मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र से एक दिल नहला देने वाली और समाज को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ शादी के महज कुछ ही समय बाद दहेज की दानवी अग्नि ने एक और नवविवाहिता की बलि ले ली। हैरत और दुख की बात यह है कि मृतका ने महज 15 दिन पहले ही एक मासूम बेटे को जन्म दिया था। घर में जहाँ नवजात के आगमन की खुशियाँ मनाई जानी चाहिए थीं, वहाँ दहेज के लोभियों ने एक माँ की ममता का भी लिहाज नहीं किया और उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी।
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है और मायके पक्ष के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़िता के परिवार वालों की तहरीर पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पति, सास, ससुर और जेठ समेत चार लोगों के खिलाफ दहेज हत्या की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की गहनता से छानबीन कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
पूरा मामला: सगाई से लेकर वारदात तक की कहानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मायके पक्ष ने अपनी बेटी का विवाह सरधना क्षेत्र के निवासी युवक के साथ पूरे रीति-रिवाज और अपनी हैसियत से बढ़कर दान-दहेज देकर संपन्न कराया था। शादी के कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे ससुराल वालों का असली रंग सामने आने लगा।
मायके वालों का आरोप है कि शादी में दिए गए सामान और नकदी से ससुराल पक्ष के लोग संतुष्ट नहीं थे। विवाह के कुछ ही महीनों बाद से मृतका पर अतिरिक्त दहेज, जिसमें महंगी गाड़ी और लाखों रुपये की नकदी शामिल थी, लाने का दबाव बनाया जाने लगा। जब पीड़िता ने अपने पिता की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए असमर्थता जताई, तो उसके साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सिलसिला शुरू हो गया।
15 दिन पहले जन्मा था बेटा, फिर भी नहीं पिघला दिल
इस दुखद कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि महिला ने 15 दिन पूर्व ही एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था। मायके पक्ष को उम्मीद थी कि बच्चे के जन्म के बाद ससुराल वालों के व्यवहार में बदलाव आएगा और घर में खुशहाली लौटेगी। लेकिन दहेज के लालच में अंधे हो चुके ससुराल जनों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
आरोप है कि बच्चे के जन्म के बाद होने वाले पारंपरिक रीति-रिवाजों और ‘छूछक’ (मायके से आने वाला सामान व उपहार) को लेकर भी ससुराल वालों ने कम सामान मिलने का ताना मारना शुरू कर दिया। इस बात को लेकर आए दिन घर में विवाद होता था। आखिरकार, घटना की रात विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने महिला की बेरहमी से हत्या कर दी और मामले को दुर्घटना या आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की।
मायके वालों का हंगामा और पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना जैसे ही मृतका के मायके वालों को मिली, वे भारी संख्या में सरधना पहुंचे। बेटी का शव देखते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई और उन्होंने ससुराल पक्ष पर हत्या का सीधा आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।
पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए शव को कब्जे में लिया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
दर्ज एफआईआर के मुख्य बिंदु:
- नामित आरोपी: पति, सास, ससुर और जेठ (कुल 4 लोग)।
- प्रमुख धाराएं: भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज।
- पुलिस का आश्वासन: आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मासूम के सिर से उठा माँ का साया
इस पूरी त्रासदी में सबसे बड़ा नुकसान उस 15 दिन के बेकसूर नवजात का हुआ है, जिसे यह भी नहीं पता कि उसकी माँ अब इस दुनिया में नहीं रही। जन्म के महज दो हफ्ते बाद ही उसके सिर से माँ का साया हमेशा के लिए उठ गया। मायके वालों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बिलखते हुए मासूम को संभाल रहे हैं। गाँव और आसपास के इलाके में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और लोग आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे हैं।
समाज पर गहराता दहेज का कलंक
कड़े कानूनों और सामाजिक जागरूकता अभियानों के बावजूद दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मेरठ के सरधना की यह घटना एक बार फिर हमारी सामाजिक चेतना पर कड़ा प्रहार करती है।
क्षेत्रीय पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी ताकि पीड़िता के परिवार को न्याय मिल सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए।