उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (UP ATS) को हाल ही में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मेरठ से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी से जब गहनता से पूछताछ की गई, तो उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आई है कि पकड़े गए आरोपी का शैक्षणिक बैकग्राउंड बेहद सामान्य और निराशाजनक रहा था, लेकिन वह डिजिटल दुनिया में कट्टरपंथ के रास्ते पर काफी आगे निकल चुका था। पूछताछ में आरोपी ने आतंकवाद के नेटवर्क और अपने आकाओं से जुड़ने की पूरी कहानी बयां की है।
ATS की पूछताछ में हुए कई बड़े खुलासे
यूपी एटीएस की टीम लगातार संदिग्ध आरोपी से पूछताछ कर रही है। एटीएस के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पिछले काफी समय से देश विरोधी गतिविधियों और संदिग्ध संगठनों के संपर्क में था। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और डार्क वेब के जरिए सीमा पार बैठे अपने आकाओं से निर्देश ले रहा था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि वह मेरठ और आसपास के इलाकों में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में था।
सुरक्षा एजेंसियों को उसके कब्जे से कई संदिग्ध सामग्री, भड़काऊ साहित्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं। इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने किस-किस को कौन से मैसेज भेजे थे और उसके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
शैक्षणिक रिकॉर्ड: 10वीं में मिले थे सिर्फ 20 फीसदी नंबर
आरोपी की पृष्ठभूमि की जांच करने पर एटीएस को उसकी पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी एक दिलचस्प और अहम जानकारी मिली। बताया जा रहा है कि आरोपी पढ़ाई में बेहद कमजोर था और हाईस्कूल (10वीं कक्षा) की परीक्षा में उसे महज 20 प्रतिशत अंक मिले थे।
कम अंक आने और पढ़ाई छोड़ देने के बाद आरोपी के पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था। खाली समय और असफलता के कारण वह इंटरनेट पर अधिक समय बिताने लगा। इसी दौरान वह कट्टरपंथी विचारधारा वाले ग्रुप्स से जुड़ा और धीरे-धीरे ब्रेनवॉश होकर देश विरोधी ताकतों के जाल में फंसता चला गया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे युवाओं को निशाना बनाना आतंकवादी संगठनों के लिए आसान होता है, जो मानसिक या सामाजिक रूप से अलग-थलग महसूस करते हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किया गया ब्रेनवॉश
एटीएस अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी संगठन अब नए युवाओं को साधने के लिए सीधे मिलने के बजाय डिजिटल माध्यमों का सहारा ले रहे हैं। मेरठ के इस संदिग्ध आरोपी को भी ऑनलाइन मीडिया, टेलीग्राम ग्रुप्स और अन्य सिक्योर चैट ऐप्स के जरिए भड़काऊ कंटेंट भेजा जाता था। धीरे-धीरे उसे कट्टरपंथी साहित्य पढ़कर और वीडियो दिखाकर इस हद तक प्रभावित कर दिया गया कि वह देश के भीतर ही किसी बड़े हमले या अराजकता फैलाने के लिए तैयार हो गया।
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी को ऑनलाइन माध्यम से ही कुछ निर्देश और फंड मुहैया कराए जाने का आश्वासन दिया गया था। वह किसी बड़े टास्क को पूरा करने की तैयारी में था, जिससे पहले ही यूपी एटीएस ने सटीक इनपुट के आधार पर उसे मेरठ से धर दबोचा।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, नेटवर्क की तलाश जारी
मेरठ में हुई इस गिरफ्तारी के बाद पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया विभाग हाई अलर्ट पर हैं। एटीएस अब आरोपी के बैंक खातों, उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स और फोन कॉल डिटेल्स की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या स्थानीय स्तर पर भी कोई उसकी मदद कर रहा था या उसने किसी अन्य स्थानीय युवा को अपने साथ इस नेटवर्क में जोड़ा था।
इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अभिभावकों और समाज के लोगों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। इंटरनेट का गलत इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर किसी भी संदिग्ध ग्रुप से जुड़ना युवाओं को गंभीर खतरे में डाल सकता है।
एटीएस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।
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