जनसमाज संवाददाता, दिल्ली। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा और कंटेंट मॉडर्नेशन को लेकर सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक पेज से एक वीडियो अचानक गायब होने के बाद हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता और भारत सरकार के कड़े रुख को देखते हुए मेटा को तुरंत एक्शन में आना पड़ा। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी कि यह कार्रवाई किसी नीतिगत उल्लंघन (Policy Violation) की वजह से नहीं, बल्कि एक तकनीकी खराबी (Technical Glitch) के कारण हुई थी।
क्या है पूरा मामला और किस वीडियो पर हुआ विवाद?
यह पूरा घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो संदेश से जुड़ा है, जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देश के युवाओं और छात्रों को संबोधित करते हुए शेयर किया गया था। इस वीडियो में पीएम मोदी ने देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और हाल के वर्षों में सामने आई ‘पेपर लीक’ की घटनाओं पर सरकार के कड़े रुख का जिक्र किया था।
- पेपर लीक पर कड़ा संदेश: वीडियो में प्रधानमंत्री ने युवाओं को आश्वस्त किया था कि सरकार पेपर लीक करने वाले गिरोहों और माफियाओं के खिलाफ एक अत्यंत कठोर कानून ला रही है, जिसमें फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स और भारी जुर्माने के साथ सख्त सजा का प्रावधान शामिल है।
- लाखों युवाओं से जुड़ा मुद्दा: इस संदेश का सीधा असर देश के करोड़ों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों पर पड़ा था, जिसके कारण वीडियो पोस्ट होते ही बहुत तेजी से वायरल हो गया और इस पर करोड़ों व्यूज आ चुके थे।
- अचानक गायब होना: अचानक 28 जुलाई की तड़के यह वीडियो फेसबुक प्लेटफॉर्म से हट गया, जिससे यूजर्स और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे।
सरकार के सख्त रुख के बाद Meta ने दी यह सफाई
वीडियो हटने की जानकारी सामने आते ही केंद्र सरकार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इसका कड़ा संज्ञान लिया। सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत दिए गए कि राष्ट्रप्रमुख के आधिकारिक संदेशों के साथ इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार के कड़े तेवर देखते ही मेटा ने तुरंत स्थिति को संभाला और वीडियो को प्लेटफॉर्म पर वापस रीस्टोर (Restored) कर दिया। इसके बाद कंपनी ने सार्वजनिक बयान जारी किया
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर उठे सवाल
हालांकि मेटा ने इसे एक “तकनीकी गड़बड़ी” बताकर मामले को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन एक्सपर्ट्स और सरकारी सूत्रों का मानना है कि बिग-टेक कंपनियों के एल्गोरिदम और ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडर्नेशन पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बॉट्स की सीमाएं: सोशल मीडिया कंपनियां स्पैम या विवादित कंटेंट को हटाने के लिए AI बॉट्स का इस्तेमाल करती हैं। कई बार ये बॉट्स संदर्भ (Context) को समझे बिना सही और आधिकारिक कंटेंट को भी फ्लैग कर देते हैं।
- समिट और अधिकारियों को तलब करने की संभावना: सूत्रों के अनुसार, सरकार मेटा के शीर्ष भारतीय अधिकारियों को तलब कर सकती है ताकि यह समझा जा सके कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के सत्यापित (Verified) खाते से कंटेंट हटाने की प्रक्रिया कैसे काम करती है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
- पारदर्शिता की मांग: इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि वैश्विक टेक दिग्गजों को भारत जैसे बड़े बाजारों में अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनने की आवश्यकता है।