भारतीय सर्राफा बाजार और वायदा बाजार (MCX) में कीमती धातुओं की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पिछले कुछ दिनों से लगातार उच्चतम स्तरों के करीब कारोबार कर रही चांदी की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही सोने के तेवर भी ढीले पड़े हैं और पीली धातु के भाव भी नीचे आ गिरे हैं।
चांदी के दामों में प्रति किलोग्राम 2,200 रुपये से अधिक की बड़ी कटौती देखी गई, जिससे खरीदारों को राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर, सोने की कीमतों में भी भारी बिकवाली के कारण नरमी आई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट से मिले-जुले संकेतों की वजह से भारतीय बाजारों में यह गिरावट देखने को मिल रही है।
चांदी के भाव में क्यों आया अचानक उछाल-पछाड़?
कमोडिटी मार्केट के विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों से जुड़े संकेतों के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी है।
हाल के हफ्तों में चांदी ने औद्योगिक मांग (Industrial Demand) और सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में बढ़ी खपत के दम पर रिकॉर्ड तेजी दिखाई थी। हालांकि, जब कीमतें अपने उच्च स्तर पर पहुंचती हैं, तब बड़े संस्थागत निवेशक मुनाफा समेटने के लिए बिकवाली का रुख अपनाते हैं। इसी मुनाफावसूली के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी प्रति किलो 2,200 रुपये तक सस्ती हो गई।
सोने की चमक भी हुई फीकी, जानें लेटेस्ट भाव
चांदी के साथ-साथ सोने के दामों में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट (99.9% शुद्धता) और 22 कैरेट (गहने बनाने योग्य) दोनों श्रेणियों के सोने में अच्छी-खासी कमी आई है।
- 24 कैरेट सोना: घरेलू बाजारों में 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
- 22 कैरेट सोना: आभूषण बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में भी प्रति 10 ग्राम गिरावट आई है, जिससे आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन की तैयारी कर रहे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों का असर: अमेरिकी शेयर बाजार और डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने पर कीमती धातुओं पर दबाव बनता है। निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के विकल्प से निकलकर अन्य वित्तीय संपत्तियों की ओर रुख करने लगते हैं।
- मुनाफावसूली (Profit Booking): जब सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर के आसपास ट्रेड करते हैं, तो ट्रेडर्स और निवेशक शॉर्ट टर्म प्रॉफिट कमाने के लिए भारी मात्रा में सेलिंग करते हैं।
- कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड के आंकड़े: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बदलती कीमतें और बॉन्ड यील्ड में मजबूती भी बुलियन मार्केट पर असर डालती है।
- रुपये की चाल: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (USD/INR) की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव आयातित सोने-चांदी के लैंडिंग कॉस्ट पर पड़ता है।
क्या अब खरीदारी करने का सही समय है?
सर्राफा विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी सीजन और शादियों के सीजन से ठीक पहले कीमतों में गिरावट खरीदारों के लिए एक अच्छा मौका साबित हो सकती है। हालांकि, जो निवेशक लंबी अवधि के लिए सोना या चांदी खरीदना चाहते हैं, वे व्यवस्थित तरीके से (SIPP या टुकड़ों में) खरीदारी करने की रणनीति अपना सकते हैं।
विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि खुदरा खरीदार जब भी सोना खरीदें, तो हमेशा BIS हॉलमार्क (Hallmark) देखकर ही खरीदारी करें और पक्का बिल अवश्य लें ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
यह भी पढ़ें:आईआईटी बॉम्बे में छात्र की मौत: डीन की छुट्टी, जानें पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन