देश की लोकतांत्रिक प्रणाली और चुनावी निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद डॉ. शशि थरूर ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की अपनी पार्टी की मांग को दोहराते हुए वर्तमान चुनावी प्रक्रिया को “लोकतांत्रिक प्रक्रिया का क्रूर मज़ाक” (Travesty of Electoral Process) करार दिया है।
इंडिया (INDIA) गठबंधन के नेताओं द्वारा नई दिल्ली में आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन और मार्च के दौरान शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में धांधली और नागरिकों के मताधिकार छीनने का यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।
लोकतंत्र और मतदान का अधिकार राजनीति से ऊपर: शशि थरूर
विरोध मार्च के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए शशि थरूर ने कहा कि पिछले कुछ समय से जिस प्रकार मतदाता सूचियों में बदलाव किए गए हैं और लाखों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वह अत्यंत चिंताजनक है।
“लोकतंत्र की रक्षा करना किसी भी प्रकार की दलीय राजनीति से ऊपर है। देश के आम नागरिकों से उनका सबसे पवित्र संवैधानिक अधिकार—’वोट देने का अधिकार’ छीना जा रहा है। जिस संस्था पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी है, यदि उसी की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगें, तो यह भारतीय लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए एक बड़ा संकट बन जाता है।”
— डॉ. शशि थरूर (वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं सांसद)
थरूर ने यह भी उल्लेख किया कि मतदाता सूचियों से लाखों मतदाताओं के अचानक गायब होने, चुनावी फॉर्मों में अनियमितताओं और चुनाव आयोग द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर एवं प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी ने देशवासियों के मन में गहरा संदेह उत्पन्न कर दिया है।
विपक्षी दलों का हल्लाबोल: मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष
कांग्रेस और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध अब अपने चरम पर पहुंच गया है। नई दिल्ली में आयोजित मार्च में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और विपक्षी दलों के दर्जनों सांसदों ने हिस्सा लिया।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि:
- मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर: देश भर के विभिन्न राज्यों में लाखों वैध नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों से अनुचित तरीके से हटाए गए हैं।
- संवैधानिक संस्थाओं का अवमूल्यन: विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था का इस्तेमाल सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक हितों को साधने के लिए किया जा रहा है।
- पारदर्शिता का अभाव: मतदान और मतगणना के आंकड़ों में भारी अंतर तथा आरटीआई (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों को सार्वजनिक न करना संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस के इस आक्रामक रुख को समर्थन देते हुए देश की विभिन्न राज्य विधानसभाओं में भी इस विषय पर आवाज उठाई गई है।

मुख्य बिंदु: चुनाव आयोग और निष्पक्षता पर सवाल
| विषय | मुख्य बिंदु एवं विपक्षी आरोप |
| मुख्य मांग | मुख्य चुनाव आयुक्त का तत्काल इस्तीफा या उन्हें पद से हटाना। |
| मूल समस्या | मतदाता सूचियों से लाखों योग्य नागरिकों के नामों की मनमानी कटौती। |
| मुख्य आरोप | चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव और संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिकरण। |
| विपक्ष का रुख | सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने और देशव्यापी आंदोलन चलाने का संकल्प। |
‘सिंहासन खाली करो’: राजनीतिक गलियारों में गूंजी कविता
शशि थरूर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पंक्तियों—“सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” का संदर्भ देते हुए सत्तारूढ़ वर्ग और आयोग के ढुलमुल रवैये पर तीखा प्रहार किया। उनका कहना था कि जब कोई संस्था अपने मूल संवैधानिक कर्तव्य को निभाने में असफल साबित होती है, तो जनता के पास अपनी आवाज उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
क्या है आगे का रास्ता?
विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि यदि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता नहीं लाता और मुख्य चुनाव आयुक्त पद त्याग नहीं करते, तो यह आंदोलन संसद से लेकर सड़कों और सर्वोच्च न्यायालय तक जारी रहेगा।
भारतीय लोकतंत्र हमेशा से अपनी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के लिए पूरे विश्व में जाना जाता रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को बनाए रखना केवल एक संस्था की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक पहचान को बचाए रखने के लिए अति आवश्यक है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और चुनाव आयोग विपक्ष के इन आरोपों का किस प्रकार सामना करते हैं।
यह भी पढ़ें: 2027 वर्ल्ड कप: रोहित-विराट के खेलने पर BCCI अध्यक्ष मिथुन मनहास ने तोड़ी चुप्पी