तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों जबर्दस्त भूचाल आया हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री और ‘तमिझागा वेत्री कझगम’ (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय द्वारा विधानसभा में दिए गए एक भाषण और उनके एक शारीरिक इशारे (Body Language) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) आमने-सामने आ गए हैं। DMK नेताओं द्वारा विजय के भाषण और हाव-भाव को लेकर तीखे हमले किए जा रहे हैं।
विवाद की शुरुआत: विधानसभा में भाषण और MISA का जिक्र
यह पूरा विवाद तमिलनाडु विधानसभा में पुलिस विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ। बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने DMK के शासनकाल पर तीखे हमले किए। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दस्तावेजों, दशकों पुराने सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) की रिपोर्ट और वीरनम परियोजना का हवाला देते हुए DMK पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
इसके साथ ही, विजय ने देश में आपातकाल (Emergency) के दौरान लागू किए गए ‘आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम’ (MISA) का भी जिक्र किया। भाषण के दौरान उन्होंने अपनी दाहिनी हथेली को अपने जबड़े (Jaw) पर रखा। इस इशारे को DMK और उसके सहयोगी दलों ने पूर्व मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के शारीरिक अंग पर किया गया व्यक्तिगत हमला (Body-shaming) करार दिया। उल्लेखनीय है कि आपातकाल के दौरान स्टालिन को जेल में पुलिस प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था, जिसमें उनका जबड़ा टूट गया था।
DMK का भारी हंगामा और विधानसभा से वॉकआउट
मुख्यमंत्री विजय के भाषण और इस इशारे के बाद विधानसभा में अभूतपूर्व हंगामा देखने को मिला। DMK के व्हिप ई.वी. वेलु और पूर्व मंत्रियों ने मांग की कि मुख्यमंत्री द्वारा सरकारिया आयोग और MISA से संबंधित की गई टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए।
DMK नेताओं का तर्क था कि:
- सरकारिया आयोग की जांच में आरोप सिद्ध नहीं हुए थे, इसलिए बिना सबूत पुराने मामलों को उठाना भ्रामक है।
- जो लोग सदन में अपनी सफाई देने के लिए मौजूद नहीं हैं या जो दिवंगत हो चुके हैं, उन पर आरोप लगाना विधायी मर्यादा के खिलाफ है।
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने DMK की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि मुख्यमंत्री का भाषण सदन के नियमों के दायरे में था। अध्यक्ष द्वारा भाषण के अंशों को न हटाने पर नाराज DMK विधायकों ने सदन के वेल में बैठकर नारेबाजी की, जिसके बाद मार्शल बुलाकर DMK विधायकों को जबरन बाहर निकाला गया। DMK के पूर्व मंत्री गोवी चेझियान ने विजय के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी पेश किया।
DMK नेताओं के तीखे हमले
सदन के बाहर भी DMK और उसके सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री विजय पर बयानों की बौछार कर दी:
- के.एन. नेहरू (उप विपक्ष के नेता): तिरुचि में आयोजित राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन में के.एन. नेहरू ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जनता से जुड़े असली मुद्दों और राज्य की कानून-व्यवस्था से ध्यान भटकाने के लिए पुरानी बातें दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विजय केवल फिल्मों की तरह संवाद बोल रहे हैं।
- अनबिल महेश पोय्यामोझी: पूर्व मंत्री अनबिल महेश ने विजय के वक्तव्य की तुलना तानाशाही रवैये से की और आरोप लगाया कि झूठे दावे करना ही सत्ताधारी दल का एकमात्र सिद्धांत बन चुका है।
- एस. रघुपति: पूर्व कानून मंत्री रघुपति ने कहा कि पूर्व में घटनाओं के बाद भी मानवीय आधार पर कड़े कदम नहीं उठाए गए थे, लेकिन अब सरकार के रुख को देखते हुए जनता सब समझ रही है।
एम.के. स्टालिन का वीडियो संदेश
विवाद बढ़ता देख DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने 10 मिनट का एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने 1976 में MISA के तहत अपनी गिरफ्तारी और जेल में सही प्रताड़ना का जिक्र करते हुए कहा:
“आपातकाल के दौरान मुझे और मेरे साथियों को जेल में बेरहमी से पीटा गया था। लाठियों और बूटों की मार से मेरा जबड़ा टूट गया था। विजय ने अपने जबड़े पर हाथ रखकर जो इशारा किया, वह सच है—मेरे शरीर पर आज भी उन अत्याचारों के निशान हैं। इतिहास के इन साहसिक निशानों को किसी के उपहास से मिटाया नहीं जा सकता।”
मुख्यमंत्री विजय की सफाई
बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया (X) पर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा:
- भाषण के दौरान उनका हाव-भाव और शारीरिक इशारा अनजाने में (Inadvertent) हुआ था।
- इसका मकसद किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाना या किसी का मजाक उड़ाना बिल्कुल नहीं था।
- उन्होंने सभी से अपील की कि इस शारीरिक भाषा को किसी व्यक्तिगत हमले के रूप में न देखा जाए।
राजनीतिक मायने
तमिलनाडु में TVK और DMK के बीच बढ़ता यह टकराव राज्य के भावी राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे रहा है। जहां सत्ताधारी TVK भ्रष्टाचार के मुद्दों और पुराने इतिहास को आधार बनाकर DMK को घेरने की रणनीति अपना रही है, वहीं DMK इसे शासन की विफलताओं से ध्यान भटकाने की साजिश बता रही है। विधानसभा से लेकर सड़कों तक शुरू हुआ यह जुबानी जंग आने वाले उप-चुनावों और राज्य की राजनीति में और तेज होने की संभावना है।
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