कर्नाटक की राजनीति में गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाले पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर घमासान तेज हो गया है। भाजपा नेता और पूर्व विधायक एमपी रेणुकाचार्य ने इस मुद्दे को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर पर निशाना साधा है और उन्हें मंत्रिमंडल से तत्काल हटाने की मांग की है। रेणुकाचार्य का आरोप है कि सरकार के इस फैसले से राज्य के सुपारी (Arecanut) किसानों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में कर्नाटक सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने जनस्वास्थ्य का हवाला देते हुए तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला की बिक्री व निर्माण पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। हालांकि, इस फैसले के सामने आते ही राज्य के मलेनाडु और तटीय इलाकों के सुपारी उत्पादक किसानों में भारी अनिश्चितता और आक्रोश फैल गया।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार के इस कदम से सुपारी के बाजार मूल्य में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी। इसी कड़ी में एमपी रेणुकाचार्य ने सरकार के इस फैसले को किसान विरोधी करार देते हुए मंत्री यूटी खादर के इस्तीफे या उनके निष्कासन की मांग उठाई है।
रेणुकाचार्य का रुख और आरोप
रेणुकाचार्य ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार बिना किसी पूर्व योजना और सुपारी उत्पादकों के हितों का ध्यान रखे बिना ऐसे फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि सुपारी कर्नाटक के लाखों किसानों की मुख्य फसल है और गुटखा प्रतिबंध के फैसले से सीधे तौर पर स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। रेणुकाचार्य के अनुसार, इस भ्रम और नुकसान की स्थिति के लिए स्वास्थ्य मंत्री सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, इसलिए उन्हें तुरंत मंत्रिमंडल से बाहर किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर का स्पष्टीकरण
दूसरी ओर, विवाद गहराने के बाद स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि गुटखा और पान मसाले पर प्रतिबंध का आदेश वापस नहीं लिया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह तर्क दिया:
- जनस्वास्थ्य प्राथमिकता: यह फैसला किसी व्यापार या किसान के खिलाफ नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए लिया गया है।
- सुपारी किसानों पर प्रभाव नहीं: मंत्री खादर ने दावा किया कि यह प्रतिबंध केवल हानिकारक ‘निकोटीन’ और ‘तंबाकू’ युक्त उत्पादों पर है, ना कि शुद्ध सुपारी (Areca nut) पर।
- कच्चे माल का स्रोत: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में पैदा होने वाली उच्च गुणवत्ता वाली सुपारी का उपयोग गुटखा बनाने में बहुत कम होता है; गुटखा निर्माता अक्सर अन्य देशों से सुपारी आयात करते हैं। इसलिए स्थानीय किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है और आने वाले समय में सुपारी के दामों में गिरावट नहीं आएगी।
राजनीतिक गरमाहट और आगे की राह
कर्नाटक सरकार का कहना है कि वे स्वास्थ्य सुरक्षा और सुपारी किसानों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री के स्तर पर भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है ताकि किसानों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे। हालांकि, विपक्षी दल और भाजपा नेता इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरने की रणनीति बना रहे हैं।
कर्नाटक में यह मुद्दा अब सिर्फ एक स्वास्थ्य नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसान राजनीति और प्रशासनिक फैसलों के टकराव का केंद्र बन चुका है।
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