नए IT नियम: संवेदनशील कंटेंट हटाने के लिए सोशल मीडिया को 2 घंटे का अल्टीमेटम

केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (Information Technology Rules) के तहत नियमों को अधिक सख्त बनाते हुए सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल मध्यस्थों (Intermediaries) के लिए संवेदनशील और गैर-कानूनी सामग्री हटाने की समय-सीमा में ऐतिहासिक कटौती की है।

नए आईटी नियमों के मुख्य परिवर्तन और समय-सीमाएँ

सरकार द्वारा जारी ताज़ा दिशा-निर्देशों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर पोस्ट की जाने वाली आपत्तिजनक एवं एआई-जनित सामग्री (AI-generated content) पर कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया गया है:

  • संवेदनशील सामग्री के लिए 2 घंटे की सीमा: नग्नता (Nudity), यौन उत्पीड़न, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), किसी व्यक्ति के निजी अंगों के अनाधिकृत चित्रण, या एआई-मॉर्फ्ड (Deepfake) तस्वीरों व वीडियो से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई और सामग्री को हटाने की समय-सीमा को 24 घंटे से घटाकर 2 घंटे कर दिया गया है।
  • सरकारी व अदालती आदेशों का पालन 3 घंटे में: किसी सक्षम न्यायालय या सरकार/सरकारी एजेंसियों द्वारा गैर-कानूनी या असंवैधानिक पाई गई सामग्री को हटाने की समय-सीमा को 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दिया गया है।
  • सामान्य शिकायतों का निवारण 36 घंटे में: उपयोगकर्ताओं द्वारा दर्ज कराई जाने वाली सामान्य शिकायतों (General Grievance Redressal) को सुलझाने की सीमा 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे कर दी गई है।
  • एआई और सिंथेटिक कंटेंट (SGI) पर अनिवार्य लेबलिंग: सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन (Synthetically Generated Information – SGI), जैसे डीपफेक और एआई-जनित ऑडियो, वीडियो या तस्वीरों पर स्पष्ट लेबल और ट्रेसेबल मेटाडेटा (Traceable Metadata) लगाना अनिवार्य होगा।

टेक कंपनियों के लिए तकनीकी जवाबदेही और प्रोएक्टिव मॉनिटरिंग

भारत में 50 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Significant Social Media Intermediaries – SSMIs) के लिए स्वचालित टूल (Automate Tools) और तकनीकी प्रणाली तैनात करना अनिवार्य कर दिया गया है।

  1. स्वचालित पहचान प्रणाली: प्लेटफ़ॉर्म्स को ऐसे ऑटोमेटेड मैकेनिज्म विकसित करने होंगे जो यौन हिंसा, बलात्कार, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और पहले से हटाई गई आपत्तिजनक सामग्री के दोबारा अपलोड होने पर उसे प्रोएक्टिव रूप से पहचानकर तुरंत ब्लॉक कर सकें।
  2. उपयोगकर्ता जागरूकता: कंपनियों को अपने यूजर्स को यह स्पष्ट रूप से सूचित करना होगा कि गैर-कानूनी एआई सामग्री या डीपफेक बनाना और साझा करना भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा आईटी अधिनियम के तहत दण्डनीय अपराध है।

‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) सुरक्षा समाप्त होने का जोखिम

नए नियमों का पालन न करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान रखे गए हैं:

धारा 79 के तहत सुरक्षा रद्द: यदि कोई मध्यस्थ (Intermediary) निर्धारित समय-सीमा के भीतर संवेदनशील सामग्री हटाने या सरकारी निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे आईटी अधिनियम की धारा 79 (Section 79) के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) संरक्षण समाप्त हो जाएगा।

सेफ हार्बर सुरक्षा हटने का सीधा अर्थ यह है कि प्लेटफॉर्म पर किसी थर्ड-पार्टी उपयोगकर्ता द्वारा पोस्ट की गई आपराधिक सामग्री के लिए स्वयं सोशल मीडिया कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ भारतीय कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमा (Criminal Prosecution) दर्ज किया जा सकेगा।

नए आईटी नियमों का उद्देश्य और प्रभाव

डिजिटल स्पेस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इंटरनेट पर किसी व्यक्ति की गोपनीयता (Privacy), गरिमा और सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने वाले वीडियो या तस्वीरों को फैलने से रोकने के लिए शुरुआती 2 घंटे सबसे निर्णायक होते हैं। इस नीति के लागू होने से विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले डिजिटल अपराधों, साइबर बुलिंग और पहचान की चोरी (Identity Theft) जैसी घटनाओं पर त्वरित अंकुश लगाया जा सकेगा

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  • Rahul Kaushik

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