रोहन मूर्ति: इन्फोसिस छोड़ी, हार्वर्ड से PhD की और खड़ा किया अपना डिजिटल साम्राज्य

भारतीय आईटी उद्योग के पितामह और इन्फोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति और प्रसिद्ध लेखिका व समाजसेविका सुधा मूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति कॉर्पोरेट जगत में एक बहुचर्चित नाम हैं। भारत के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी परिवारों में से एक में जन्म लेने के बावजूद, रोहन ने कभी भी अपने परिवार की विरासत की छाया में रहना स्वीकार नहीं किया। इन्फोसिस की स्थापित लीगेसी और करोड़ों रुपये के पारिवारिक व्यापार को पीछे छोड़कर उन्होंने एक तकनीकी उद्यमी और कंप्यूटर वैज्ञानिक के रूप में अपनी एक स्वतंत्र और विशिष्ट पहचान बनाई है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी (PhD) करने से लेकर डिजिटल इंटेलिजेंस कंपनी ‘सोरोको’ (Soroco) की स्थापना करने तक, रोहन मूर्ति की यह यात्रा असाधारण दृष्टिकोण, तकनीकी विशेषज्ञता और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करती है।

शुरुआती जीवन और विश्वस्तरीय शिक्षा

रोहन मूर्ति का पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जहां शिक्षा, मूल्यों और सरलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी। बचपन से ही प्रोग्रामिंग और तकनीक के प्रति उनके मन में गहरी रुचि थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बेंगलुरु के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन बॉयज़ स्कूल से प्राप्त की। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए।

  • कॉर्नेल यूनिवर्सिटी: रोहन ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (Cornell University) से कंप्यूटर साइंस में बैचलर ऑफ साइंस (B.S.) की डिग्री हासिल की।
  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी: इसके बाद उन्होंने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) का रुख किया, जहां से उन्होंने 2011 में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में पीएचडी (PhD) की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध मुख्य रूप से ‘ऑपर्चुनिस्टिक वायरलेस नेटवर्क’ (Opportunistic Wireless Networks) पर आधारित था।

शैक्षणिक क्षेत्र में रोहन की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें ऐतिहासिक ‘हार्वर्ड सोसाइटी ऑफ फेलो’ (Harvard Society of Fellows) में एक जूनियर फेलो के रूप में चुना गया। यह सम्मान पाने वाले वे कंप्यूटर साइंस इतिहास में Marvin Minsky के बाद दूसरे व्यक्ति थे।

इन्फोसिस का संक्षिप्त कार्यकाल और 2014 का बड़ा फैसला

वर्ष 2013 में जब एन. आर. नारायण मूर्ति इन्फोसिस के चेयरमैन के रूप में वापस आए, तब रोहन मूर्ति ने अपने पिता के कार्यकारी सहायक (Executive Assistant) के रूप में इन्फोसिस जॉइन किया। इस दौरान उन्होंने कंपनी की कार्यप्रणाली और आईटी सेक्टर की चुनौतियों को बहुत करीब से देखा।

हालांकि, कॉर्पोरेट पदानुक्रम में अपनी तय जगह के बावजूद, रोहन का इरादा इन्फोसिस का अगला उत्तराधिकारी बनना नहीं था। जून 2014 में जब उनके पिता ने इन्फोसिस के कार्यकारी अध्यक्ष का पद छोड़ा, तब रोहन मूर्ति ने भी कंपनी से इस्तीफा दे दिया। उनका यह फैसला भारतीय बिजनेस जगत के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन रोहन के पास अपने भविष्य को लेकर बेहद स्पष्ट विचार थे—वे एक शोधकर्ता और उद्यमी के रूप में अपनी खुद की नई राह बनाना चाहते थे।

‘सोरोको’ (Soroco) की स्थापना: AI और वर्कग्राफ तकनीक में क्रांति

इन्फोसिस छोड़ने के बाद, रोहन मूर्ति ने वर्ष 2014 में अपनी खुद की टेक कंपनी सोरोको (Soroco) की नींव रखी। रोहन ने अर्जुन कंबली और जॉर्ज नूसी के साथ मिलकर इस कंपनी की शुरुआत की।

सोरोको एक बोस्टन और बेंगलुरु आधारित डिजिटल इंटेलिजेंस और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग पर काम करती है। कंपनी का प्रमुख उत्पाद ‘स्कॉट’ (Scout) वर्कग्राफ (Workstream Intelligence) तकनीक का उपयोग करता है। यह तकनीक बड़ी-बड़ी कंपनियों को यह समझने में मदद करती है कि उनके कर्मचारी रोज़ाना सॉफ़्टवेयर और डिजिटल टूल का उपयोग कैसे करते हैं, जिससे व्यावसायिक प्रक्रियाओं (Business Processes) को सुव्यवस्थित और स्वचालित किया जा सके।

आज सोरोको फॉर्च्यून 500 कंपनियों सहित दुनिया की प्रमुख फर्मों के साथ काम करती है और एआई व ऑटोमेशन क्षेत्र में एक स्थापित नाम बन चुकी है।

अरबों की संपत्ति और 6 करोड़ से अधिक इन्फोसिस शेयर

भले ही रोहन मूर्ति ने इन्फोसिस के दैनिक कामकाज से दूरी बना ली हो, लेकिन वे कंपनी के सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारकों में से एक हैं।

  • इन्फोसिस शेयरहोल्डिंग: रोहन मूर्ति के पास इन्फोसिस के 6 करोड़ से अधिक शेयर (लगभग 6.08 करोड़ शेयर / 6.23 करोड़ शेयर) हैं। यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का लगभग 1.6% से अधिक बैठता है।
  • नेट वर्थ (कुल संपत्ति): शेयर बाजार के नवीनतम आंकड़ों और मूल्यांकन के अनुसार, रोहन मूर्ति की कुल संपत्ति 6,700 करोड़ रुपये से 7,600 करोड़ रुपये (लगभग 815 मिलियन अमेरिकी डॉलर) के बीच आंकी गई है।

इन्फोसिस से मिलने वाला लाभांश (Dividend) और उनकी खुद की कंपनी सोरोको (Soroco) का मूल्यांकन मिलकर उन्हें भारत के सबसे अमीर युवा उद्यमियों की सूची में शामिल करता है।

भारतीय साहित्य और संस्कृति के प्रति लगाव: मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी

रोहन मूर्ति केवल एक टेक दिग्गज ही नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय इतिहास, भाषा और दर्शन के भी बड़े अनुरागी हैं।

हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान प्राचीन भारतीय ग्रंथों के संपर्क में आने के बाद, उन्होंने ‘मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया’ (Murty Classical Library of India – MCLI) की स्थापना की। यह पहल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के सहयोग से काम करती है, जिसका उद्देश्य पिछले दो हजार वर्षों की प्राचीन भारतीय साहित्यिक रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद करके वैश्विक पाठकों तक पहुंचाना है। रोहन ने इस परोपकारी कार्य के लिए करोड़ों डॉलर का व्यक्तिगत दान दिया है।

व्यक्तिगत जीवन और विचार

रोहन मूर्ति का व्यक्तिगत जीवन सादगी भरा रहा है। दिसंबर 2019 में उन्होंने अर्पणा कृष्णन से शादी की। रोहन की बहन अक्षता मूर्ति (Akshata Murty) एक फैब्रिक डिज़ाइनर व व्यवसायी हैं और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी हैं।

रोहन मूर्ति का मानना है कि सफलता विरासत में नहीं मिलती, बल्कि इसे अपनी प्रतिभा और कठिन परिश्रम से अर्जित करना पड़ता है। इन्फोसिस की विशाल विरासत को छोड़कर एआई और सॉफ्टवेयर इनोवेशन के क्षेत्र में अपना खुद का नाम बनाना उनकी इसी सोच को प्रमाणित करता है।

रोहन मूर्ति से जुड़े मुख्य बिंदु (Quick Glance)

विवरणजानकारी
पूरा नामरोहन नारायण मूर्ति (Rohan Narayana Murty)
पिता / माताएन. आर. नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति
मुख्य शिक्षाकॉर्नेल यूनिवर्सिटी (B.S.), हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Ph.D.)
खुद की कंपनीसोरोको (Soroco – 2014 में स्थापित)
इन्फोसिस शेयर6 करोड़ से अधिक शेयर (~1.6% हिस्सेदारी)
अनुमानित कुल संपत्ति₹6,700 करोड़ से ₹7,600 करोड़+
सांस्कृतिक पहलमूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया (MCLI)

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  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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