NEET प्रदर्शन में पैलेट गन के इस्तेमाल की थी इजाजत, सभी SOP का किया गया पालन: CRPF रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा किए गए पैलेट गन (Pellet Gun) के इस्तेमाल को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। इस उच्च स्तरीय आंतरिक और गृह मंत्रालय को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में बल ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा बलों की ओर से पैलेट गन का प्रयोग पूरी तरह कानूनन, प्राधिकृत और स्थिति की मांग के अनुरूप था। रिपोर्ट के अनुसार, जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अक्षरशः पालन किया था और इसका इस्तेमाल अंतिम विकल्प के रूप में ही किया गया।

क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ा विवाद?

नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े मुद्दों, अनियमितताओं या स्थानीय स्तर पर उठाई गई मांगों को लेकर श्रीनगर के कई संवेदनशील इलाकों में छात्रों और स्थानीय युवाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। शुरुआत में शांतिपूर्ण दिख रहा यह प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र हो गया।

उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों ने सुरक्षा बलों पर भारी पथराव (Stone Pelting) शुरू कर दिया। देखते ही देखते हालात इतने बेकाबू हो गए कि ड्यूटी पर तैनात जवानों की जान जोखिम में पड़ गई और सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचने लगा। स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों को गैर-घातक हथियारों (Non-Lethal Weapons) का सहारा लेना पड़ा, जिसमें पैलेट गन भी शामिल थी।

इस घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों, स्थानीय नेताओं और सिविल सोसाइटी द्वारा बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसी पृष्ठभूमि में CRPF ने पूरे घटनाक्रम की गहन समीक्षा की और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।

CRPF की जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

सीआरपीएफ द्वारा जारी की गई विस्तृत रिपोर्ट में उस दिन की हर स्थिति का बारीक ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें रेखांकित की गई हैं:

  • सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति: पैलेट गन का उपयोग बिना किसी व्यक्तिगत निर्णय के नहीं किया गया था। ऑन-ड्यूटी कमांडिंग अधिकारियों और स्थानीय मजिस्ट्रेट/प्रशासन की मंजूरी के बाद ही इसका आदेश जारी हुआ।
  • SOP का सख्त पालन: सुरक्षा बलों ने सीधे पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया। सबसे पहले चेतावनी दी गई, फिर लाठीचार्ज और आंसू गैस (Tear Gas) के गोले छोड़े गए। जब ये सभी उपाय उग्र भीड़ को रोकने में नाकाम रहे, तभी पैलेट गन का उपयोग किया गया।
  • कमर के नीचे वार करने के निर्देश: रिपोर्ट के अनुसार, जवानों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे पैलेट गन का प्रयोग केवल कमर के नीचे (Leg Region) ही करें ताकि जानलेवा चोट या आंखों को नुकसान पहुंचने से बचाया जा सके।
  • आत्मरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा: प्रदर्शनकारियों की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने सुरक्षा घेरे को तोड़ने और जवानों पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की थी, जिससे स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।

मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की चरणबद्ध प्रक्रिया

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय बल एक निश्चित पदानुक्रम और नियमों के तहत काम करते हैं। इस घटना में भी उसी प्रक्रिया का पालन किया गया:

चरणसुरक्षात्मक कार्रवाईउद्देश्य
चरण 1लाउडस्पीकर से मौखिक चेतावनीभीड़ को स्वेच्छा से हटने का अवसर देना
चरण 2वाटर कैनन और लाठीचार्जभीड़ को पीछे धकेलना
चरण 3आंसू गैस के गोले और स्टन ग्रेनेडभीड़ में असंतुलन पैदा कर तितर-बितर करना
चरण 4पैलेट गन का सीमित प्रयोगबेकाबू और हिंसक भीड़ को रोकने का अंतिम गैर-घातक उपाय

सुरक्षा बलों के समक्ष चुनौतियां

कश्मीर घाटी में जब भी कोई सार्वजनिक प्रदर्शन हिंसक रूप लेता है, तो सुरक्षा बलों के सामने दोहरी चुनौती होती है। एक तरफ भीड़ में शामिल बेकसूर आम नागरिकों या छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है, तो दूसरी तरफ उग्र भीड़ द्वारा किए जाने वाले जानलेवा पथराव से अपने जवानों को बचाना होता है।

CRPF अधिकारी के अनुसार: “हमारा प्राथमिक उद्देश्य हमेशा जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखना होता है। जब भीड़ घातक पथराव पर उतर आती है, तो बिना बल प्रयोग के स्थिति को संभालना असंभव हो जाता है। पैलेट गन का इस्तेमाल किसी को स्थायी नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसक तत्वों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अंतिम उपाय के रूप में किया जाता है।”

आगे की राह और सुधार के कदम

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद गृह मंत्रालय और केंद्रीय बल भीड़ नियंत्रण के तरीकों को और अधिक आधुनिक तथा कम से कम नुकसान पहुंचाने वाला बनाने पर विचार कर रहे हैं।

सुरक्षा बल अब प्लास्टिक गोलियों (Plastic Bullets), पैपर बॉल्स (Pepper Balls) और अन्य अत्याधुनिक गैर-घातक विकल्पों के उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के प्रदर्शनों में किसी भी अप्रिय स्थिति या गंभीर चोटों से पूरी तरह बचा जा सके। सीआरपीएफ की इस आंतरिक जांच रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बल ने अपनी ओर से नियम-पुस्तिका का पूरी निष्ठा से पालन किया था।

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  • Rahul Kaushik

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