उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर उस समय हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) और निजी सहायक (PA) रहे चंदन सिंह जीना के परिसरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान ईडी की टीम को बेहिसाब संपत्तियों, भारी नकदी, सोने के आभूषणों और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की महंगी घड़ियों का जखीरा मिला है।
छापेमारी में क्या-क्या हुआ बरामद?
ईडी की टीम द्वारा देहरादून स्थित ठिकानों पर की गई इस कार्रवाई के दौरान जो नकदी और सामान बरामद हुआ, वह हैरान करने वाला है:
- 32 लाख रुपये नकदी: घर से ₹32 लाख रुपये की बेहिसाबी भारतीय मुद्रा बरामद की गई।
- 200 ग्राम से अधिक सोना: लगभग 200.5 ग्राम वजन के सोने के आभूषण और 13 सोने के सिक्के बरामद हुए।
- 12 लग्जरी घड़ियां: घर से अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की 12 बेहद महंगी कलाई घड़ियां मिलीं, जिनमें रोलेक्स (Rolex), राडो (Rado), पियाजे (Piaget), मोवाडो (Movado) और टिसोट (Tissot) शामिल हैं।
- 52.16 लाख रुपये के बैंक खाते सीज: चंदन सिंह जीना और उनके परिजनों के बैंक खातों में मौजूद लगभग ₹52.16 लाख की राशि को ईडी ने फ्रीज कर दिया है।
ईडी के प्राथमिक आकलन के अनुसार, अब तक जब्त और सीज की गई कुल संपत्ति की कीमत करीब ₹1.28 करोड़ आंकी गई है। जब्त घड़ियों का सटीक मूल्य अलग से तय किया जा रहा है, जिससे यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।
क्या है घोटाले की जड़? (UKSSSC VPDO परीक्षा मामला)
यह पूरी कार्रवाई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा साल 2016 में आयोजित की गई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई धांधली से जुड़ी है।
- OMR शीट से छेड़छाड़: जांच में सामने आया कि आयोग की सुरक्षित कस्टडी से अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट को निजी स्थानों पर ले जाया जाता था।
- बिचौलियों की भूमिका: खाली छोड़ी गई ओएमआर शीट के रोल नंबर नोट किए जाते थे और फिर प्राइवेट एजेंसी के कर्मचारियों की मदद से उत्तर सही भरे जाते थे। इसके बदले भारी रिश्वत ली जाती थी। Republic World
- मनी लॉन्ड्रिंग का मामला: विजिलेंस और एसटीएफ द्वारा दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जांच शुरू की थी।
राजनीतिक हलचल और प्रभाव
चंदन सिंह जीना 2014 से 2017 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री के ओएसडी के रूप में कार्यरत थे। इस छापेमारी के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस घटनाक्रम के बाद संबंधित राजनीतिक गुटों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है और राजनीतिक बयानों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
ईडी फिलहाल आरोपी के मोबाइल फोन और वित्तीय दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि पैसे के अंतिम लेन-देन के स्रोतों का पता लगाया जा सके।
यह भी पढ़ें: BRICS के लिए तड़पता पाकिस्तान: सदस्यता के लिए भारत की हरी झंडी क्यों बनी सबसे बड़ी शर्त?