मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में सुरक्षा और सामरिक मोर्चे पर एक बार फिर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। प्राप्त नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सीरिया में स्थित एक प्रमुख सैन्य एयरबेस को निशाना बनाते हुए भीषण हवाई हमला (एयर स्ट्राइक) किया है। इस हमले में सैन्य हवाई अड्डे के रनवे को सीधे तौर पर निशाना बनाकर उसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।
प्राथमिक जानकारियों के मुताबिक, उत्तरी और पश्चिमी सीरिया के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अबू अल-दुहुर (Abu al-Duhur) सैन्य एयरबेस पर एक के बाद एक चार मिसाइलें दागी गईं। इस भीषण गोलाबारी के कारण एयरबेस के मुख्य रनवे पर गहरे गड्ढे हो गए और वह पूरी तरह से काम करने में असमर्थ (Out of Service) हो गया है।
हमले का मुख्य लक्ष्य और एयरबेस का सामरिक महत्व
सीरिया में हुआ यह हवाई हमला कोई आम सैन्य कार्रवाई नहीं है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस एयरबेस का उपयोग शत्रु ताकतों द्वारा हथियारों की आवाजाही और सैन्य गतिविधियों के संचालन के लिए किया जा रहा था। इजरायल का मुख्य उद्देश्य इस रनवे को पूरी तरह से नष्ट करना था ताकि वहां किसी भी प्रकार के सैन्य या परिवहन विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ को रोका जा सके।
अबू अल-दुहुर एयरबेस भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील इलाके में स्थित है। यह क्षेत्र उत्तरी सीरिया में नियंत्रण और हवाई निगरानी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इजरायल लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि वह अपनी सीमाओं के करीब किसी भी hostile (शत्रुतापूर्ण) सैन्य बुनियादी ढांचे या विदेशी हथियारों के जमावड़े को बर्दाश्त नहीं करेगा।

मध्य पूर्व की भू-राजनीति और सुरक्षा पर असर
इस हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में एक बार फिर सुरक्षा चिंताओं को गहरा कर दिया है। हालांकि इस हमले पर आधिकारिक सैन्य बयानों की प्रतीक्षा की जा रही है, लेकिन क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों ने इस कार्रवाई के पीछे इजरायली वायुसेना के सटीक मिसाइल हमलों को जिम्मेदार ठहराया है।
विश्लेषकों का कहना है कि रनवे को उड़ाने की रणनीति सीधे तौर पर दुश्मन की लॉजिस्टिक सप्लाई लाइन को तोड़ने का काम करती है। जब किसी हवाई अड्डे का रनवे क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उस सैन्य ठिकाने की परिचालन क्षमता शून्य हो जाती है, जिससे वहां से होने वाली किसी भी संभावित हवाई कार्रवाई पर तुरंत रोक लग जाती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर नजर बनाए हुए हैं। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की लक्षित सैन्य कार्रवाइयों (Targeted Strikes) से आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों में सीमा पार से तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।
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