बेटे की मौत के 4 महीने बाद मोबाइल से खुलासा: मीशो (Meesho) पर FIR

ऑनलाइन शॉपिंग मीशो प्लेटफॉर्म्स की पहुंच आज घर-घर तक हो चुकी है, लेकिन सुरक्षा और नियम-कायदों की अनदेखी कई बार गंभीर हादसों की वजह बन जाती है। हरियाणा के गुरुग्राम से एक ऐसा ही दुखद और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले 17 वर्षीय छात्र की मौत के चार महीने बाद उसकी मां के अथक प्रयासों से सच्चाई सामने आई है। बेटे के मोबाइल फोन में मिले सुराग के आधार पर ई-कॉमर्स दिग्गज ‘मीशो’ (Meesho) और एक ऑनलाइन विक्रेता के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

क्या है पूरा मामला?

गुरुग्राम के टीकली गांव की निवासी अनुराधा मेहरा के 17 वर्षीय बेटे यूवी ने 12वीं की परीक्षाएं दी थीं। इसी साल 28 अप्रैल को उसने संदिग्ध परिस्थितियों में जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिससे उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इस अचानक हुई घटना से परिवार टूट गया और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर नाबालिग बेटे के पास इतना खतरनाक जहर कहां से आया।

मां की सतर्कता और मोबाइल से मिला सुराग

बेटे के जाने के गम में डूबी मां ने हार नहीं मानी। घटना के कुछ समय बाद जब उन्होंने बेटे के मोबाइल फोन की जांच की, तो उनके होश उड़ गए। मोबाइल में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘मीशो’ (Meesho) का ऐप डाउनलोड था। ऑर्डर हिस्ट्री जांचने पर पता चला कि छात्र ने 11 अप्रैल को मीशो के जरिए ‘सल्फास’ (एक बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित जहरीला रसायन) ऑर्डर किया था।

सल्फास की डिलीवरी सूरत की एक फर्म ‘परमार पंकज भारत भाई-एवरग्रीन एग्रो एंड गार्डनिंग मॉल’ के जरिए की गई थी। मोबाइल से मिले इन डिजिटल सबूतों और डिलीवरी बिल की कॉपी लेकर पीड़ित मां ने तुरंत पुलिस और अदालत का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट के आदेश पर ई-कॉमर्स कंपनी और सेलर पर FIR

पीड़ित मां की याचिका और साक्ष्यों के आधार पर अदालत के निर्देश के बाद गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Meesho और गुजरात के सूरत स्थित सेलर फर्म के खिलाफ गंभीर धाराओं और लापरवाही के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस का कहना है कि कृषि और औद्योगिक उपयोग में आने वाले इतने घातक और प्रतिबंधित जहर को किसी नाबालिग को बिना किसी सत्यापन या लाइसेंस की जांच के डिलीवरी कर देना एक गंभीर अपराध है। इस मामले में मीशो के प्रतिनिधियों और सेलर को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा।

ऑनलाइन बिक्री के सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

इस घटना ने ई-कॉमर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली और उनके सुरक्षा फिल्टर पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • आयु सत्यापन की कमी: क्या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उम्र (Age Verification) और पहचान पत्र की जांच प्रक्रिया इतनी कमजोर है कि नाबालिग घातक सामान मंगवा सकते हैं?
  • प्रतिबंधित पदार्थों की खुलेआम डिलीवरी: सल्फास जैसे खतरनाक केमिकल की बिक्री कानूनन नियंत्रित होती है, तो यह ओपन मार्केटप्लेस पर बिना लाइसेंस कैसे उपलब्ध था?
  • प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही: क्या कोई भी ई-कॉमर्स कंपनी केवल ‘इंटरमीडियरी’ (माध्यम) होने का दावा करके जहरीले और घातक पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री से अपनी जिम्मेदारी से बच सकती है?

पुलिस की जांच जारी

गुरुग्राम पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि मीशो के प्लेटफॉर्म पर यह प्रोडक्ट किस श्रेणी में लिस्टेड था और क्या अन्य जगहों पर भी इस तरह के खतरनाक रसायन ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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  • Rahul Kaushik

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    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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