मध्य प्रदेश के सागर (Sagar, Madhya Pradesh) जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर रील (Instagram Reel) बनाने के शौक और हथियार चमकाने के चक्कर में एक परिवार कानून के शिकंजे में ऐसा फंसा कि एक बड़े वित्तीय राज से पर्दा उठ गया। सागर पुलिस अवैध हथियारों की धरपकड़ के तहत सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पिस्तौल की तस्वीर की जांच करने और आरोपी को पकड़ने उसके घर पहुंची थी। लेकिन पुलिस जब घर के अंदर दाखिल हुई, तो वहां उन्हें पिस्तौल तो नहीं मिली, बल्कि अलमारी से भारी मात्रा में भारतीय मुद्रा (कैश) का अंबार बरामद हो गया।
जब पुलिस ने बंद अलमारी का ताला तोड़ा और बैग खोले, तो अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। अलमारी के अंदर बैगों में करीब 3 करोड़ रुपये की मोटी रकम ठूंस-ठूंस कर रखी गई थी। एक सामान्य किराए की टैक्सी चलाने वाले ड्राइवर के घर में इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला? कैसे शुरू हुई कार्रवाई?
सागर जिले के गोपालगंज थाना क्षेत्र (Gopalganj Police Station) के अंतर्गत आने वाले तिली तिगड्डा इलाके में यह कार्रवाई अंजाम दी गई है। पुलिस द्वारा जिले में सोशल मीडिया पर अवैध हथियारों, चाकू और पिस्तौल का प्रदर्शन करने वालों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। इसी अभियान के दौरान पुलिस को इंस्टाग्राम (Instagram) पर एक युवक की तस्वीर और रील दिखी, जिसमें वह हाथ में पिस्टल लहराता नजर आ रहा था।
इस वायरल फोटो का सत्यापन करने और अवैध हथियार को जब्त करने के इरादे से गोपालगंज थाना पुलिस की टीम रविवार को आरोपी सौरभ अहिरवार के घर पहुंची। सौरभ अपने भाई अंकित अहिरवार और अपनी मां के साथ रहता है। दोनों भाई पेशे से किराए की टैक्सी और ऑटो चलाने का काम करते हैं।
जब पुलिस ने घर में प्रवेश किया और कमरे की तलाशी शुरू की, तो पुलिस को हथियार तो कहीं नजर नहीं आया। लेकिन कमरे के एक कोने में रखी अलमारी पर पुलिस अधिकारियों का शक गहरा गया।
चाबी न होने का बहाना और ताला टूटते ही निकला ‘खजाना’
पुलिस ने जब अलमारी खोलने के लिए परिवार के सदस्यों से चाबी मांगी, तो उन्होंने चाबी गुम होने या न होने का बहाना बनाना शुरू कर दिया। परिवार के इस संदेहास्पद रवैये से पुलिस का शक यकीन में बदल गया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सूचना दी और स्वतंत्र गवाहों (पंचों) को मौके पर बुलाया।
पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए और वीडियोग्राफी की मौजूदगी में जब अलमारी का ताला तोड़ा गया, तो अंदर नजारा देखकर हर कोई सन्न रह गया। अलमारी के भीतर 4 बड़े बैग रखे हुए थे। जब बैगों की जिप खोली गई, तो उनमें 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियों का अंबार भरा पड़ा था।
5 घंटे तक चली गिनती, मंगानी पड़ी कैश काउंटिंग मशीन
बरामद रकम इतनी ज्यादा थी कि पुलिस अधिकारियों के लिए हाथों से नोटों की गिनती करना लगभग असंभव था। इसके तुरंत बाद पुलिस ने बैंक अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया और इलेक्ट्रॉनिक नोट गिनने वाली मशीनें (Cash Counting Machines) मौके पर मंगवाईं।
पुलिस, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में करीब 5 घंटे तक नोटों की गिनती का सिलसिला चला। पूरी गिनती खत्म होने के बाद जो आंकड़ा सामने आया, वह लगभग 3 करोड़ रुपये था। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई गई और सारे कैश को सील कर कानूनी औपचारिकताओं के तहत जब्त कर लिया गया।
ड्राइवर भाइयों का दावा: ‘पीडब्ल्यूडी इंजीनियर का है यह पैसा’
जब पुलिस ने सौरभ अहिरवार और उसके भाई अंकित से इतनी भारी रकम के स्रोत (Source of Income) के बारे में कड़ी पूछताछ की, तो उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। दोनों भाइयों ने पुलिस को बताया कि वे खुद किराए की टैक्सी चलाते हैं और यह 3 करोड़ रुपये उनका खुद का पैसा नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि यह रकम भोपाल में पदस्थ उनके एक रिश्तेदार रमेश अहिरवार की है, जो लोक निर्माण विभाग (PWD) में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। परिवार के अनुसार, रमेश अहिरवार ने करीब 8 से 9 महीने पहले यह रकम उनके घर में लाकर अलमारी में रखी थी और बाद में ले जाने की बात कही थी।
आयकर विभाग (Income Tax) और ED की हो सकती है एंट्री
एक टैक्सी ड्राइवर के घर से करोड़ों रुपये कैश बरामद होने और उसमें सरकारी विभाग के इंजीनियर का नाम सामने आने के बाद यह मामला अब केवल अवैध हथियार तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला अब बेनामी संपत्ति, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग की तरफ इशारा कर रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सागर पुलिस और पुलिस अधीक्षक (SP) अनुराग सुजानिया ने तुरंत आयकर विभाग (Income Tax Department) और राजस्व विभाग को इसकी लिखित सूचना भेज दी है। आयकर विभाग की विशेष टीमें अब इस पूरी रकम के वास्तविक मालिक, इसके प्राथमिक स्रोत और बैंकिंग ट्रेल की जांच करेंगी। यदि आरोपी या संबंधित इंजीनियर इस रकम के वैध दस्तावेज और टैक्स रिटर्न के प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, तो इस राशि को बेनामी संपत्ति अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जब्त कर लिया जाएगा।
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