राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के मामले में घिरे दिल्ली पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। विवादों के बीच ACP विवेक भगत को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (AdCP) का अतिरिक्त प्रभार (करंट ड्यूटी चार्ज – CDC) देने के आदेश पर रोक लगा दी गई है। दिल्ली सरकार ने इस संबंध में देर रात संशोधित आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक विवेक भगत को कोई भी अतिरिक्त जिम्मेदारी या पदोन्नति से जुड़ा पदभार नहीं सौंपा जाएगा।
जानिए क्या है पूरा विवाद और आरोप?
मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में आयोजित हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ चल रहे एक प्रदर्शन की कवरेज करने के लिए कई मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि और स्वतंत्र पत्रकार वहां मौजूद थे। इसी दौरान रिपोर्टिंग कर रही महिला पत्रकारों और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई।
प्रदर्शन के दौरान मौजूद तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों, विशेषकर कनॉट प्लेस के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) के पद पर तैनात दानिप्स (DANIPS) कैडर के अधिकारी विवेक भगत ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, उन्हें धक्का दिया और यौन उत्पीड़न जैसा दुर्व्यवहार किया। पीड़ित पत्रकारों का कहना था कि जब वे अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाते हुए घटनास्थल की रिकॉर्डिंग कर रही थीं, तब पुलिसकर्मियों ने उनके साथ न केवल बदसलूकी की, बल्कि उनके काम में बाधा भी डाली।
घटना के बाद पत्रकारों ने संसद मार्ग थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई और दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने तथा उनकी गिरफ्तारी की मांग की। इस घटना के विरोध में कई स्वतंत्र पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी दर्ज कराया।
शुरुआती आदेश और विवाद की वजह
सोमवार (5 अक्टूबर) को गृह विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के तहत दिल्ली पुलिस में कार्यरत 12 दानिप्स अधिकारियों को पदोन्नति के समान माना जाने वाला ‘करंट ड्यूटी चार्ज’ (CDC) प्रदान कर उन्हें अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (AdCP) बनाने की मंजूरी दी गई थी। इस सूची में विवेक भगत का नाम भी शामिल था।
जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई कि यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को सरकार द्वारा बड़ा पदभार दिया जा रहा है, मीडिया गलियारों, सोशल मीडिया और नागरिक समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। विपक्षी दलों और विभिन्न पत्रकार संगठनों ने सरकार और दिल्ली पुलिस प्रशासन के इस रुख पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उनका कहना था कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी आरोपी अधिकारी को इस तरह की प्रशासनिक जिम्मेदारी देना जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
दिल्ली सरकार का स्पष्टीकरण और संशोधित आदेश
बढ़ते विवाद और जनाक्रोश को देखते हुए दिल्ली सरकार ने आधी रात को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर स्थिति साफ की। सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि 12 अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने का प्रस्ताव 25 अगस्त को ही प्रक्रिया में लाया गया था, जो कि जंतर-मंतर पर हुई इस घटना से काफी समय पहले की प्रशासनिक प्रक्रिया थी।
प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 5 अक्टूबर को आदेश जारी किया गया था। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों और अधिकारी के खिलाफ चल रही जांच को ध्यान में रखते हुए आदेश में संशोधन किया गया है।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, खुद ACP विवेक भगत ने भी अनुरोध किया था कि जब तक उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पूरी और निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक उन्हें यह नया प्रभार न दिया जाए। इस आधार पर दिल्ली सरकार ने केवल विवेक भगत के नाम को रोके रखते हुए बाकी 11 अधिकारियों के लिए संशोधित प्रभार आदेश जारी करने की बात कही है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है मामले की जांच
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, महिला पत्रकारों की ओर से मिली शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। मामले की निष्पक्षता और संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मौके पर मौजूद अन्य गवाहों के बयान और पत्रकारों द्वारा दिए गए साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही नियमानुसार अगली कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल, विवेक भगत कनॉट प्लेस में ही अपने मूल पद (ACP/SDPO) पर बने रहेंगे और किसी भी तरह का अतिरिक्त प्रभार नहीं संभालेंगे।