नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस वीडियो पर चुप्पी तोड़ी है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उन्हें नजरअंदाज (इग्नोर) कर दिया था। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान इस विवाद पर खुलकर बोलते हुए स्मृति ईरानी ने बेहद सधे और स्पष्ट शब्दों में इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने रखी। उन्होंने कहा, “वो प्रधानमंत्री की पीठ है, उसे क्या पता कि कौन किसको हाथ जोड़ रहा है।”
राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ समय से एक वीडियो क्लिप काफी तेजी से प्रसारित हो रही थी। यह वीडियो पश्चिम बंगाल में एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान का बताया जा रहा था। इस वीडियो में देखा जा सकता था कि मंच पर मौजूद स्मृति ईरानी काफी भावुक नजर आ रही थीं और जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंचे, तो ईरानी ने बार-बार हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। हालांकि, वीडियो के जिस हिस्से को कट करके वायरल किया गया, उसमें दिखाया गया कि पीएम मोदी बिना उनकी तरफ देखे आगे बढ़ गए। इसके बाद राजनीतिक विरोधियों और ट्रोल्स ने यह दावा करना शुरू कर दिया कि बीजेपी संगठन और सरकार में स्मृति ईरानी को अब ‘इग्नोर’ किया जा रहा है।
वायरल वीडियो का पूरा सच: स्मृति ईरानी ने बताई भावुक क्षणों की कहानी
इंटरव्यू के दौरान जब एंकर ने इस चर्चित वीडियो के बारे में सवाल पूछा, तो स्मृति ईरानी ने मुस्कुराते हुए पूरी घटना की परतें खोलीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच का माहौल बहुत अलग था और वहां कई ऐतिहासिक पल एक साथ घटित हो रहे थे।
स्मृति ईरानी ने बताया, “हां, उस समय मैं और दादा (प्रसिद्ध अभिनेता और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती) एक साथ ही बैठे थे। मंच पर जितने भी लोग मौजूद थे, उन सभी की अपनी एक संघर्षपूर्ण कहानी थी। वहां बंगाल के ऐसे पुराने और समर्पित कार्यकर्ता बैठे थे जिन्होंने पार्टी के लिए बहुत कुछ सहा है। प्रधानमंत्री मोदी मंच पर आकर उन्हीं पुराने कार्यकर्ताओं का अभिवादन कर रहे थे, जिन्होंने संगठन को खड़ा करने में अपनी जिंदगी खपा दी।”
उन्होंने आगे कहा कि जब कोई व्यक्ति आगे की ओर देखकर लोगों से मिल रहा होता है, तो पीछे कौन खड़ा होकर अभिवादन कर रहा है, यह दिखना संभव नहीं होता। इसलिए इसे ‘इग्नोर करना’ कहना पूरी तरह से बेबुनियाद और भ्रामक है। ईरानी के मुताबिक, विपक्ष और कुछ लोगों ने इसे उपहास का विषय बनाने की कोशिश की, लेकिन ऐसी बातें उनके लिए कोई मायने नहीं रखतीं। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह थी कि उस समय जो जीत मिली थी, वह पूरे संगठन के लिए बेहद सुखद और गर्व का क्षण थी।
वायरल वीडियो विवाद: मुख्य बिंदु
• क्या था दावा: पीएम मोदी ने मंच पर स्मृति ईरानी के अभिवादन को नजरअंदाज किया।
• स्मृति ईरानी का जवाब: "वो पीएम की पीठ है, उसे क्या पता कौन पीछे से हाथ जोड़ रहा है।"
• मंच की स्थिति: प्रधानमंत्री वहां मौजूद वरिष्ठ एवं पुराने कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।
• प्रतिक्रिया: विपक्ष द्वारा इसे तूल देने की कोशिश को स्मृति ईरानी ने पूरी तरह से खारिज किया।
बंगाल चुनाव का संघर्ष और समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान
इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने पश्चिम बंगाल में पार्टी के संघर्षों और कार्यकर्ताओं पर हुए अत्याचारों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस मंच पर उनका भावुक होना स्वाभाविक था, क्योंकि उन्होंने और बंगाल के कार्यकर्ताओं ने बहुत कठिन समय देखा है।
स्मृति ईरानी ने कहा, “हमने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के लिए राजनीतिक विरोधियों से गालियां तक सुनी हैं। वहां के कार्यकर्ताओं ने शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेली है। ऐसे में जब पीएम मोदी मंच पर पहुंचे, तो उनका पूरा ध्यान उन कार्यकर्ताओं पर था जिन्होंने विषम परिस्थितियों में पार्टी का झंडा थामे रखा। एक लड़की से वे आंख कैसे मिलाएंगे जब सामने इतने पुराने और बुजुर्ग कार्यकर्ता मौजूद हों? प्रधानमंत्री उन्हीं का अभिवादन कर रहे थे और यही एक सच्चे नेता की पहचान होती है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया पर कट-पेस्ट करके बनाए गए वीडियो से वास्तविक परिस्थितियां नहीं बदली जा सकतीं। उनके लिए और पार्टी के लिए व्यक्तिगत मान-अपमान से ऊपर बंगाल का वह कार्यकर्ता है, जिसने न्याय और बदलाव के लिए लड़ाई लड़ी।
ट्रोल्स और सोशल मीडिया आलोचना पर ईरानी का नजरिया
टेलीविजन की दुनिया से लेकर देश की राजनीति में 25 वर्षों का सफर तय कर चुकीं स्मृति ईरानी से जब यह पूछा गया कि सोशल मीडिया पर लगातार होने वाली ट्रोलिंग को वे कैसे संभालती हैं, तो उन्होंने बेहद व्यावहारिक उत्तर दिया।
स्मृति ईरानी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति को आलोचना और ट्रोलिंग के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है:
- रचनात्मक फीडबैक की कद्र: अगर कोई आपको किसी ठोस या रचनात्मक कारण से ट्रोल या क्रिटिसाइज कर रहा है, तो उस पर ध्यान देना चाहिए और उससे सीखना चाहिए।
- नकारात्मकता को खारिज करना: अगर कोई सिर्फ इसलिए ताने मार रहा है या दुष्प्रचार कर रहा है ताकि आप मानसिक रूप से टूट जाएं या असफल हो जाएं, तो ऐसी बातों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देना चाहिए।
- खुद को पीड़ित न बनने देना: अगर आप ट्रोल्स की हर बेबुनियाद बात को दिल से लगा लेंगे, तो आप खुद को एक ‘विक्टिम’ (पीड़ित) के रूप में देखने लगेंगे, जो सार्वजनिक जीवन के लिए सही नहीं है।
उन्होंने कहा, “मैंने सार्वजनिक जीवन में 25 साल से अधिक का समय बिताया है। इस लंबे करियर ने मुझे यह सिखाया है कि कौन सी बात सुनने लायक है और किसे एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देना चाहिए।”
“पीएम मोदी मेरे पिता तुल्य हैं”: पीएम के बचाव पर दिया भावुक बयान
राजनीतिक हमलों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव करने के सवाल पर स्मृति ईरानी काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के प्रति उनका सम्मान केवल एक राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक पारिवारिक अभिभावक के रूप में है।
ईरानी ने कहा, “हम पिछले 24 सालों से नरेंद्र मोदी जी को देख रहे हैं। वह एक ऐसे निष्ठावान नेता हैं, जिनकी माताजी का निधन हुआ, लेकिन उन्होंने अपना व्यक्तिगत शोक दरकिनार कर दाह संस्कार के तुरंत बाद देश के लिए वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने अपनी निजी क्षति पर नेताओं को इकट्ठा करके संवेदनाएं बटोरने का काम नहीं किया, बल्कि देश सेवा को सर्वोपरि रखा।”
उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा, “वह मेरे पिता की उम्र के हैं। अगर कोई राजनीतिक विरोधी उनके खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करता है या उनके ‘गिरेबान’ तक हाथ पहुंचाने की कोशिश करता है, तो एक कार्यकर्ता और बेटी होने के नाते उनका बचाव करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। अगर हम अपने नेता और अभिभावक के सम्मान की रक्षा न कर सकें, तो यह हमारी नाकामी होगी।”
राजनीतिक जीवन और संगठनात्मक भूमिकाएं
उल्लेखनीय है कि स्मृति ईरानी भारतीय जनता पार्टी की उन प्रमुख महिला नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने कम समय में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। टीवी धारावाहिकों से अपने करियर की शुरुआत करने वाली स्मृति ईरानी ने राजनीति में आने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
- मंत्रालयों का दायित्व: मोदी सरकार के पिछले कार्यकालों में उन्होंने मानव संसाधन विकास (शिक्षा मंत्रालय), कपड़ा मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला।
- संगठनात्मक क्षमता: चुनाव प्रचार से लेकर पार्टी संगठन को मजबूत करने तक, स्मृति ईरानी को बीजेपी का एक प्रखर वक्ता और आक्रामक रणनीतिकार माना जाता है। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भी उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा गया था।
हाल के दिनों में उनके राजनीतिक भविष्य और संगठन में भूमिका को लेकर मीडिया के एक वर्ग में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, स्मृति ईरानी ने अपने इस हालिया इंटरव्यू से स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी और नेतृत्व के प्रति पूरी तरह निष्ठावान हैं और वायरल वीडियो के जरिए फैलाए जा रहे भ्रम का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
स्मृति ईरानी के इस बयान ने सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से चल रही मनगढ़ंत चर्चाओं और अफवाहों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक छोटे से वीडियो क्लिप को संदर्भ से बाहर निकालकर पेश करना बेहद आसान होता है, लेकिन उसके पीछे की वास्तविक स्थिति और भावनाएं बिल्कुल अलग होती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने संबंधों और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके सम्मान को रेखांकित करते हुए ईरानी ने विरोधियों को यह साफ संदेश दिया है कि इस तरह के दुष्प्रचार से पार्टी के अंदरूनी रिश्तों और निष्ठा पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।
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