दिल्ली: दिल्ली के 7 लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास) के बाहर अचानक शुरू हुए हाई-प्रोफाइल राजनीतिक धरने ने देश की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग और पेपर लीक मामले को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव जैसे शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ एकजुटता दिखाने के बजाय आम आदमी पार्टी ने राहुल गांधी के इस धरने पर तीखा हमला बोल दिया। ‘आप’ के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस और भाजपा के बीच ‘जुगलबंदी’ तक का आरोप लगा दिया।
आखिर राहुल गांधी के इस कदम से आम आदमी पार्टी क्यों भड़क गई? इस राजनीतिक तनातनी के पीछे का पूरा गणित और सियासी बहस का विश्लेषण:
1. क्रेडिट वार: ‘सीजेपी’ आंदोलन को हाईजैक करने का डर
आम आदमी पार्टी की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह क्रेडिट (श्रेय) की लड़ाई मानी जा रही है। पिछले एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठन (CJP) और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक NEET और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे आम आदमी पार्टी खुलकर समर्थन दे रही थी।
आम आदमी पार्टी का मानना है कि उसने और छात्र संगठनों ने जिस आंदोलन को एक महीने की मेहनत से राष्ट्रीय पटल पर खड़ा किया, राहुल गांधी ने अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर पूरी मीडिया की सुर्खियां और राजनीतिक माइलेज अपनी तरफ खींच लिया। ‘आप’ को लगा कि कांग्रेस उनके तैयार किए मंच और जन-आक्रोश का पूरा फायदा उठाकर खुद को छात्रों का मुख्य हमदर्द साबित करने में जुट गई है।
2. ‘आप’ के गंभीर आरोप: ‘कांग्रेस-भाजपा की जुगलबंदी’
धरना शुरू होते ही आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस पर सीधा हमला बोला।
- आतिशी का सवाल: दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और AAP नेता आतिशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा: “यह वाकई कमाल है। CJP और सोनम वांगचुक एक महीने से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार उनसे बात करने से इनकार करती है। वहीं, राहुल गांधी को PM आवास के बाहर विरोध करने की इजाजत मिलती है और एक घंटे के अंदर ही मोदी सरकार बातचीत के लिए मंत्री भेज देती है। वाह! क्या जुगलबंदी है!”
- संजय सिंह का दावा: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की धार को कुंद करने के लिए यह सब प्रायोजित था। उन्होंने कहा: “CJP के धरने को कमजोर करने के लिए मोदी जी ने राहुल गांधी को अपने आवास पर धरने पर बिठा दिया।”
‘आप’ नेताओं का तर्क है कि दिल्ली पुलिस जो जंतर-मंतर के छात्रों को संसद की ओर 100 मीटर भी नहीं बढ़ने दे रही थी, उसने राहुल गांधी को सीधे प्रधानमंत्री आवास के गेट तक पहुँचने और बैठने कैसे दिया?

3. दिल्ली और राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व की होड़
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भले ही राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन का हिस्सा रहे हों, लेकिन दिल्ली और पंजाब में दोनों पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी हैं।
- सड़क का विपक्ष कौन?: आम आदमी पार्टी खुद को भारतीय राजनीति में सड़कों पर उतरकर सबसे आक्रामक आंदोलन करने वाली पार्टी मानती है। राहुल गांधी द्वारा सड़क पर बैठकर सांकेतिक रूप से हथकड़ियां पहनकर विरोध दर्ज कराने से ‘आप’ के इस ‘आंदोलनकारी’ नैरेटिव को चुनौती मिलती दिख रही है।
- छात्र और युवा वोट बैंक: देश का युवा और छात्र वर्ग इस समय पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की कमियों को लेकर आक्रोशित है। ‘आप’ इस जनाक्रोश को अपने साथ जोड़ना चाहती थी, लेकिन राहुल गांधी के सीधे एक्शन से कांग्रेस इस मुद्दे पर विपक्षी चेहरा बनकर उभरी है।
4. कांग्रेस और भाजपा का पलटवार
आम आदमी पार्टी के इन हमलों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई:
- कांग्रेस का जवाब: कांग्रेस यूथ विंग के नेताओं ने ‘आप’ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जब मुख्य विपक्षी दल और नेता प्रतिपक्ष देश के युवाओं की आवाज उठाकर सीधे प्रधानमंत्री से जवाब मांग रहे हैं, तब आम आदमी पार्टी का पेट दर्द होना यह साबित करता है कि असली ‘जुगलबंदी’ ‘आप’ और भाजपा के बीच है।
- भाजपा का तंज: भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने आम आदमी पार्टी पर चुटकी लेते हुए कहा कि ‘आप’ नेताओं के बयानों से साफ हो गया है कि जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन कोई गैर-राजनीतिक छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि वह आम आदमी पार्टी का ही प्रायोजित कार्यक्रम था।
निष्कर्ष: क्या ढीली पड़ रही है विपक्षी एकता?
राहुल गांधी के धरने पर आम आदमी पार्टी के इस रुख ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी एकजुटता के दावों के बावजूद ज़मीनी राजनीति में वर्चस्व और श्रेय की जंग चरम पर है। छात्रों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की जगह जब विपक्ष की दो बड़ी पार्टियां आपस में ही उलझ जाएं, तो इससे सरकार विरोधी आंदोलनों की दिशा और गति दोनों प्रभावित होती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आपसी खींचतान ‘इंडिया’ गठबंधन के भविष्य पर क्या असर डालती है।