मेरठ (उत्तर प्रदेश)। जिले के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक छात्रा पर अपनी ही सहपाठी छात्रा का आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया व विभिन्न ग्रुप्स में वायरल करने का गंभीर आरोप सामने आया। पीड़िता की शिकायत और परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया और आरोपी छात्रा के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानून (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल निजता (Privacy) और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का पूरा विवरण और कैसे खुला मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक नामी प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज का है। पीड़ित छात्रा और आरोपी छात्रा दोनों एक ही विभाग में अध्ययनरत हैं और कॉलेज के हॉस्टल में एक साथ या आसपास के कमरों में रहती थीं। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पहले सामान्य बातचीत थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनके बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव चल रहा था।
आरोप है कि पीड़िता जब हॉस्टल के वॉशरूम में थी या अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी, तभी आरोपी छात्रा ने चोरी-छिपे अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर उसका अश्लील वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। घटना की भनक पीड़िता को तब लगी जब उसकी कुछ अन्य सहेलियों ने उसे सूचित किया कि उसकी एक निजी वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सर्कुलेट हो रही है। जब पीड़िता ने वीडियो देखा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वीडियो की जांच करने पर पता चला कि यह क्लिप उसी हॉस्टल परिसर के भीतर रिकॉर्ड की गई थी।
कॉलेज प्रशासन पर लीपापोती का आरोप, परिजनों ने किया हंगामा
घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत कॉलेज प्रशासन और हॉस्टल वार्डन से लिखित शिकायत की। आरोप है कि शुरुआत में कॉलेज प्रबंधन ने मामले को दबाने और आपसी समझौता कराने की कोशिश की। कॉलेज प्रशासन का रवैया ढुलमुल देखते हुए पीड़िता ने अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी।
अगली ही सुबह पीड़ित छात्रा के परिजन कई स्थानीय लोगों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ कॉलेज कैंपस पहुंचे और मुख्य गेट पर जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि इतने बड़े और महंगे कॉलेज में जहां भारी-भरकम फीस वसूली जाती है, वहां छात्राओं की निजता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है। परिजनों के भारी विरोध और मीडिया के हस्तक्षेप के बाद कॉलेज प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस की कार्रवाई और डिजिटल फोरेंसिक जांच
सूचना मिलते ही स्थानीय थाने की पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया और सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के आधार पर आरोपी छात्रा के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66E (निजता का उल्लंघन), 67A (इंटरनेट पर अश्लील सामग्री प्रसारित करना) और बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपी छात्रा का मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण तुरंत प्रभाव से सीज कर दिए हैं। साइबर सेल की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो सबसे पहले किस आईपी एड्रेस और किस सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया था, तथा इसे अब तक कितने लोगों को भेजा गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस साजिश में कॉलेज का कोई अन्य छात्र या बाहरी व्यक्ति भी शामिल है।
मानसिक तनाव में पीड़िता, काउंसिलिंग की व्यवस्था
इस अमानवीय घटना के बाद से पीड़ित छात्रा गहरे मानसिक आघात (Trauma) और तनाव में है। समाज और सोशल मीडिया पर वीडियो फैलने के डर से छात्रा का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़िता के परिजनों ने मांग की है कि साइबर पुलिस तुरंत इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से उस वीडियो को पूरी तरह से डिलीट और ब्लॉक करवाए, ताकि बच्ची की गरिमा को और नुकसान न पहुंचे। जिला प्रशासन और कॉलेज के काउंसलर्स द्वारा पीड़िता को मानसिक संबल देने के लिए काउंसिलिंग सेशन आयोजित किए जा रहे हैं।
डिजिटल युग में हॉस्टल सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने देश भर के हॉस्टलों और शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल कर रख दी है। आमतौर पर हॉस्टलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर तो कड़े नियम होते हैं, लेकिन जब कोई आंतरिक सदस्य ही इस तरह के डिजिटल अपराध में शामिल हो जाए, तो सुरक्षा तंत्र बेबस नजर आता है। शिक्षाविदों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट के इस दौर में साइबर एथिक्स (Cyber Ethics) की कमी युवाओं को अपराध की ओर धकेल रही है।
कानूनी विशेषज्ञ और साइबर विशेषज्ञों की राय
मामले पर साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी की बिना अनुमति के उसकी निजी तस्वीरें या वीडियो बनाना और उसे सार्वजनिक करना एक गैर-जमानती और गंभीर अपराध है। यदि कोई व्यक्ति ऐसे वीडियो को आगे शेयर या फॉरवर्ड भी करता है, तो वह भी कानून की नजर में समान रूप से दोषी माना जाता है। पुलिस ने चेतावनी जारी की है कि यदि कोई भी व्यक्ति या छात्र इस वायरल वीडियो को किसी अन्य ग्रुप में शेयर करता पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कॉलेज की साख पर लगा धब्बा, जांच कमेटी गठित
इंजीनियरिंग कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक आंतरिक जांच समिति (Internal Inquiry Committee) का गठन किया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है और यदि आरोपी छात्रा दोषी पाई जाती है, तो उसे तत्काल प्रभाव से कॉलेज से निष्कासित (Rusticate) कर दिया जाएगा। हालांकि, इस घटना के बाद से कॉलेज में पढ़ रही अन्य छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच भारी चिंता और अविश्वास का माहौल बना हुआ है।
फिलहाल, पुलिस मामले के हर पहलू की गहराई से तफ्तीश कर रही है। साइबर सेल की रिपोर्ट आने के बाद आरोपी छात्रा पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। यह घटना समाज और युवाओं के लिए एक कड़ा सबक है कि सोशल मीडिया और डिजिटल गैजेट्स का दुरुपयोग किसी का जीवन तबाह कर सकता है और इसका अंजाम सलाखों के पीछे तक पहुंचा सकता है।
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