तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। केंद्र और राज्य के राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव रखने वाली डॉ. अनबुमणि रामदास की अगुवाई वाली पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ छोड़ सकती है। चर्चा गर्म है कि पीएमके अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय थलपति की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) के पाले में जाने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह खबर तेजी से तैर रही है कि यदि यह गठबंधन अंतिम रूप लेता है, तो विजय सरकार में पीएमके को दो कैबिनेट पद दिए जा सकते हैं।
पर्दे के पीछे कैसे पक रही है खिचड़ी?
तमिलनाडु में हुए हालिया विधानसभा चुनावों में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने 234 में से 108 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि यह बहुमत के जादूई आंकड़े से 10 सीट दूर थी, फिर भी विजय ने निर्दलीय व छोटे दलों के सहयोग से अपनी सरकार का गठन किया। वर्तमान में अपनी सरकार को मजबूत करने और सदन में पूर्ण स्थायित्व लाने के लिए TVK लगातार नए सहयोगियों की तलाश कर रही है।
इसी क्रम में होने वाले मदुरंतकम और धरापुरम विधानसभा उपचुनावों में PMK का रुख बेहद दिलचस्प रहा है। 2026 चुनाव में AIADMK-BJP गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने वाली PMK ने इस उपचुनाव में अचानक तटस्थ रहने (किसी को समर्थन न देने) की घोषणा कर दी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि PMK का यह “न्यूट्रल” दांव विजय की TVK के साथ चल रही बैकचैनल वार्ता का ही नतीजा है।
सूत्रों की मानें तो यह बातचीत पीएमके प्रमुख अनबुमणि रामदास और सीएम विजय के रणनीतिकार व सलाहकार जॉन अरोकीआसामी के जरिए आगे बढ़ रही है।
क्या है कैबिनेट बर्थ का फॉर्मूला?
अंदरूनी जानकारी के मुताबिक, TVK ने PMK के सामने जो प्रस्ताव रखा है, उसमें दो मंत्री पद शामिल हैं।
- पहला नाम: सौम्या अनबुमणि (अनबुमणि रामदास की पत्नी और धर्मपुरी से विधायक)। Soumya के पास खुद का मजबूत जनादेश है।
- दूसरा नाम: ए. गणेश कुमार (पीएमके के वरिष्ठ विधायक)।
विजय के लिए क्यों अहम है PMK?
तमिलनाडु के उत्तरी और मध्य जिलों में वन्नियार (Vanniyar) समुदाय का एक विशाल और संगठित वोट बैंक है। PMK ने दशकों से इस वोट बैंक पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई हुई है। TVK अगर इस समुदाय के समर्थन को अपने साथ जोड़ लेती है, तो उत्तरी तमिलनाडु में उसकी राजनीतिक स्थिति और अधिक अभेद्य हो जाएगी।
गठबंधन की राह में ये 3 बड़ी चुनौतियां:
- भाजपा से रिश्ते तोड़ना: पीएमके का बीजेपी और एआईएडीएमके के साथ पुराना चुनावी संबंध रहा है। विजय के साथ औपचारिक हाथ मिलाने का सीधा अर्थ होगा भाजपा से पूरी तरह किनारा करना।
- VCK से खींचतान: TVK के मौजूदा गठबंधन में विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) पहले से ही शामिल है, जिसकी कैबिनेट में मौजूदगी है। दलित राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाली VCK और वन्नियार आधारित PMK के बीच ऐतिहासिक और सामाजिक तौर पर टकराव रहा है। दोनों को एक ही नाव में सवार रखना विजय के लिए कठिन परीक्षा होगी।
- वामपंथियों का रुख: सीपीआई और सीपीआई(एम) जैसी कम्युनिस्ट पार्टियां पहले से ही पीएमके की एंट्री की संभावना से असहज दिख रही हैं और उन्होंने उपचुनावों में अकेले उतरने के संकेत दिए हैं।
फिलहाल, पीएमके ने इस मुद्दे पर वेट एंड वॉच (इंतजार करो और देखो) की स्थिति अपनाई हुई है। यदि उपचुनाव के नतीजों के बाद यह समझौता आधिकारिक बनता है, तो यह तमिलनाडु की भावी राजनीति का एक नया अध्याय लिखेगा।
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