‘भाई बचा लो, डर लग रहा’… LPU कैंपस में उपद्रव और चीख-पुकार की वो खौफनाक रात: छात्राओं ने रो-रोकर बताई आपबीती

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) कैंपस की एक आम सी लगने वाली रात देखते ही देखते दहशत, चीख-पुकार और उपद्रव के खौफनाक मंजर में बदल गई। हॉस्टल के कमरों में सुरक्षित समझी जाने वाली छात्राएं अचानक डर से कांपने लगीं। खिड़कियों से बाहर उठती तेज आवाजें, चीखें और भारी तोड़फोड़ का शोर यह बताने के लिए काफी था कि बाहर माहौल बहुत खतरनाक हो चुका था। उस वक्त कमरों में बंद छात्राओं का केवल एक ही सहारा था—अपने दोस्तों, भाइयों और परिजनों को फोन करना। फोन उठाते ही उनकी जुबान से रोते हुए बस एक ही शब्द निकल रहा था—“भाई बचा लो, बहुत डर लग रहा है…”

अचानक बदला कैंपस का माहौल

सामान्य दिनों की तरह छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई, असाइनमेंट और हॉस्टल की दैनिक गतिविधियों में व्यस्त थे। लेकिन अचानक कैंपस के एक हिस्से में हंगामा शुरू हो गया। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि भीड़ आक्रामक हो गई और पथराव व तोड़फोड़ की घटनाएं होने लगीं। जब हॉस्टल के बाहर भारी हंगामा शुरू हुआ, तो अंदर मौजूद छात्राओं को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। लेकिन जैसे-जैसे हॉस्टल की बालकनी और खिड़कियों के शीशों पर पत्थर टकराने लगे, अंदर डर का माहौल बन गया।

रो-रोकर हॉस्टल के कमरों में छिपीं छात्राएं हॉस्टल के अंदर का नजारा किसी बुरे सपने से कम नहीं था। सुरक्षा के लिहाज से हॉस्टल के मुख्य दरवाजे तुरंत बंद कर दिए गए और छात्राओं को अपने-अपने कमरों के अंदर ही रहने की हिदायत दी गई। डर के मारे छात्राओं ने कमरों की लाइटें बंद कर दीं और दरवाजों पर कुंडी लगाकर बेड व अलमारी के पीछे छिप गईं। बाहर से आ रही लगातार तोड़फोड़ और चीखने-चिल्लाने की आवाजों ने छात्राओं का दिल दहला दिया। रो-रोकर कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। मोबाइल स्क्रीन की रोशनी में वे अपनों को मैसेज और कॉल करके लगातार अपनी सुरक्षा की गुहार लगा रही थीं।

“हमें लगा आज बाहर नहीं निकल पाएंगे” एक चश्मदीद छात्रा ने अपना खौफनाक अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसने अपनी जिंदगी में कभी ऐसा मंजर नहीं देखा था। उसने बताया, “हम अपने कमरे में पढ़ाई कर रहे थे, तभी अचानक बहुत जोर से शोर आने लगा। जब हमने खिड़की से बाहर देखा तो काफी संख्या में लोग भाग रहे थे और तोड़फोड़ हो रही थी। कुछ ही मिनटों में सुरक्षा गार्ड्स और छात्रों के बीच झड़प की खबरें आने लगीं। ऐसा लग रहा था जैसे हॉस्टल के दरवाजे कभी भी टूट जाएंगे। मैंने तुरंत घर पर भाई को फोन किया, लेकिन रोने की वजह से मैं ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी। बस यही कह पा रही थी कि भाई बचा लो, यहां स्थिति बहुत खराब है।”

अफ़वाहों ने बढ़ाया दहशत का दायरा

घटना के वक्त कैंपस में मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट के जरिए तरह-तरह की खबरें और अफवाहें फैलने लगीं, जिससे छात्राओं के बीच घबराहट दोगुनी हो गई। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ग्रुप्स पर चल रहे संदेशों से हॉस्टल में बंद छात्राओं को अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा। हर कोई एक-दूसरे को सुरक्षित रहने और दरवाजों से दूर रहने की सलाह दे रहा था। उस काली रात में मिनट-मिनट बीतना घंटों के बराबर लग रहा था। अभिभावक भी दूर बैठकर लाचार महसूस कर रहे थे और लगातार फोन करके अपनी बेटियों का हाल जानने में जुटे थे।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस का फ्लैग मार्च मामले की गंभीरता को देखते हुए भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कैंपस के संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकाला गया और उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कड़े कदम उठाए गए। देर रात जाकर जब पुलिस ने पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में लिया और हॉस्टलों के बाहर सुरक्षा का कड़ा पहरा बैठाया, तब जाकर स्थिति थोड़ी शांत हुई।

सुबह का सूरज और खौफ के निशान जब सुबह का सूरज उगा, तो कैंपस में उस खौफनाक रात के निशान साफ देखे जा सकते थे। टूटे हुए शीशे, बिखरे पत्थर और जगह-जगह सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती यह बयां कर रही थी कि बीती रात किस कदर उपद्रव हुआ था। यद्यपि सुबह तक हालात नियंत्रण में आ गए थे, लेकिन छात्राओं के चेहरों पर जमा खौफ कम नहीं हुआ था। कई छात्राएं घटना के बाद इतनी सदमे में थीं कि उन्होंने तुरंत अपने परिजनों को बुलाकर घर लौटने की तैयारी शुरू कर दी।

विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस ने मामला दर्ज कर उपद्रव करने वाले और शांति भंग करने वाले संदिग्धों की पहचान शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हिंसा भड़काने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में इस त

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  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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