वैश्विक स्तर पर भारत की साख, कूटनीतिक प्रभाव और धारणा को लेकर अमेरिका के मशहूर थिंक-टैंक प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) ने अपना एक विस्तृत सर्वे जारी किया है। दुनिया के 36 देशों में 42,000 से अधिक लोगों पर किए गए इस अध्ययन में भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का दृष्टिकोण सामने आया है।
इस रिसर्च के आंकड़ों में भारत की वैश्विक स्थिति के दो बेहद अलग-अलग छोर देखने को मिले हैं—एक तरफ श्रीलंका जैसे पड़ोसी मुल्क में भारत की साख अपने चरम पर नजर आती है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान में भारत के प्रति बेहद नकारात्मक सोच बनी हुई है।
36 देशों का वैश्विक रिपोर्ट कार्ड: सकारात्मक राय का पलड़ा भारी
प्यू रिसर्च द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के 36 देशों में औसतन 45% लोगों की भारत के प्रति सकारात्मक सोच है, जबकि 41% लोगों का रुख नकारात्मक है।
यह सर्वे इस साल 9 फरवरी से 13 मई के बीच आयोजित किया गया था। रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते आर्थिक कद और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनने के प्रयासों को कई महाद्वीपों में सराहा गया है, हालांकि कूटनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों के कारण कुछ हिस्सों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं भी दर्ज की गई हैं।
श्रीलंका में रिकॉर्ड 79% समर्थन: पड़ोसी प्रथम नीति का असर
सर्वे में सबसे चौंकाने वाला और सकारात्मक पहलू श्रीलंका से सामने आया है।
- पसंद करने वाले: श्रीलंका के 79% उत्तरदाताओं ने भारत के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की है, जो इस 36-देशीय सर्वे में किसी भी मुल्क के लिए सबसे अधिक है।
- नकारात्मक राय: श्रीलंका में मात्र 11% लोग ही भारत को लेकर नकारात्मक राय रखते हैं।
- प्रमुख सहयोगी: करीब 63% श्रीलंकाई नागरिक भारत को अपने देश का सबसे प्रमुख और भरोसेमंद सहयोगी मानते हैं।
यह आंकड़ा वर्ष 2024 की तुलना में एक बड़ी बढ़त दर्शाता है, जब श्रीलंका में भारत की रेटिंग 65% थी। विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 में श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा दी गई 7.5 अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय मदद, क्रेडिट लाइन और खाद्य-ईंधन आपूर्ति ने कोलंबो में भारत की छवि को मजबूत किया है।
पाकिस्तान में 91% नकारात्मक राय: सबसे निचले पायदान पर
श्रीलंका के विपरीत, सीमा पार पाकिस्तान में तस्वीर पूरी तरह उलट है:
- नकारात्मक रुख: पाकिस्तान के 91% लोगों ने भारत के प्रति अपनी अप्रसन्नता और नकारात्मक दृष्टिकोण जताया है।
- सकारात्मक रुख: केवल 7% पाकिस्तानियों ने ही भारत के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की।
दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा तनाव, सैन्य गतिरोध और राजनयिक खींचतान के कारण पाकिस्तान में भारत की यह रेटिंग अपेक्षित मानी जा रही है। सिंधु जल संधि के निलंबन और क्षेत्रीय तनावों के चलते दोनों मुल्कों के बीच आवाजाही और व्यापार लगभग ठप होने का सीधा असर जनभावनाओं पर स्पष्ट रूप से झलकता है।
दुनिया के अन्य प्रमुख देशों में भारत की साख
प्यू रिसर्च सेंटर के इस सर्वे में एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के कई प्रमुख देशों के आंकड़े भी शामिल हैं:
| देश / क्षेत्र | सकारात्मक राय (%) | नकारात्मक राय (%) | प्रमुख कारक / टिप्पणी |
| श्रीलंका | 79% | 11% | आर्थिक संकट में भारत की मदद से मजबूत रिश्ता |
| केन्या | 71% | — | अफ्रीका में भारत की बढ़ती भूमिका का असर |
| यूनाइटेड किंगडम (UK) | 71% | — | 2025 के बाद से रेटिंग में 11 पॉइंट का सुधार |
| जर्मनी | 63% | — | यूरोपीय संघ में भारत की सकारात्मक छवि |
| इजरायल | 60% | — | सामरिक और कूटनीतिक साझेदारी |
| जापान / थाईलैंड | 55% | — | इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा हित |
| अमेरिका (USA) | 45% | 50% | व्यापार नीति, वीजा और आप्रवासन पर बंटी राय |
| तुर्की | 15% | — | भू-राजनीतिक रुख के कारण निम्न रेटिंग |
| पाकिस्तान | 7% | 91% | तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंध |
अमेरिका में बंटी राय: 45% सकारात्मक, 50% नकारात्मक
सर्वे में अमेरिका का आंकड़ा भी विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करता है। अमेरिका में भारत को लेकर राय लगभग दो हिस्सों में विभाजित नजर आती है:
- सकारात्मक बनाम नकारात्मक: 45% अमेरिकी वयस्क भारत के पक्ष में हैं, जबकि 50% लोगों ने प्रतिकूल दृष्टिकोण व्यक्त किया है।
- राजनीतिक विभाजन: डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में भारत के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों का आंकड़ा 50% है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी (डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी) के समर्थकों में यह आंकड़ा 42% दर्ज किया गया।
- वैश्विक प्रभाव: अमेरिका के 54% लोगों का मानना है कि वैश्विक मंच पर भारत का प्रभाव स्थिर रहा है, जबकि 30% का मानना है कि भारत का प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
भू-राजनीतिक निहितार्थ
प्यू रिसर्च का यह हालिया खुलासा दर्शाता है कि जहाँ भारत अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और विकासोन्मुख कूटनीति के जरिए दक्षिण एशिया और अफ़्रीकी देशों में अपनी विश्वसनीयता बढ़ा रहा है, वहीं वैश्विक रणनीतिक समीकरणों और व्यापारिक नीतियों के कारण पश्चिमी दुनिया में राय विभाजित है। श्रीलंका में भारत का बढ़ता प्रभाव इस बात का प्रमाण है कि पड़ोसी मुल्कों की जरूरत के वक्त काम आने वाली नीतियां लंबे समय में सकारात्मक वैश्विक छवि का निर्माण करती हैं।
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