जम्मू-कश्मीर में घाटी को आतंकवाद से मुक्त कराने के लिए भारतीय सेना और सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के ऊपरी वन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का सबसे वांछित शीर्ष कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा सुरक्षा बलों के साथ हुए एक भीषण एनकाउंटर में मारा गया है।
यह मुठभेड़ बडगाम के युसमर्ग के पास कोरागा के दुर्गम जंगलों में हुई, जहां सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त दल ने ‘ऑपरेशन कोरागा’ चलाकर आतंकी को मार गिराया। सुरक्षा बलों के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि सितंबर महीने में ही भारतीय सेना ने अलग-अलग अभियानों के तहत कुल 5 दुर्दांत आतंकवादियों को ढेर किया है।
बडगाम के जंगलों में ‘ऑपरेशन कोरागा’ और मुठभेड़ की पूरी कहानी
सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी कि बडगाम जिले के ऊंचे पहाड़ी इलाके और युसमर्ग के पास कोरागा के घने जंगलों में लश्कर का एक उच्च स्तरीय कमांडर अपने साथियों के साथ छिपा हुआ है। गुप्त सूचना मिलते ही भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स, राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) और CRPF ने इलाके को चारों तरफ से घेरकर एक संयुक्त तलाशी अभियान (CASO) शुरू किया।
घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों का फायदा उठाकर सुरक्षा बल जैसे ही ठिकाने के पास पहुंचे, वैसे ही जंगल में छिपे आतंकी हाशिम मूसा ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। भारतीय जवानों ने तत्परता दिखाते हुए पहले आतंकी को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन उसकी ओर से लगातार भारी गोलाबारी और हथगोले दागे जाते रहे। इसके बाद सेना ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू की।
घंटों चले इस एनकाउंटर में सेना ने रणनीतिक रूप से आतंकी को घेर लिया और आखिरकार लश्कर कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को ढेर कर दिया। एनकाउंटर स्थल से सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, अत्याधुनिक संचार उपकरण और गोला-बारूद बरामद किया है।
कौन था हाशिम मूसा? पीर पंजाल के दोनों ओर फैला था खौफ का नेटवर्क
मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा लश्कर-ए-तैयबा का एक अत्यंत खतरनाक और प्रशिक्षित आतंकवादी था। वह पिछले कई सालों से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय था और पीर पंजाल श्रेणी के दोनों तरफ (कश्मीर घाटी और जम्मू संभाग) आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने और संगठन का नेटवर्क फैलाने का काम कर रहा था।
- आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड: हाशिम मूसा सुरक्षा बलों पर हुए कई बड़े हमलों, आम नागरिकों की लक्षित हत्याओं (Targeted Killings) और घाटी में युवाओं को बरगलाकर आतंकवाद में धकेलने की साजिशों में शामिल था।
- पहले भी दे चुका था चकमा: सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इसी महीने 5 सितंबर को युसमर्ग की पहाड़ियों में चलाए गए एक अभियान के दौरान भी हाशिम मूसा सुरक्षा बलों के घेरे से भागने में सफल रहा था, हालांकि उस दौरान उसका एक सहयोगी मारा गया था। तब से ही सुरक्षा बल उसके पीछे लगे हुए थे और उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी।
- लश्कर के कोर ग्रुप का सदस्य: सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह लश्कर के उस 4-सदस्यीय कोर ग्रुप का प्रमुख चेहरा था, जो वर्ष 2022 से घाटी में बड़े आतंकी हमलों की साजिशें रच रहा था। उसके मारे जाने से लश्कर-ए-तैयबा के ओवर ग्राउंड नेटवर्क और ऑपरेशनल कमांड को बहुत बड़ा झटका लगा है।
सितंबर महीने में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई: 5 आतंकवादी ढेर
घाटी में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारी तेजी दिखाई है। केवल सितंबर महीने में ही सेना और पुलिस के संयुक्त अभियानों में 5 प्रमुख आतंकियों का सफाया किया गया है।
- युसमर्ग मुठभेड़ (5 सितंबर): सितंबर की शुरुआत में ही बडगाम के युसमर्ग इलाके में सुरक्षा बलों ने लश्कर के एक आतंकी (यासिर) को ढेर कर दिया था, जिसमें हाशिम मूसा बाल-बाल बच निकला था।
- उत्तरी कश्मीर और घुसपैठ विरोधी अभियान (17 सितंबर): बांदीपोरा और उत्तरी कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश कर रहे दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) के पास ही मार गिराया।
- कोरागा एनकाउंटर (सितंबर अंत): बडगाम के कोरागा में ‘ऑपरेशन कोरागा’ के तहत लश्कर कमांडर हाशिम मूसा को ढेर कर सुरक्षा बलों ने महीने के सबसे बड़े अभियान को अंजाम दिया।
इन लगातार सफल अभियानों से यह साफ जाहिर होता है कि घाटी में आतंकियों का बचना अब असंभव है और सेना की खुफिया नेटवर्क प्रणाली काफी मजबूत हो चुकी है।
घाटी में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना का जीरो टॉलरेंस रुख
जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स ने स्पष्ट किया है कि केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति लागू रहेगी। सीमा पार से होने वाली किसी भी घुसपैठ या स्थानीय स्तर पर अशांति फैलाने की कोशिश को सख्ती से कुचला जा रहा है।
हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद बडगाम, युसमर्ग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में सघन तलाशी अभियान (Combing Operation) जारी है ताकि यदि कोई अन्य संदिग्ध या उसका सहयोगी आसपास छिपा हो, तो उसे भी पकड़ा जा सके। स्थानीय प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और फ्लैग मार्च किए जा रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाशिम मूसा जैसे शीर्ष कमांडर के खात्मे से बडगाम और मध्य कश्मीर के इलाकों में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियां लगभग ठप्प हो जाएंगी। भारतीय सेना के इस शौर्य और त्वरित कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों में भी सुरक्षा का विश्वास और मजबूत हुआ है।
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