8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठ रहे हैं। इनमें से सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाली और महत्वपूर्ण मांग पेंशन विसंगति (Pension Disparity) को लेकर सामने आई है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने सवाल खड़ा किया है: “जब दो कर्मचारियों का पद एक है, उनका वेतन पे-लेवल एक है और सेवा अवधि भी समान है, तो केवल सेवानिवृत्ति की तारीख अलग होने की वजह से उनकी पेंशन में अंतर क्यों होना चाहिए?”
इस गंभीर विसंगति को दूर करने के लिए पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सिविलियन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी सेना की तर्ज पर ‘वन रैंक, वन पेंशन’ (OROP) जैसा फॉर्मूला लागू करने की मांग रखी है।
पद और पे-लेवल एक, फिर भी पेंशन में अंतर क्यों?
मौजूदा पेंशन निर्धारण प्रणाली में एक बड़ी व्यावहारिक खामी सामने आती है। इसे एक उदाहरण के जरिए समझा जा सकता है:
- मान लीजिए दो कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के एक ही विभाग में समान पद (जैसे सेक्शन ऑफिसर या डिप्टी डायरेक्टर) पर 30 साल तक सेवा दी।
- इनमें से एक कर्मचारी 6वें वेतन आयोग के समय (वर्ष 2012 में) रिटायर हुआ, जबकि दूसरा कर्मचारी 7वें वेतन आयोग के तहत (वर्ष 2020 में) रिटायर हुआ।
- रिटायरमेंट के समय दोनों का पे-लेवल और रैंक समान था, लेकिन चूंकि बाद में वेतन आयोग लागू होने से सेवारत कर्मचारियों के वेतनमान में भारी बढ़ोतरी हुई, इसलिए 2020 में रिटायर होने वाले कर्मचारी की अंतिम बेसिक पे (Last Basic Pay) काफी अधिक बनी।
- इसके परिणामस्वरूप, 2020 में रिटायर हुए कर्मचारी की बेसिक पेंशन, 2012 में उसी पद से रिटायर हुए वरिष्ठ कर्मचारी की पेंशन की तुलना में काफी अधिक हो गई।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि सेवानिवृत्ति की केवल तारीख (Date of Retirement) अलग होने के कारण समान पद और समान जिम्मेदारियां संभालने वाले पूर्व कर्मचारियों के बीच यह वित्तीय अंतर न्यायसंगत नहीं है।
OROP जैसा फॉर्मूला लागू करने की प्रमुख मांग
सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) में लंबे समय से ‘वन रैंक, वन पेंशन’ (OROP) की व्यवस्था लागू है, जिसके तहत समान रैंक और समान सेवा अवधि वाले रक्षा कर्मियों को सेवानिवृत्ति की तिथि से परे समान पेंशन दी जाती है।
इसी तर्ज पर, 8वें वेतन आयोग के सामने मांग रखी गई है कि:
- सिविलियन कर्मचारियों के लिए पेंशन समानता: पे-लेवल 1 से लेवल 18 तक के सभी केंद्रीय सिविलियन कर्मचारियों के लिए भी एक ऐसा समान पेंशन ढांचा तैयार किया जाए जो रिटायरमेंट की तारीख के आधार पर पेंशनभोगी के साथ भेदभाव न करे।
- पद के अपग्रेडेशन का लाभ: यदि किसी पद का वेतनमान या पे-लेवल कर्मचारी के रिटायर होने के बाद अपग्रेड किया जाता है या बढ़ाया जाता है, तो उसका आनुपातिक लाभ उस पद से पहले रिटायर हो चुके पेंशनभोगियों को भी मिलना चाहिए।
- करियर प्रोग्रेशन और इंक्रीमेंट का ध्यान: पेंशन का निर्धारण करते समय केवल अंतिम प्राप्त वेतन (Last Drawn Pay) न देखा जाए, बल्कि उस पद की वर्तमान रिवाइज्ड पे-स्केल, इंक्रीमेंट और प्रमोशन रिकॉर्ड को आधार बनाकर संशोधित पेंशन तय की जाए।
8वें वेतन आयोग का दौर और क्षेत्रीय बैठकें
यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब 8वां केंद्रीय वेतन आयोग देशभर के प्रमुख शहरों में कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार परामर्श बैठकें आयोजित कर रहा है।
- बैठकों की श्रृंखला: आयोग द्वारा अक्टूबर महीने में बेंगलुरु (7-8 अक्टूबर) और मुंबई (22-23 अक्टूबर) जैसे प्रमुख केंद्रों पर हितधारकों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
- टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) और समयावधि: 8वें वेतन आयोग का गठन होने के बाद आयोग को अपनी विस्तृत सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
- 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स: पेंशनभोगी संघों (जैसे REWA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्रालय को पत्र भेजकर यह मांग भी उठाई है कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए लगभग 69 लाख पेंशनर्स की पेंशन समीक्षा को स्पष्ट रूप से 8वें वेतन आयोग के कार्यक्षेत्र (ToR) में शामिल किया जाए ताकि कोई भ्रम न रहे।
पेंशन निर्धारण के संभावित तरीके और फिटमेंट फैक्टर
वेतन आयोग के सामने पेंशन बढ़ाने को लेकर केवल OROP फॉर्मूला ही नहीं, बल्कि न्यूनतम बेसिक पेंशन में बढ़ोतरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी कई प्रस्ताव पेश किए गए हैं:
| मांग/प्रस्ताव का विषय | मौजूदा स्थिति (7वां वेतन आयोग) | 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई मांग |
| न्यूनतम बेसिक पेंशन | ₹9,000 प्रति माह | ₹20,500 से ₹45,000 प्रति माह तक करने का सुझाव |
| फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) | 2.57x | 2.86x से 3.68x / 3.83x तक बढ़ाने की मांग |
| पेंशन की गणना | अंतिम वेतन का 50% | अंतिम वेतन के 50% के साथ-साथ समान पद के वर्तमान वेतन से टैग करना |
| लागू होने की प्रभावी तिथि | 1 जनवरी 2016 (7वां पे कमीशन) | 1 जनवरी 2026 से प्रभावी संशोधन एवं एरियर का प्रावधान |
आगे क्या होगा?
8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनर यूनियनों ने अपनी बात और सुझाव प्रमुखता से रख दिए हैं। हालांकि, ये सभी बिंदु फिलहाल कर्मचारी संगठनों के मांग पत्र (Memorandum) का हिस्सा हैं।
आयोग देशभर के सभी पक्षों की सुनवाई पूरी करने के बाद वित्तीय स्थिति, बजट संतुलन और प्रशासनिक व्यवस्था का आकलन करके अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यदि 8वां वेतन आयोग पेंशन विसंगति को दूर करने के लिए समान पद-समान पेंशन का कोई संतुलित फॉर्मूला स्वीकार कर लेता है, तो इससे देश के लाखों पूर्व केंद्रीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को लंबे समय से चले आ रहे पेंशन अंतर से बड़ी राहत मिल सकती है।
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