भूटान में फटी ग्लेशियल झील: बंगाल में अलर्ट, अलीपुरद्वार से 10 हजार लोग शिफ्ट

पड़ोसी देश भूटान में प्रकृति का एक बड़ा प्रकोप देखने को मिला है, जहां गासा जिले के पर्वतीय क्षेत्र में स्थित एक ग्लेशियल झील (हिमनद झील) के फटने से भारत के उत्तरी पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही और बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस आपदा के बाद भारत के कई जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में प्रशासन ने तुरंत और मुस्तैदी दिखाते हुए लगभग 10,000 से अधिक लोगों को उनके घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शिफ्ट कर दिया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को युद्ध स्तर पर तैनात कर दिया गया है।

भूटान में शिंताफू झील फटने से मची खलबली

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भूटान के गासा जिले के लाया गेओग के अंतर्गत लुंगो इलाके में वाकिला पर्वत के पास स्थित शिंताफू ग्लेशियल झील (Shintaphu Glacial Lake) अचानक फट गई। इस घटना के बाद झील का विशाल जलराशि और पहाड़ों का मलबा तेज गति से नीचे की ओर बहने लगा। यह पानी मो छू (Mo Chu) नदी बेसिन से होता हुआ आगे चलकर भारत में प्रवेश करने वाली संकोश नदी (Sankosh River) की तरफ बढ़ा।

चूंकि शिंताफू झील को पहले ही भूटान की उन 17 सबसे खतरनाक और संवेदनशील झीलों में शुमार किया गया था, जिनके फटने से भारी तबाही की आशंका थी, इसलिए इस घटना के सामने आते ही दोनों देशों के प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। पानी के तेज बहाव और संभावित बाढ़ के खतरे को भांपते हुए फौरन सीमावर्ती बस्तियों में सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया जाने लगा।

बंगाल के अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य

भूटान की इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों पर पड़ा है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और विशेषकर अलीपुरद्वार जिले में प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।

  • 10 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षित बाहर निकाले गए: संकोश नदी के जलस्तर में अचानक भारी वृद्धि की आशंका को देखते हुए कुमारग्राम और आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लगभग 10,000 नागरिकों को सुरक्षित ठिकानों और अस्थाई राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।
  • रातभर चली मुनादी और सायरन: नदी के किनारे बसे गांवों में प्रशासन द्वारा लगातार मुनादी कराई गई और लोगों से अपील की गई कि वे तुरंत अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर चले जाएं।
  • नेताओं और मंत्रियों की अपील: पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्रियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से लोगों से अपील की कि वे घबराएं नहीं, बल्कि पूरी सतर्कता बरतते हुए प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की तैनाती, नदियां उफान पर

संभावित बाढ़ के खतरे और भारी जलप्रवाह को रोकने तथा जनजीवन की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह से एक्टिव मोड में आ गई हैं।

  1. सुरक्षा बलों का मोर्चा संभालना: अलीपुरद्वार के तूফানगंज, बॉक्सीरहाट और संकोश नदी के तटीय इलाकों में NDRF और SDRF की विशेष टीमों को तैनात कर दिया गया है। ये टीमें लगातार जलस्तर की निगरानी कर रही हैं और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने में जुटी हैं।
  2. मलबे और बाढ़ का अंदेशा: विशेषज्ञों का मानना है कि इस जलप्रवाह के साथ भारी मात्रा में पेड़ के तने, कंक्रीट का मलबा और मृत मछलियां बहकर नीचे मैदानी इलाकों तक आ सकती हैं, जिससे नदियों के पुलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।
  3. असम के कई जिले भी रेड अलर्ट पर: बंगाल के अलावा असम के धुबरी और अन्य सीमावर्ती जिलों को भी संकोश नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन लगातार भूटान के अधिकारियों के संपर्क में है ताकि पानी के प्रवाह और स्थिति का पल-पल का अपडेट लिया जा सके।

क्या है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF)?

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) एक प्रकार की अचानक आने वाली बाढ़ है, जो तब होती है जब किसी हिमनद झील (ग्लेशियल लेक) का प्राकृतिक बांध कमजोर होकर टूट जाता है। ग्लोबल वार्मिंग और पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण हिमनद तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे ऐसी झीलों में पानी की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ जाती है। जब पानी का दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है, तो झील के किनारे या मलबा टूट जाते हैं और करोड़ों लीटर पानी एक साथ तेज रफ्तार से पहाड़ी घाटियों से नीचे मैदानी इलाकों की तरफ बहने लगता है, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तहस-नहस कर देता है।

फिलहाल, पश्चिम बंगाल और असम प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्रियां पहुंचाई जा रही हैं और लोगों से लगातार यह अपील की जा रही है कि वे पानी के स्रोतों और नदियों के करीब जाने से पूरी तरह बचें।

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  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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