टेक दिग्गज ओरेकल में फिर शुरू हुआ छंटनी का दौर: सुबह 6 बजे ईमेल भेजकर कर्मचारियों को निकाला गया बाहर

नई दिल्ली: वैश्विक आईटी और क्लाउड टेक दिग्गज ओरेकल (Oracle) में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी का नया दौर शुरू हो गया है। टेक उद्योग में जारी अनिश्चितता और पुनर्गठन के बीच कंपनी अपने वर्कफोर्स में कटौती कर रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रभावित कर्मचारियों को इस फैसले की जानकारी किसी पूर्व सूचना के बिना, सुबह 6 बजे एक अचानक आए ईमेल के जरिए दी गई। सुबह का ईमेल खोलते ही कई कर्मचारियों को पता चला कि उनका एक्सिस तुरंत प्रभाव से खत्म कर दिया गया है और अब वे कंपनी का हिस्सा नहीं हैं।

यह नई छंटनी ऐसे समय पर हुई है जब ओरेकल पहले ही अपने वैश्विक परिचालन से लगभग 21,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। इस ताजा कटौती के बाद टेक जगत में हड़कंप मच गया है और यह सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि आखिर टेक कंपनियों में यह अनिश्चितता का माहौल कब तक बना रहेगा।

सुबह 6 बजे का ईमेल और अचानक बंद हुआ एक्सिस

प्रभावित कर्मचारियों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया बेहद अप्रत्याशित और अचानक हुई। मंगलवार सुबह जैसे ही कर्मचारियों ने अपने काम के ईमेल और स्लैक (Slack) अकाउंट खोलने की कोशिश की, उन्हें लॉग-इन करने में विफलता का सामना करना पड़ा। इसके तुरंत बाद कई कर्मचारियों के व्यक्तिगत ईमेल आईडी पर एक औपचारिक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें कंपनी ने बताया कि उनकी सेवाओं की अब आवश्यकता नहीं है।

कई कर्मचारियों ने सोशल मीडिया और पेशेवर प्लेटफॉर्म्स जैसे लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपना दर्द साझा किया है। एक वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने लिखा, “सुबह 6 बजे ईमेल मिला कि मेरा रोल समाप्त कर दिया गया है। वर्षों की कड़ी मेहनत और वफादारी के बाद कुछ ही मिनटों में कंपनी का सिस्टम बंद हो गया।”

कंपनी ने अपने आंतरिक ईमेल में इस कदम को “वैश्विक संगठनात्मक पुनर्गठन” और “लागत प्रबंधन रणनीति” का हिस्सा बताया है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें किसी भी प्रकार का अग्रिम नोटिस नहीं दिया गया था, जिससे उनके सामने तुरंत वित्तीय और पेशेवर अनिश्चितता खड़ी हो गई है।

21 हजार कर्मचारियों पर पहले ही गिर चुकी है गाज

यह पहली बार नहीं है जब ओरेकल ने इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को निकाला हो। पिछले कुछ महीनों के दौरान कंपनी ने अपनी परिचालन लागत को कम करने और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर में अपने निवेश को प्राथमिकता देने के लिए चरणबद्ध तरीके से कटौती की है। इस ताजा दौर से पहले ही कंपनी वैश्विक स्तर पर लगभग 21,000 नौकरियों में कटौती कर चुकी थी।

इस व्यापक छंटनी का सबसे बड़ा असर निम्नलिखित विभागों पर पड़ा है:

  • मार्केटिंग और सेल्स टीम: पारंपरिक सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग सेल्स में भारी गिरावट के कारण इस विभाग में सबसे अधिक कटौती हुई है।
  • हार्डवेयर और लिगेसी सिस्टम्स: ओरेकल के पुराने डेटाबेस और सर्वर बिजनेस से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स को बंद या छोटा कर दिया गया है।
  • सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट: कुछ गैर-ज़रूरी प्रोजेक्ट्स और अनुसंधान टीमों को भी भंग कर दिया गया है।
  • मानव संसाधन (HR) और भर्ती टीम: नई नियुक्तियों पर रोक लगने के कारण भर्ती से जुड़ी टीमों पर सबसे पहला असर पड़ा।

छंटनी के पीछे के मुख्य कारण

टेक विश्लेषकों का मानना है कि ओरेकल द्वारा की जा रही यह निरंतर छंटनी केवल लागत बचाने का उपाय नहीं है, बल्कि यह कंपनी के बिजनेस मॉडल में आ रहे एक बड़े बदलाव का संकेत है।

  • एआई (Artificial Intelligence) पर ध्यान: अमेज़ॅन वेब सर्विसेज (AWS), माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर (Microsoft Azure) और गूगल क्लाउड को टक्कर देने के लिए ओरेकल अब पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहा है। इसके लिए कंपनी को नए कौशल वाले पेशेवरों की आवश्यकता है, जबकि पुराने प्रोजेक्ट्स से कर्मचारियों को हटाया जा रहा है।
  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: अमेरिका और यूरोप में मंदी की आशंका, उच्च ब्याज दरों और वैश्विक मुद्रास्फीति के कारण टेक कंपनियों पर अपने लाभ मार्जिन को बनाए रखने का अत्यधिक दबाव है।
  • अधिग्रहण के बाद का पुनर्गठन: ओरेकल द्वारा हेल्थकेयर टेक कंपनी ‘सर्नेर’ (Cerner) के अरबों डॉलर के अधिग्रहण के बाद से ही दोनों कंपनियों के संसाधनों के समायोजन का काम चल रहा है, जिससे दोहराव वाले रोल्स को खत्म किया जा रहा है।

भारतीय टेक पेशेवरों पर भी गहरा प्रभाव

ओरेकल के भारत में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और नोएडा जैसे प्रमुख शहरों में बड़े डेवलपमेंट सेंटर हैं। वैश्विक स्तर पर हो रही इस छंटनी का असर भारतीय कर्मचारियों पर भी पड़ा है। हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर भारत में प्रभावित कर्मचारियों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भारतीय टीमों से भी कई मध्य-स्तरीय और वरिष्ठ कर्मचारियों को निकाला गया है।

भारत में आईटी उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह कटौती उन लोगों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है जो एच-1बी (H-1B) वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे थे, क्योंकि उनके पास नई नौकरी ढूंढने के लिए बहुत सीमित समय बचा है।

कर्मचारियों में बढ़ता डर और टेक इंडस्ट्री का भविष्य

ओरेकल का यह कदम सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। पिछले दो वर्षों में मेटा, गूगल, अमेज़ॅन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कई वैश्विक दिग्गज कंपनियों ने लाखों कर्मचारियों को निकाला है। इस निरंतर छंटनी के कारण टेक उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच असुरक्षा और मानसिक तनाव का माहौल बन गया है।

मानव संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि अब कंपनियों में वफादारी से ज्यादा ‘अपस्किलिंग’ (नई तकनीक सीखना) महत्वपूर्ण हो गई है। कर्मचारियों को क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई मॉडल डेवलपमेंट और डेटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में खुद को ढालना होगा ताकि वे इस बदलती परिस्थितियों में प्रासंगिक बने रह सकें।

ओरेकल ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए एक से दो महीने के विच्छेद वेतन (Severance Pay) और सीमित अवधि के लिए स्वास्थ्य बीमा कवरेज की घोषणा की है, लेकिन कई कर्मचारी इसे नाकाफी मान रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह छंटनी का अंतिम चरण है या कंपनी आगे भी ऐसे कड़े कदम उठाती रहेगी।

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  • Rahul Kaushik

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