प्रयागराज/भोपाल। समकालीन हिंदी साहित्य और बाल साहित्य के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार और शिक्षाविद डॉ. अर्चना प्रकाश की तीन नव-प्रकाशित पुस्तकों का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। इस गरिमामय साहित्यिक समारोह में देश के जाने-माने लेखकों, विचारकों, शिक्षाविदों और बाल साहित्य के मर्मज्ञों ने शिरकत की। विमोचित पुस्तकों में बाल साहित्य पर केंद्रित ‘चमत्कारी कछुआ’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा डॉ. प्रकाश की दो अन्य रचनाएं—एक काव्य संग्रह और एक वैचारिक निबंध संग्रह—का भी लोकार्पण किया गया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार और आलोचकों ने कहा कि डॉ. अर्चना प्रकाश का यह लेखन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह आज के आधुनिक और डिजिटल युग में गिरते सामाजिक मूल्यों को संबल देने का एक गंभीर प्रयास है। विशेष रूप से उनकी बाल कथा पुस्तक ‘चमत्कारी कछुआ’ केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मन-मस्तिष्क में दया, करुणा, सत्य और धैर्य जैसे बुनियादी जीवन मूल्यों का बीजारोपण करने में सक्षम है।
बाल साहित्य में घटती संवेदनाओं के बीच ‘चमत्कारी कछुआ’ की प्रासंगिकता
आज के दौर में जब बच्चे स्मार्टफोन, ऑनलाइन गेम्स और काल्पनिक सुपरहीरो की दुनिया में तेजी से गुम होते जा रहे हैं, तब एक ऐसी बाल-पुस्तक का आना जो प्रकृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ती हो, अत्यंत स्वागत योग्य है।
इस पुस्तक में संकलित कहानियां बच्चों को रोचक अंदाज़ में यह समझाती हैं कि सफलता किसी जादुई छड़ी से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, ईमानदारी और आपसी सहयोग से मिलती है। कहानियों की भाषा इतनी सरल और सहज है कि प्राथमिक और माध्यमिक वर्ग के बच्चे इसे आसानी से समझ सकते हैं।
अन्य दो पुस्तकों में आधुनिक जीवन की संवेदनाएं और यथार्थ
समारोह में डॉ. प्रकाश की दो अन्य कृतियों का भी विमोचन किया गया, जो प्रौढ़ साहित्य और सामाजिक विमर्श पर आधारित हैं:
- काव्य संग्रह (‘सपनों की देहरी पर’): इस संग्रह की कविताएं स्त्री विमर्श, मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों के ताने-बाने और आधुनिक जीवन के तनावों को बहुत ही खूबसूरती से रेखांकित करती हैं। कविताओं में छंदबद्धता और लयात्मकता का सुंदर संतुलन है।
- वैचारिक निबंध संग्रह (‘चिंतन के नए आयाम’): यह पुस्तक आधुनिक समाज, शिक्षा प्रणाली और बदलती सांस्कृतिक परंपराओं पर तीखा प्रहार करती है। इसमें लेखिका ने यह दर्शाने की कोशिश की है कि किस प्रकार तकनीक के इस युग में मानवीय रिश्ते पीछे छूट रहे हैं।
डॉ. अर्चना प्रकाश का वक्तव्य: “साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, मार्गदर्शक भी है”
पुस्तकों के विमोचन के उपरांत अपने धन्यवाद ज्ञापन और अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. अर्चना प्रकाश भावुक नज़र आईं। उन्होंने अपनी लेखन यात्रा और इन पुस्तकों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा:
- बाल साहित्य का दायित्व: “बच्चों के लिए लिखना सबसे कठिन कार्य है क्योंकि उनके लिए लिखते समय आपको स्वयं बच्चा बनना पड़ता है। ‘चमत्कारी कछुआ’ लिखने के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य बच्चों को हमारी समृद्ध भारतीय परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़ना था। यदि हम बचपन में ही बच्चों के भीतर सही मूल्य नहीं रोपेंगे, तो एक समृद्ध समाज की कल्पना करना असंभव है।”
- सृजन की प्रेरणा: “मेरी रचनाएं मेरे आसपास के परिवेश, आम जनमानस की पीड़ा और प्रकृति से ली गई प्रेरणा का परिणाम हैं। मुझे उम्मीद है कि ये तीनों पुस्तकें पाठकों के दिलों में अपनी जगह बनाएंगी।”
साहित्यकारों और शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया
समारोह में उपस्थित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी पुस्तकों पर अपने विचार व्यक्त किए।
- शिक्षाविदों का मत: कई प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्राचार्यों ने कहा कि ‘चमत्कारी कछुआ’ जैसी पुस्तकों को स्कूली पुस्तकालयों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक बच्चे इससे लाभान्वित हो सकें।
- समीक्षकों की राय: साहित्यिक समीक्षकों ने माना कि डॉ. प्रकाश की शैली में एक अद्भुत प्रवाह है जो पाठक को अंत तक बांधे रखता है। उनकी रचनाएं न केवल पढ़ने में सुगम हैं, बल्कि गहरा प्रभाव भी छोड़ती हैं।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी नवागत अतिथियों, लेखकों और पाठकों का आभार व्यक्त किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिन्होंने डॉ. अर्चना प्रकाश को उनकी इस नई साहित्यिक उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।
यह भी पढ़ें: आपसे किसने पंगा लिया रात 2 बजे सलमान की लीन बॉडी देख पूछे सवाल