भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जिम्बाब्वे के खिलाफ आगामी सीरीज के लिए किए गए चयन और उप-कप्तान पद के फैसलों ने क्रिकेट गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। भारत की पूर्व कप्तान और दिग्गज कमेंटेटर अंजुम चोपड़ा ने ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा को टी20 अंतरराष्ट्रीय उप-कप्तान पद से हटाने के फैसले को बेहद निराशाजनक और ‘हैरान करने वाला’ (Baffling) करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने युवा स्टार स्पिनर श्रेयंका पाटिल और तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर को टीम से बाहर रखे जाने और बीसीसीआई (BCCI) की ओर से इस पर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान न आने पर भी कड़े सवाल खड़े किए हैं।
स्मृति मंधाना के नियमित कप्तान के रूप में अपना पूर्णकालिक कार्यकाल शुरू करने से ठीक पहले यह विवाद सामने आया है। भारत को 16 से 28 अक्टूबर के दौरान जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन टी20आई और तीन वनडे मैचों की सीरीज खेलनी है। हालांकि चयनकर्ताओं ने उप-कप्तान की जिम्मेदारी शेफाली वर्मा को सौंपी है, लेकिन पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा का मानना है कि दीप्ति शर्मा जैसे अनुभवी और निरंतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को इस तरह दरकिनार करना टीम के माहौल और चयन नीति पर बड़े सवाल खड़े करता है।
दीप्ति शर्मा को उप-कप्तान न बनाना क्यों है ‘हैरान करने वाला’?
अंजुम चोपड़ा ने स्पष्ट रूप से कहा कि दीप्ति शर्मा दुनिया की सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में से एक हैं और क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। ऐसे में जब भारतीय टीम कप्तानी और नेतृत्व में बदलाव के दौर से गुजर रही है, तब दीप्ति शर्मा का कद और अनुभव उप-कप्तान के पद के लिए सबसे स्वाभाविक विकल्प था।
अंजुम चोपड़ा का बयान:
“यह फैसला वास्तव में समझ से परे है। क्या आप दीप्ति शर्मा को यह संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें बदला जा सकता है या वह टी20आई टीम में सही नहीं बैठती हैं? वह विश्व क्रिकेट की सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में शामिल हैं। क्या आप उन्हें यही संदेश देना चाहते हैं? जब आप सभी प्रारूपों में एक नए कप्तान के साथ नए दौर में प्रवेश कर रहे हों, तो आपको उप-कप्तान चुनने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए थी।”
अंजुम चोपड़ा ने आगे कहा कि शेफाली वर्मा को उप-कप्तान बनाए जाने से उन्हें कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है, क्योंकि नेतृत्व की जिम्मेदारी किसी भी खिलाड़ी को दी जा सकती है, लेकिन जिस तरह से दीप्ति शर्मा के वर्षों के योगदान और निरंतरता को नजरअंदाज किया गया है, उससे यह संदेश जाता है कि टी20 प्लेइँग इलेवन में भी उनकी जगह पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
श्रेयंका पाटिल और रेणुका सिंह के चयन पर उठे बड़े सवाल
दीप्ति शर्मा के मुद्दे के अलावा, भारतीय टीम के चयन में दो और बड़े नामों का न होना चर्चा का विषय बना हुआ है—युवा ऑफ-स्पिनर श्रेयंका पाटिल और अनुभवी तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर।
अंजुम चोपड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि चयनकर्ताओं और बीसीसीआई को यह साफ करना चाहिए था कि इन खिलाड़ियों को विश्राम (Rest) दिया गया है, वे चोटिल (Injured) हैं या फिर उन्हें प्रदर्शन के आधार पर ड्रॉप किया गया है।
- पारदर्शिता की कमी: चयनकर्ताओं द्वारा कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति या कारण न बताए जाने से प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
- श्रेयंका पाटिल का प्रभाव: श्रेयंका ने हाल के महीनों में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में विविधता और विकेट लेने की क्षमता का परिचय दिया है। उनका अचानक टीम से बाहर होना कई सवाल खड़े करता है।
- रेणुका सिंह का कार्यभार प्रबंधन: नई गेंद से विकेट निकालने में माहिर रेणुका सिंह की अनुपस्थिति क्या उनकी फिटनेस की वजह से है या टीम प्रबंधन किसी नए कॉम्बिनेशन की तलाश में है, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
अंजुम ने कहा, “यदि वे चोटिल हैं, तो यह अलग बात है। लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो उन्हें टीम में शामिल क्यों नहीं किया गया? आधिकारिक संचार और स्पष्टता की कमी ही असल समस्या है।”
क्या जिम्बाब्वे सीरीज भविष्य का रोडमैप तैयार करेगी?
भले ही भारत और जिम्बाब्वे के बीच यह पहली द्विपक्षीय महिला सीरीज हो, लेकिन अंजुम चोपड़ा का मानना है कि भारतीय टीम को इसे केवल एक औपचारिकता या आसान सीरीज के रूप में नहीं देखना चाहिए।
टीम प्रबंधन को इस सीरीज का उपयोग एक मजबूत और स्पष्ट ‘टैम्प्लेट‘ (Template) सेट करने के लिए करना होगा। भारत का असली लक्ष्य केवल जिम्बाब्वे, पाकिस्तान या श्रीलंका जैसी टीमों को हराना नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ लगातार जीत दर्ज करने की रणनीति बनाना है।
जिम्बाब्वे के खिलाफ पहला T20I मुकाबला रायपुर में खेला जाएगा, जिसके बाद वनडे सीरीज वडोदरा में आयोजित होगी। स्मृति मंधाना के नेतृत्व और नए कोचिंग स्टाफ के तहत भारतीय टीम अपनी नई प्लेइंग इलेवन और रणनीतियों को परखने की कोशिश करेगी। हालांकि, दीप्ति शर्मा के उप-कप्तानी के मुद्दे और चयन में अस्पष्टता ने सीरीज की शुरुआत से पहले ही ड्रेसिंग रूम और प्रबंधन के फैसलों पर चर्चा गर्म कर दी है।
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