अमेरिका में बसने और ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) का बेसब्री से इंतजार कर रहे लाखों भारतीयों के लिए अमरीकी विदेश विभाग (US Department of State) की हालिया घोषणाएं बड़ी राहत लेकर आई हैं। अमरीका द्वारा जारी लेटेस्ट वीजा बुलेटिन और प्राथमिकता तिथियों (Priority Dates) में आए सकारात्मक बदलावों ने उन भारतीय परिवारों और आईटी व कुशल पेशेवरों (Skilled Professionals) में नई उम्मीद जगा दी है, जो दशकों से बैकलाग (Backlog) की जटिल प्रक्रिया से जूझ रहे थे।
अमरीकी विदेश विभाग और अमरीकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, फैमिली-बेस्ड (Family-Based) श्रेणियों में ऐतिहासिक छलांग दर्ज की गई है, जबकि एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड (Employment-Based यानी रोजगार आधारित) श्रेणियों (विशेषकर EB-2 और EB-3) में पिछले कुछ महीनों के दौरान अप्रत्याशित रूप से तिथियों के आगे बढ़ने से हजारों आवेदकों के लिए ग्रीन कार्ड फाइलिंग और एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस (Adjustment of Status) का रास्ता खुला है।
फैमिली-बेस्ड श्रेणियों में बड़ा उछाल: वर्षों की प्रतीक्षा का अंत
वीजा बुलेटिन के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अमरीकी नागरिकों और ग्रीन कार्ड धारकों के परिजनों के लिए बनी फैमिली श्रेणियों (F1, F2B, F3, F4) की कट-ऑफ तिथियों में अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिली है।
- F3 श्रेणी (अमरीकी नागरिकों के शादीशुदा बच्चे): इस श्रेणी की कट-ऑफ तिथियों में सबसे बड़ी तेजी आई है। तिथियां एक ही बार में 20 महीने से अधिक समय के लिए आगे बढ़ गई हैं।
- F4 श्रेणी (अमरीकी नागरिकों के भाई-बहन): भारतीयों के लिए लंबे समय से अटकी पड़ी F4 श्रेणी में भी 16 से 26 महीनों तक की बड़ी बढ़त दर्ज की गई है।
- F2B श्रेणी (ग्रीन कार्ड धारकों के अविवाहित वयस्क बच्चे): इस श्रेणी में भी 8 से 20 महीनों तक की जबरदस्त प्रगति दर्ज हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के समय से लंबित पड़े केसों के तेजी से निपटारे और चालू वित्त वर्ष में कोटा प्रणाली के कुशल प्रबंधन के कारण यह बड़ा उछाल संभव हो पाया है। इससे उन भारतीय परिवारों का लंबे समय का इंतजार खत्म हो रहा है जो अपने रिश्तेदारों को अमेरिका बुलाने का सपना देख रहे थे।
रोजगार आधारित श्रेणियां: EB-2 और EB-3 में राहत भरी प्रगति
अमरीका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं के लिए H-1B वीजा से ग्रीन कार्ड में परिवर्तन की राह हमेशा से बेहद कठिन मानी जाती रही है। हालांकि, हाल के वीजा बुलेटिन के चक्रों में ‘डेट्स फॉर फाइलिंग’ (Dates for Filing) और ‘फाइनल एक्शन डेट्स’ (Final Action Dates) में आए सकारात्मक बदलावों ने बड़ा संबल दिया है।
- EB-2 और EB-3 भारत (India): रोजगार आधारित श्रेणियों में ‘डेट्स फॉर फाइलिंग’ जनवरी 2015 की सीमा तक पहुंच गई। वहीं EB-2 की ‘फाइनल एक्शन डेट्स’ में भी बीते महीनों में कई महीनों की सीधी छलांग देखी गई, जिससे 2014 तक के प्राथमिकता तिथि (Priority Date) वाले आवेदकों को एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस (Form I-485) दाखिल करने का अवसर मिला।
- EB-1 श्रेणी (विशेष योग्यता और प्रबंधक): हालांकि EB-1 श्रेणी में उच्च मांग के कारण कट-ऑफ तिथियों में मामूली उतार-चढ़ाव बना हुआ है, फिर भी भारतीय आवेदकों के लिए अन्य देशों की तुलना में प्रक्रिया निरंतर गति पकड़ रही है।
वीजा मामलों के अमरीकी विशेषज्ञों के अनुसार, वीजा संख्या (Visa Numbers) के आवंटन में पारदर्शिता और USCIS द्वारा अप्रयुक्त (Unused) वीजा कोटा का त्वरित उपयोग किए जाने के कारण ही प्राथमिकता तिथियों में यह तेजी (Jump) दिखाई दे रही है।
क्यों लग रही थी भारतीयों को लंबी प्रतीक्षा?
अमरीका की आव्रजन प्रणाली (US Immigration System) के तहत प्रत्येक देश के लिए प्रतिवर्ष दिए जाने वाले कुल ग्रीन कार्ड का अधिकतम 7 प्रतिशत (Per-Country Cap) का ही कोटा निर्धारित है। भारत जैसे विशाल आबादी और अत्यधिक कुशल जनशक्ति वाले देश से प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में H-1B और EB श्रेणी के आवेदन जमा होते हैं।
इस 7% की देश-वार सीमा के कारण भारतीय आवेदकों का एक बहुत बड़ा ‘बैकलाग’ जमा हो गया था, जिससे कई मामलों में प्रतीक्षा अवधि 10 से 20 वर्ष या उससे भी अधिक आंकी जा रही थी। ऐसे में प्राथमिकता तिथियों का एक-दो महीने के बजाय कई महीनों या सालों आगे खिसकना भारतीय समुदाय के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।
भारतीय टेक पेशेवरों और बच्चों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- ‘असुरक्षा’ के माहौल से राहत: अमेरिका में कार्य कर रहे H-1B वीजा धारकों को हर तीन साल में वीजा नवीनीकरण की झंझट और नौकरी छूटने पर 60 दिनों में देश छोड़ने के डर से राहत मिलेगी। I-485 फाइल होने के बाद आवेदकों को ‘एंप्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट’ (EAD) और ‘एडवांस पैरोल’ (AP) मिल जाता है, जिससे वे बिना किसी भय के नौकरी बदल सकते हैं और अमरीका से बाहर यात्रा कर सकते हैं।
- ‘एजिंग आउट’ (Aging Out) की समस्या से बचाव: भारतीय प्रवासियों के लिए सबसे बड़ी चिंता उनके बच्चों की उम्र का 21 वर्ष पार कर जाना था। अमरीकी कानून के तहत 21 वर्ष से अधिक उम्र होते ही बच्चे अपने माता-पिता के ग्रीन कार्ड आवेदन पर आश्रित (Dependent) नहीं रहते और उन्हें देश छोड़ना पड़ता है या छात्र/कार्य वीजा पर जाना पड़ता है। प्राथमिकता तिथियों में तेजी आने से हजारों बच्चे ‘चाइल्ड स्टेटस प्रोटेक्शन एक्ट’ (CSPA) के तहत सुरक्षित हो जाएंगे।
- पति/पत्नी को काम की आजादी: EAD मिलने के बाद वीजा धारकों के जीवनसाथी भी अमरीका में बिना किसी अतिरिक्त बाधा के किसी भी क्षेत्र में काम करने या अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
आव्रजन विशेषज्ञों की राय और भविष्य की रणनीति
अमरीकी आव्रजन वकीलों और विशेषज्ञों ने आवेदकों को सलाह दी है कि प्राथमिकता तिथि पास आते ही अपने सभी दस्तावेज़, पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, मेडिकल चेकअप और वित्तीय कागजात तैयार रखें।
इमिग्रेशन लॉ फर्मों का कहना है कि:
“जब भी वीजा बुलेटिन में प्राथमिकता तिथियां आगे बढ़ती हैं, आवेदकों को बिना समय गंवाए अपना आवेदन जमा करना चाहिए। कई बार अत्यधिक मांग के कारण आने वाले महीनों में तिथियां वापस पीछे भी खिसक (Retrogression) सकती हैं। इसलिए मिली हुई इस राहत की खिड़की (Opportunity Window) का तुरंत लाभ उठाना ही बुद्धिमानी है।”
अमरीकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में आया यह उछाल उन लाखों भारतीय परिवारों के जीवन में नई स्थिरता और खुशहाली लेकर आया है जो कई वर्षों से अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे थे। हालांकि अमरीकी कांग्रेस में ‘पर-कंट्री कैप’ को समाप्त करने वाले ‘EAGLE Act’ जैसे स्थायी सुधारों की मांग अभी भी जारी है, लेकिन मौजूदा वीजा बुलेटिन की यह सकारात्मक हलचल अमरीका में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक जीत साबित हो रही है।
यह भी पढ़ें: UPSC Recruitment 2026: 13 पदों पर सीधी भर्ती, 16 अक्टूबर तक करें आवेदन