महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति में एक बड़ा प्रशासनिक व राजनीतिक भूचाल आ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जस्टिस आरसी चव्हाण ने समिति की सदस्यता से अपना त्यागपत्र दे दिया है। 19 सितंबर 2026 को भेजे गए अपने इस इस्तीफे में उन्होंने समिति के कामकाज के तौर-तरीकों, बैठकों की औपचारिकता, जनता से राय मांगने की प्रक्रिया और बाहरी अधिकारियों के अनावश्यक हस्तक्षेप को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
राज्य सरकार ने इस इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद से महाराष्ट्र के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।
क्यों दिया जस्टिस आरसी चव्हाण ने इस्तीफा?
जस्तीस चव्हाण ने समिति की अध्यक्ष और उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई को भेजे अपने पत्र में कई बिंदुओं को रेखांकित किया है। उनके द्वारा उठाए गए प्रमुख विषय निम्नलिखित हैं:
- गंभीर चर्चाओं का अभाव: जस्टिस चव्हाण ने आरोप लगाया कि समिति की बैठकों में महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक मुद्दों पर कोई ठोस या विस्तृत चर्चा नहीं की जा रही थी। बैठकों के एजेंडे, जैसे पिछली बैठक के मिनट्स की पुष्टि, वेबसाइट में संशोधन और प्रश्नावली को अंतिम रूप देना, केवल औपचारिकता की तरह निपटाए जा रहे थे।
- सदस्यों के सुझावों की अनदेखी: उन्होंने आरोप लगाया कि देर से विवाह, बांझपन, अस्थिर वैवाहिक संबंध और विवाद समाधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया जुटाने के लिए बनाए जाने वाले प्रश्नावली प्रारूप पर अन्य सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया। अध्यक्ष स्तर पर पहले से तैयार प्रश्नावली को सीधे अपलोड करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे।
- बाहरी अधिकारियों की मौजूदगी और भूमिका: अपने पत्र में जस्टिस चव्हाण ने राज्य से बाहर के किसी अधिकारी के समिति की बैठकों में शामिल होने और निर्देश देने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि क्या महाराष्ट्र के अधिकारी इतने सक्षम नहीं हैं कि किसी बाहरी राज्य के अधिकारी को इस काम के लिए लाना पड़ा।
- सीट खाली करने का फैसला: उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “इस समस्या के समाधान के रूप में मैं समिति से अपना पद छोड़ रहा हूं, ताकि सरकार इस खाली जगह को समय रहते भर सके।”
महाराष्ट्र UCC कमेटी की पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने और इसका मसौदा (Draft) तैयार करने के लिए जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति को 6 महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य दिया गया था ताकि आगामी विधानसभा सत्रों में इस बिल को पेश किया जा सके।
जस्टिस आरसी चव्हाण के अचानक इस तरह आरोप लगाकर इस्तीफा देने के बाद समिति की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दलों को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील कानून के निर्माण में सभी सदस्यों की सहमति और व्यापक विचार-विमर्श अत्यंत आवश्यक होता है।
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