पड़ोसी देश पाकिस्तान से आए दिन ऐसे विवादित मामले सामने आते रहते हैं, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में पाकिस्तान के जाने-माने इस्लामिक स्कॉलर और मौलाना मुफ्ती तारिक मसूद अपने एक बेहद शर्मनाक और आपत्तिजनक बयान के चलते बुरी तरह घिर गए हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रसव (डिलीवरी) और पति-पत्नी के रिश्तों को लेकर दिए गए उनके इस बयान ने इंटरनेट पर भूचाल ला दिया है। मुफ्ती की इस संकीर्ण और घटिया सोच पर पाकिस्तान की कई नामी अभिनेत्रियों (PAK हसीनाओं) ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है और उन्हें आड़े हाथों लिया है।
क्या है पूरा मामला और मुफ्ती का विवादित बयान?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुफ्ती तारिक मसूद अपने एक बयान में महिलाओं की शारीरिक स्थिति और प्रसवोत्तर (postpartum) अवधि के बारे में बात कर रहे थे। अपने भाषण के दौरान मुफ्ती ने एक बेहद आपत्तिजनक तर्क दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी महिला को बच्चा होता है, तो उसे कुदरती तौर पर करीब 40 दिनों तक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) होती है। ऐसे में महिलाएं अपने पति के साथ शारीरिक संबंध नहीं बना पाती हैं।
बात यहीं खत्म नहीं हुई, इसके आगे मुफ्ती ने जो कहा, उसने सभी सीमाओं को पार कर दिया। उन्होंने कहा, “40 दिनों तक तो आप (महिलाएं) इन सब चीजों कोavoid करोगी, क्योंकि आपको कुदरत की तरफ से ब्लीडिंग हो रही है, आपको बच्चा हुआ है और कुदरत चाहती है कि आप बच्चे की देखभाल में बिजी रहो। लेकिन, मर्दों को तो ब्लीडिंग नहीं हो रही न, तो आखिर मर्द 40 दिन तक कैसे सब्र करेंगे?”
मुफ्ती तारिक मसूद का यह बयान जैसे ही सार्वजनिक हुआ, सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। इस बयान में महिलाओं के स्वास्थ्य, उनकी शारीरिक पीड़ा और मानसिक स्थिति को दरकिनार करते हुए केवल पुरुषों की कामुकता और उनके ‘सब्र’ न कर पाने को प्राथमिकता दी गई थी। समाज में महिलाओं को लेकर इस तरह की पुरुषवादी और घटिया मानसिकता को देखकर आम जनता से लेकर सेलिब्रिटीज तक का गुस्सा फूट पड़ा।
पाकिस्तानी अभिनेत्रियों का फूटा गुस्सा, जमकर लगाई क्लास
मुफ्ती तारिक मसूद के इस गैर-जिम्मेदाराना और शर्मनाक बयान पर पाकिस्तान की कई जानी-मानी महिला कलाकारों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए मुफ्ती की मानसिकता पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
पाकिस्तान की लोकप्रिय अभिनेत्री याशमा गिल (Yashma Gill) ने इस बयान पर तीव्र प्रतिक्रिया देते हुए अपनी भड़ास निकाली। याशमा गिल ने बिना किसी लाग-लपेट के मुफ्ती को फटकार लगाते हुए कहा कि “कोई तो इस इंसान को चुप करवाओ!” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है और लोग उनके इस बेबाक अंदाज की सराहना कर रहे हैं।
याशमा गिल के अलावा पाकिस्तानी इंडस्ट्री की अन्य नामी अभिनेत्रियों और मॉडल जैसे नादिया हुसैन (Nadia Hussain) और अन्य हस्तियों ने भी इस सोच की कड़ी निंदा की है। इन अभिनेत्रियों का साफ तौर पर कहना है कि प्रसव (delivery) के बाद का समय किसी भी महिला के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद दर्दनाक और नाजुक दौर होता है। एक मां अपने बच्चे को जन्म देने के बाद रिकवरी के दौर से गुजर रही होती है, ऐसे में एक धर्मगुरु द्वारा इस तरह की बातें करना और मर्दों के ‘सब्र’ की चिंता करना बेहद शर्मनाक और असंवेदनशील है।
सोशल मीडिया पर आम जनता ने भी लताड़ा
सिर्फ अभिनेत्रियां ही नहीं, बल्कि आम पाकिस्तानी आवाम और सोशल मीडिया यूजर्स ने भी मुफ्ती तारिक मसूद को खरी-खोटी सुनाई है। इंटरनेट पर लोगों ने मौलाना की जमकर क्लास ली।
- एक यूजर ने गुस्से में लिखा, “मौलवी साहब, अब बस भी कीजिए और इस तरह की बकवास बंद कीजिए। समाज को आगे बढ़ाने के बजाय ऐसी घटिया बातें करना आपकी छोटी सोच को दर्शाता है।”
- दूसरे यूजर ने लिखा, “लानत है ऐसी सोच पर, जो एक महिला के प्रसव के दर्द को समझने के बजाय सिर्फ अपनी वासना और हवस के बारे में सोचती है। यह इंसान रोज कैमरे के सामने आकर समाज में जहर घोलता है।िडियों
- एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “क्या एक महिला की कोई इज्जत या स्वास्थ्य का महत्व नहीं है? क्या इस्लाम यही सिखाता है कि बच्चे के जन्म के बाद भी महिला की सेहत की परवाह न करके सिर्फ पुरुषों की संतुष्टि देखी जाए?”
पितृसत्तात्मक सोच पर एक बार फिर गंभीर सवाल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब मुफ्ती तारिक मसूद अपने बयानों के कारण विवादों में आए हों। वह पहले भी महिलाओं के अधिकारों, पहनावे और स्वतंत्रता को लेकर कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं, जिन्हें रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक माना जाता है। हालांकि, इस बार का मामला सीधे तौर पर महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य और मातृत्व (maternity) से जुड़ा हुआ था, जिसके चलते इसका विरोध बहुत व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों और हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रसव के बाद के 40 दिन (प्यूपेरियम पीरियड) महिला के शरीर के लिए रिकवरी का समय होता है। इस दौरान महिला का शरीर कई प्रकार के हार्मोनल और शारीरिक बदलावों से गुजरता है। ऐसे संवेदनशील समय में धार्मिक मंचों से इस तरह के बयान देना न केवल महिलाओं के प्रति अनादर को दिखाता है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी प्रसारित करता है।
बहरहाल, मुफ्ती तारिक मसूद के इस बयान के बाद पाकिस्तान में एक बार फिर से महिलाओं के अधिकारों और रूढ़िवादी सोच को लेकर बहस छिड़ गई है। पाकिस्तानी हसीनाओं द्वारा उठाई गई इस आवाज ने यह साबित कर दिया है कि अब महिलाएं इस तरह के बयानों को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेंगी और हर मोर्चे पर इसका खुलकर विरोध करेंगी।
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