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में छात्र हॉस्टल से बाहर निकल आए और मुख्य प्रशासनिक भवन के बाहर जमा होकर प्रदर्शन करने लगे। छात्रों का आरोप है कि संस्थान में छोटी-छोटी अकादमिक गलतियों या संदेह के आधार पर छात्रों को अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • पारदर्शी जांच: आत्महत्या के पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए।
  • कड़े नियमों में ढील: अकादमिक ग्रेस और अनुशासन समितियों की कार्यप्रणाली को छात्र-अनुकूल बनाया जाए।
  • मानसिक स्वास्थ्य सहायता: काउंसलर्स की उपलब्धता बढ़ाई जाए और अकादमिक दबाव को कम करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
  • जवाबदेही तय हो: छात्र को अत्यधिक मानसिक तनाव में धकेलने वाले अधिकारियों और प्रोफेसरों की जवाबदेही तय की जाए।

कैंपस में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और छात्र के परिजनों को सूचित कर दिया गया है।

7 महीने में तीसरा मामला: गहराता मानसिक स्वास्थ्य संकट

यह पहली बार नहीं है जब देश के इस प्रतिष्ठित संस्थान से ऐसी खबर सामने आई है। पिछले 7 महीनों के भीतर यह तीसरा मौका है जब किसी छात्र ने कैंपस में अपनी जीवन लीला समाप्त की है। इससे पहले भी दो छात्रों ने अकादमिक दबाव, असफलता के डर और व्यक्तिगत तनाव के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाया था।

बार-बार हो रही इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि प्रीमियर इंजीनियरिंग संस्थानों में पढ़ाई का दबाव और प्रतिस्पर्धा का स्तर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डाल रहा है। भारत के सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं (JEE Advanced) को पास करके आने वाले ये मेधावी छात्र संस्थान के भीतर की कठोर प्रणाली और विफलता के डर को सहन नहीं कर पा रहे हैं।

तकनीक, नकल और अकादमिक दबाव का नया आयाम

इस मामले ने एक और नए विषय पर बहस छेड़ दी है—अकादमिक क्षेत्र में एआई (AI) और ChatGPT जैसे टूल्स का बढ़ता इस्तेमाल। आज के दौर में जहां छात्र असाइनमेंट और कोडिंग के लिए एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं, वहीं शैक्षणिक संस्थानों में इसके उपयोग को लेकर नियम पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं या बहुत अधिक कठोर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक के दौर में संस्थानों को छात्रों को केवल दंडित करने के बजाय यह सिखाने की जरूरत है कि तकनीक का सही और नैतिक इस्तेमाल कैसे किया जाए। अचानक से किसी छात्र पर गंभीर आरोप लगाकर उसे करियर खत्म होने के मोड़ पर खड़ा कर देना उसके मानसिक संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ सकता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता

घटना के बाद IIT बॉम्बे प्रशासन ने गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतक छात्र के परिवार के प्रति संवेदना जताई है। प्रशासन का कहना है कि वे पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और परिसर में शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। संस्थान ने यह भी आश्वासन दिया है कि छात्रों की चिंताओं को सुनने के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी और काउंसिलिंग सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।

हालांकि, छात्रों और शिक्षाविदों का मानना है कि केवल खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। जब तक देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में अकादमिक मूल्यांकन के तरीकों में बदलाव नहीं किया जाएगा और मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा।

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  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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