मेरठ: उत्तर प्रदेश के चर्चित और सनसनीखेज सौरभ राजपूत हत्याकांड (जिसे ‘नीला ड्रम मर्डर केस’ के नाम से भी जाना जाता है) में हाल ही में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने इस मामले के मुख्य दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को क्रूरतापूर्ण हत्या तथा सबूत मिटाने के जुर्म में मौत की सजा (फांसी) सुनाई है। इस बहुचर्चित फैसले के बाद अब देश भर में इस पर चर्चा हो रही है। इसी बीच, बहुचर्चित निर्भया हत्याकांड के दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने वाले देश के जाने-माने पवन जल्लाद का बड़ा बयान सामने आया है। पवन जल्लाद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि अदालत और जेल प्रशासन का आदेश मिलता है, तो वह मुस्कान और साहिल को फांसी देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अदालत का फैसला पूरी तरह से न्यायसंगत: पवन जल्लाद
मीडिया से बातचीत के दौरान पवन जल्लाद ने कहा कि मेरठ कोर्ट द्वारा मुस्कान और साहिल को दिया गया मृत्युदंड का फैसला बिल्कुल सही और न्यायसंगत है। उन्होंने कहा कि अपराध चाहे किसी पुरुष ने किया हो या महिला ने, यदि कृत्य अत्यंत जघन्य और क्रूर है, तो कानून के तहत दोषियों को वैसी ही कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। पवन जल्लाद के अनुसार, इस प्रकार के जघन्य अपराधों में नरमी बरतना न्याय व्यवस्था के खिलाफ है, और अदालत ने इस मामले में सभी पहलुओं और साक्ष्यों को ध्यान में रखकर बिल्कुल सटीक फैसला लिया है।
आधिकारिक आदेश मिलने पर अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार
फांसी की प्रक्रिया और अपने अगले कदम के बारे में बात करते हुए पवन जल्लाद ने बताया कि किसी भी दोषी को सीधे फंदे पर नहीं लटकाया जाता है। इसके लिए न्यायपालिका की ओर से आधिकारिक डेथ वारंट (मृत्यु वारंट) जारी किया जाता है।
उन्होंने कहा, “मुझे जब भी और जहां भी अदालत या जेल प्रशासन की तरफ से आदेश मिलेगा, मैं अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। चाहे यह बुलावा कभी भी आए, मैं अपने कर्तव्य का पालन करने जाऊंगा।”
फांसी से पहले पूरी की जाती है कड़ी कानूनी प्रक्रिया
पवन जल्लाद ने अपने लंबे अनुभव का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भी एक लंबी कानूनी प्रक्रिया बाकी होती है। दोषियों के पास उच्च न्यायालय (High Court) और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में अपील करने का अधिकार होता है। इसके अलावा नियमों के तहत राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका (Mercy Petition) दाखिल करने का विकल्प भी खुला रहता है। जब तक ये सभी कानूनी चरण पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाते, तब तक फांसी की अंतिम तारीख तय नहीं होती। इन सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
फांसी देने से पहले की जाती है तीन दिन की विशेष तैयारी
दोषियों को फंदे पर लटकाने की तैयारियों के बारे में बात करते हुए पवन जल्लाद ने बताया कि इस प्रक्रिया को पूरी सावधानी और सटीकता के साथ अंजाम दिया जाता है। फांसी तय होने से लगभग तीन दिन पहले पूर्व तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। इसमें मुख्य रूप से फांसी के फंदे वाली खास दोरी, लीवर तंत्र, और फांसी घर (फांसी के तख्ते व खंभे) की बारीकी से जांच और टेस्टिंग की जाती है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई तकनीकी या यांत्रिक बाधा उत्पन्न न हो।
क्या है पूरा सौरभ राजपूत हत्याकांड?
आपको बता दें कि यह पूरा मामला मेरठ का है, जिसने अपनी क्रूरता के कारण पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अवैध संबंधों के चलते मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर अपने ही पति सौरभ राजपूत की बेहद निर्ममता से हत्या कर दी थी। हत्या के बाद साक्ष्यों को छिपाने के लिए आरोपियों ने सौरभ के शव के टुकड़े कर दिए और उन्हें एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में भरकर सीमेंट से हमेशा के लिए पैक कर दिया था।
पुलिस की लंबी जांच, 13 महीने चले ट्रायल, 126 से अधिक पेशियों और 22 से ज्यादा गवाहों के बयों के आधार पर मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 14 अक्टूबर को मुस्कान और साहिल को इस वीभत्स हत्याकांड में मौत की सजा सुनाई। अदालत के इस कड़े फैसले के बाद अब हर किसी की नजरें आगे की कानूनी कार्रवाइयों पर टिकी हुई हैं।
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