भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। कैनेडियन प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र से इतर पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह पुष्टि की है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल दिसंबर के मध्य में कनाडा की यात्रा पर आ सकते हैं।
दोनों देश व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA – Comprehensive Economic Partnership Agreement) को अंतिम रूप देने और भारत-कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत-कनाडा संबंधों को “अत्यंत महत्वपूर्ण” (Exceptionally Important) करार दिया है और कहा है कि वह पीएम मोदी की मेजबानी करने के लिए काफी उत्सुक हैं।
व्यापारिक वार्ताओं में तेजी और 2030 का बड़ा लक्ष्य
दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से मुक्त व्यापार समझौते (CEPA) पर बातचीत काफी तेजी से आगे बढ़ रही है।
- चौथे चरण की वार्ता संपन्न: हाल ही में मुंबई में भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के बीच चौथे दौर की वार्ता संपन्न हुई है।
- अगले 90 दिन निर्णायक: भारतीय वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भारत और कनाडा ने अगले 90 दिनों में इस वार्ता को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाने का संकल्प लिया है।
- वार्ता का पांचवां चरण: दोनों देश 5 अक्टूबर से वार्ता के पांचवें चरण में प्रवेश करने जा रहे हैं।
- $70 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य: कनाडा का लक्ष्य भारत के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक सालाना 70 अरब कैनेडियन डॉलर (CAD) तक पहुंचाना है।
भारत-कनाडा संबंध: तनाव के बाद नए युग की शुरुआत
पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत और कनाडा के कूटनीतिक संबंधों में खटास देखने को मिली थी। हालांकि, कनाडा में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही दोनों पक्षों ने आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर नए सिरे से साझेदारी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मार्च में नई दिल्ली की यात्रा की थी। इसके बाद जून में फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मार्क कार्नी के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई थी, जिसमें संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने की रूपरेखा तैयार की गई। दिसंबर में होने वाला यह दौरा 2015 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला पूर्ण द्विपक्षीय कनाडा दौरा होगा।
आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
भारत और कनाडा के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग के कई महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के पूरक बनाते हैं:
- स्वच्छ ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स: कनाडा के पास यूरेनियम, पोटाश और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और हरित परिवर्तन (Green Transition) के लिए कनाडा एक भरोसेमंद साझेदार बन सकता है।
- प्रौद्योगिकी और एआई (Artificial Intelligence): दोनों देश एआई, एरोस्पेस और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में साझेदारियों को बढ़ावा दे रहे हैं।
- जन-जन का जुड़ाव (People-to-People Ties): कनाडा में भारतीय समुदाय, छात्र और पेशेवर दोनों देशों के सांस्कृतिक और आर्थिक ढांचे की रीढ़ हैं।
यदि दिसंबर में पीएम मोदी की यह यात्रा तय समय पर होती है, तो यह न केवल भारत-कनाडा के रिश्तों में स्थिरता लाएगी, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों, निवेशकों और नागरिकों के लिए अपार अवसरों के नए द्वार भी खोलेगी।
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