दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर की अपार सफलता और बढ़ती राइडरशिप के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी प्रदान करने की तैयारी तेज हो गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) द्वारा दूसरे चरण के तहत वेस्ट UP के तीन महत्वपूर्ण नए रूटों की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और खाका तैयार कर लिया गया है।
इन नए कॉरिडोरों के बनने से बागपत, बड़ौत, बुलंदशहर, खुर्जा, पिलखुवा और हापुड़ जैसे औद्योगिक, कृषि और शैक्षणिक केंद्र सीधे दिल्ली-एनसीआर से हाई-स्पीड रेल नेटवर्क द्वारा जुड़ जाएंगे।
तीन नए प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर
- गाजियाबाद – पिलखुवा – हापुड़ कॉरिडोर (~34 किमी)
- रूट व अलाइनमेंट: यह कॉरिडोर गाजियाबाद RRTS स्टेशन से शुरू होकर NH-9 के समानांतर डासना और पिलखुवा होते हुए हापुड़ तक जाएगा।
- यात्रा समय: वर्तमान में सड़क मार्ग से गाजियाबाद से हापुड़ जाने में 1 से 1.5 घंटे लगते हैं। रैपिड रेल शुरू होने के बाद यह दूरी महज 20 से 25 मिनट में तय की जा सकेगी।
- मुख्य लाभ: पिलखुवा अपने टेक्सटाइल/हैंडलूम उद्योग और बड़े मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए जाना जाता है। इस रूट से हजारों छात्रों और व्यापारियों को प्रतिदिन की आवाजाही में भारी सहूलियत होगी।
- गाजियाबाद – बुलंदशहर – खुर्जा कॉरिडोर (~48 किमी)
- रूट व अलाइनमेंट: यह रूट गाजियाबाद इंटरचेंज स्टेशन से लालकुआं, दादरी और सिकंदराबाद होते हुए बुलंदशहर और खुर्जा तक विस्तारित होगा।
- कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर आगे चलकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) के पास से गुजरेगा।
- मुख्य लाभ: खुर्जा देश का प्रमुख सिरामिक हब (Ceramic Hub) है, जबकि सिकंदराबाद और दादरी बड़े इंडस्ट्रियल पार्क हैं। यह रूट लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक माल की आवाजाही को गति देगा।
- दिल्ली – शाहदरा – बागपत – बड़ौत कॉरिडोर (~56 किमी)
- रूट व अलाइनमेंट: आनंद विहार या सराय काले खां से शुरू होकर यह कॉरिडोर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शाहदरा, लोनी, खेकड़ा, बागपत और बड़ौत तक पहुंचेगा (जिसे भविष्य में शामली तक भी बढ़ाया जा सकता है)।
- यात्रा समय: दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और 2 घंटे का सफर घटकर 35-40 मिनट रह जाएगा।
- मुख्य लाभ: बागपत और बड़ौत चीनी मिलों, अनाज मंडियों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रसिद्ध हैं। यह कॉरिडोर स्थानीय किसानों, छोटे व्यापारियों और दिल्ली में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए गेमचेंजर साबित होगा।
गाजियाबाद बनेगा प्रमुख ‘सुपर इंटरचेंज हब’
इन नए कॉरिडोर्स के चालू होने के बाद गाजियाबाद RRTS स्टेशन एक विशाल मल्टी-मॉडल ट्रांसफर हब के रूप में उभरेगा। यहाँ से यात्री अपनी ट्रेन बदलकर मेरठ, दिल्ली, हापुड़, खुर्जा या जेवर एयरपोर्ट की तरफ निर्बाध यात्रा कर सकेंगे। इसके अलावा, सराय काले खां और आनंद विहार स्टेशनों पर मेट्रो, आईएसबीटी और भारतीय रेलवे के साथ एकीकृत कनेक्टिविटी बनी रहेगी।
| कॉरिडोर का नाम | अनुमानित लंबाई | प्रमुख स्टेशन / क्षेत्र | मुख्य आर्थिक व सामाजिक प्रभाव |
| गाजियाबाद – हापुड़ | 34 किमी | डासना, पिलखुवा, हापुड़ | छात्रों और टेक्सटाइल कारोबारियों को त्वरित परिवहन |
| गाजियाबाद – खुर्जा | 48 किमी | लालकुआं, दादरी, सिकंदराबाद, बुलंदशहर, खुर्जा | सिरामिक इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स व जेवर एयरपोर्ट से जुड़ाव |
| दिल्ली – बागपत – बड़ौत | 56 किमी | शाहदरा, लोनी, खेकड़ा, बागपत, बड़ौत | कृषि मंडी, चीनी उद्योग और किफायती आवासीय विकास |
वेस्ट UP के विकास पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
- रियल एस्टेट में उछाल: दिल्ली-मेरठ रूट पर स्टेशनों के 3 किमी के दायरे में जमीनों और प्रॉपर्टी की कीमतों में 12-15% की वृद्धि देखी गई है। यही पैटर्न अब हापुड़ रोड, पिलखुवा, बागपत और खुर्जा में भी देखने को मिल रहा है।
- सड़क जाम और प्रदूषण में कमी: राष्ट्रीय राजमार्गों (जैसे NH-9 और दिल्ली-सहारनपुर हाईवे) पर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी।
- सस्ता और सुलभ आवास: दिल्ली और नोएडा में घर महंगे होने के कारण लोग अब बागपत, हापुड़ और बुलंदशहर जैसे इलाकों को रहने के लिए एक बेहतर और किफायती विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
- मुजफ्फरनगर व उत्तराखंड तक विस्तार का प्रस्ताव: भविष्य में मेरठ (मोदीपुरम) से आगे इस नेटवर्क को मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए हरिद्वार तथा ऋषिकेश तक बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
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