जनसमाज संवाददाता,बेंगलुरु: टेक-हब और सुरक्षा के लिहाज से देश के प्रमुख शहरों में गिना जाने वाला बेंगलुरु एक बार फिर क्विक-कॉमर्स (Quick-Commerce) डिलीवरी सेवाओं की सुरक्षा पर सवालों के घेरे में आ गया है। हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली घटना में, बेंगलुरु की एक निवासी महिला ने लोकप्रिय क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘ज़ेप्टो’ (Zepto) के एक डिलीवरी एजेंट पर उसके घर के भीतर ज़बरदस्ती घुसने की बार-बार कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित महिला के अनुसार, डिलीवरी पार्टनर डिलीवरी देने के बाद भी लगभग 5 मिनट तक उसके घर के दरवाज़े पर अड़ा रहा और बार-बार अंदर दाखिल होने का प्रयास करता रहा।
इस पूरी घटना का विवरण महिला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के ज़रिए साझा किया, जिसके बाद यह मामला तेज़ी से इंटरनेट पर वायरल हो गया और लोगों में त्वरित डिलीवरी ऐप्स (Quick-Commerce Apps) के ज़रिए घर तक पहुँचने वाले डिलीवरी एजेंटों की सुरक्षा जाँच (Verification) को लेकर भारी आक्रोश फैल गया है।
क्या है पूरा मामला? पीड़ित महिला की जुबानी
पीड़ित महिला के अनुसार, घटना उस समय घटी जब उसने दैनिक उपयोग के कुछ सामानों के लिए ज़ेप्टो ऐप पर ऑर्डर बुक किया था। ऑर्डर कन्फर्म होने के कुछ ही मिनटों बाद डिलीवरी एजेंट सामान लेकर उसके अपार्टमेंट के दरवाज़े पर पहुँचा। महिला ने जैसे ही सामान रिसीव करने के लिए दरवाज़ा थोड़ा सा खोला और सामान हाथ में लिया, आमतौर पर डिलीवरी एजेंट सामान देकर तुरंत निकल जाते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
सामान सौंपने के बाद भी डिलीवरी एजेंट वहीं खड़ा रहा। महिला ने जब उससे पूछा कि क्या कोई भुगतान बकाया है या कोई अन्य समस्या है, तो उसने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बजाय, उसने दरवाज़े के फ्रेम को पकड़ लिया और अंदर झाँकने तथा कदम बढ़ाने की कोशिश करने लगा। महिला ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझा और दरवाज़ा बंद करने का प्रयास किया, लेकिन डिलीवरी एजेंट ने दरवाज़े को ज़बरदस्ती धकेल कर अंदर घुसने की कोशिश जारी रखी।
“वह सिर्फ एक या दो सेकंड का भ्रम नहीं था; वह पूरे 5 मिनट तक लगातार मेरे दरवाज़े पर बना रहा और बिना किसी झिझक या डर के अंदर आने का प्रयास करता रहा। अगर मैंने पूरी ताकत से दरवाज़ा बंद करके लॉक नहीं किया होता, तो कुछ भी अनहोनी हो सकती थी।” — पीड़ित महिला का बयान।
महिला ने हिम्मत जुटाकर किसी तरह दरवाज़ा पूरी तरह बंद कर कुंडी लगा ली और अंदर से शोर मचाने की चेतावनी दी, जिसके बाद आरोपी डिलीवरी एजेंट वहाँ से फरार हुआ। इस पूरी घटना से महिला अत्यधिक मानसिक तनाव और भय के माहौल में आ गई।
सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर आक्रोश
घटना के तुरंत बाद महिला ने अपने सोसाइटी प्रबंधन (Society Management) को सूचित किया और सीक्रेट सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जाँच की मांग की। सीसीटीवी फुटेज में भी देखा गया कि डिलीवरी एजेंट सामान डिलीवर करने के बाद तुरंत वापस जाने के बजाय दरवाज़े के पास संदेहास्पद स्थिति में खड़ा था और अंदर जाने के लिए ज़बरदस्ती कर रहा था।
महिला ने सुरक्षा में इस गंभीर चूक की शिकायत तुरंत ज़ेप्टो के कस्टमर सपोर्ट (Customer Support) से की और साथ ही एक्स (पूर्व में ट्विटर) तथा इंस्टाग्राम पर अपने कड़वे अनुभव को साझा किया। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट आते ही नेटीजन्स ने ज़ेप्टो प्रशासन और डिलीवरी सेवाओं की सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
- उपयोगकर्ताओं की चिंताएं: हज़ारों उपयोगकर्ताओं ने इस पोस्ट को री-ट्वीट किया और लिखा कि अकेले रहने वाली महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए इस तरह की घटनाएँ बेहद डरावनी हैं।
- सख्त कार्रवाई की मांग: सोशल मीडिया यूज़र्स ने पुलिस से आरोपी डिलीवरी एजेंट के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC/BNS) के तहत कड़ी धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है।
कंपनी (Zepto) की प्रतिक्रिया और सुरक्षा पर सवाल
मामले के तूल पकड़ने के बाद ज़ेप्टो के आधिकारिक प्रतिनिधि ने सोशल मीडिया पर पीड़ित महिला से संपर्क किया और इस घटना के लिए गहरा खेद व्यक्त किया। कंपनी की ओर से जारी एक शुरुआती बयान में कहा गया:
“हम अपने ग्राहकों की सुरक्षा को अत्यधिक प्राथमिकता देते हैं। संबंधित डिलीवरी पार्टनर का अकाउंट तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। हमारी आंतरिक सुरक्षा टीम इस पूरे मामले की गहन जाँच कर रही है और हम आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में स्थानीय पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे।”
हालाँकि, ज़ेप्टो की इस त्वरित प्रतिक्रिया के बावजूद, त्वरित डिलीवरी उद्योग (10-Minute Delivery Models) में काम करने वाले कर्मचारियों के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (Background Verification) और उनके व्यवहारिक प्रशिक्षण पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
- क्या 10 मिनट डिलीवरी का दबाव जिम्मेदार है? त्वरित डिलीवरी ऐप्स के बीच तेज़ डिलीवरी की होड़ लगी हुई है। ऐसे में कई बार थर्ड-पार्टी एजेंसियों के माध्यम से बिना कड़े पुलिस वेरिफिकेशन के डिलीवरी एजेंटों को काम पर रख लिया जाता है।
- ग्राहकों की निजता और सुरक्षा: डिलीवरी एजेंटों के पास ग्राहकों का पूरा पता, फोन नंबर और यहाँ तक कि यह जानकारी भी होती है कि घर में कौन अकेला है। इस जानकारी का गलत इस्तेमाल महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
पुलिस में शिकायत और भावी कानूनी कदम
पीड़ित महिला ने इस मामले में स्थानीय बेंगलुरु पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और ज़ेप्टो ऐप से प्राप्त डिलीवरी एजेंट के विवरण के आधार पर आरोपी की पहचान की जा रही है और उसे जल्द ही हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में केवल ऐप आधारित कंपनियों द्वारा डिलीवरी एजेंट को सस्पेंड कर देना काफी नहीं है। कंपनियों पर भी लापरवाही और अपर्याप्त सुरक्षा जाँच के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
क्विक-कॉमर्स में महिला सुरक्षा: अब आगे क्या?
बेंगलुरु की यह घटना कोई पहली घटना नहीं है जब किसी डिलीवरी एजेंट या राइड-शेयरिंग ड्राइवर पर इस तरह के आरोप लगे हों। इस घटना ने एक बार फिर से उन लाखों महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है जो रोज़मर्रा के कामों के लिए इन ऐप्स पर निर्भर हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों के सुझाव:
- वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आधारित डिलीवरी: सामान सौंपने के बाद तुरंत डिलीवरी समाप्त मानी जाए और एजेंटों के लिए दरवाज़े से दूर रहना अनिवार्य किया जाए।
- कड़ा पुलिस सत्यापन: किसी भी डिलीवरी पार्टनर को ऑनबोर्ड करने से पहले उसका आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस सत्यापन 100% अनिवार्य हो।
- इमरजेंसी ‘SOS’ बटन: क्विक-कॉमर्स ऐप्स में ग्राहकों के लिए एक लाइव SOS बटन होना चाहिए जो सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन या सोसाइटी सिक्योरिटी को अलर्ट भेजे।
यह घटना यह साबित करती है कि सुविधा (Convenience) कभी भी सुरक्षा (Safety) की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। जब तक टेक कंपनियाँ अपने डिलीवरी मॉडल में सुरक्षा तंत्र को मजबूत नहीं करतीं, तब तक इस तरह की घटनाएँ ग्राहकों के मन में खौफ पैदा करती रहेंगी।
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