असम में इंसानियत की मिसाल: गले तक भरे बाढ़ के पानी में तैरकर शख्स ने बचाई बेज़ुबान बछड़े की जान

जनसमाज संवाददाता, असम। असम में मानसून के दौरान हर साल ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियाँ विकराल रूप धारण कर लेती हैं। उफनती नदियों और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के कई जिले पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं। इस वार्षिक प्राकृतिक आपदा में जहाँ लाखों इंसानों का जीवन अस्त-व्यस्त होता है, वहीं सबसे ज़्यादा मार बेज़ुबान मवेशियों और वन्यजीवों पर पड़ती है। जलस्तर अचानक बढ़ने से पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का अवसर नहीं मिलता, जिससे हर साल सैकड़ों बेज़ुबान मवेशी बाढ़ के तेज़ बहाव में बह जाते हैं या चारे और आश्रय के अभाव में अपनी जान गँवा बैठते हैं।

जान की बाजी लगाकर गले तक भरे पानी में उतरा जांबाज

इसी भयावह आपदा के बीच असम के दुलियाजान क्षेत्र से एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक घटना सामने आई। बाढ़ के तेज़ पानी में एक छोटा गाय का बछड़ा बहकर झाड़ियों और पेड़ों की टहनियों के बीच फंस गया था। पानी इतना गहरा था कि बछड़े का केवल सिर ही बाहर दिख रहा था और वह लगातार छटपटा रहा था। बछड़े को जिंदगी और मौत के बीच झूलते देख, गाँव के एक साहसी व्यक्ति ने अपनी जान की परवाह किए बिना गले तक भरे और उफनते पानी में छलांग लगा दी। उस व्यक्ति ने तैरकर किसी तरह बेज़ुबान बछड़े को अपने हाथों से सुरक्षित थाम लिया।

सूझबूझ और ग्रामीणों के सहयोग से सफल रेस्क्यू ऑपरेशन

पानी का बहाव इतना तेज़ था कि बछड़े को अकेले लेकर किनारे तक लौटना लगभग असंभव था। ऐसे में तट पर मौजूद ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और एक लंबा व मजबूत बांस पानी में फंसे व्यक्ति की ओर बढ़ाया। उस साहसी व्यक्ति ने एक हाथ से बांस को मजबूती से पकड़ा और दूसरे हाथ से बछड़े को संभालते हुए किनारे की ओर बढ़ा। ग्रामीणों ने मिलकर बांस को खींचा और दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद देश भर के लोगों ने इस व्यक्ति के अदम्य साहस और इंसानियत की जमकर सराहना की।

मौत के साए में जिंदगी की जंग: क्या है पूरा मामला?

घटना असम के दुलियाजान शिवसागर इलाके की बताई जा रही है, जहाँ लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और पूरा इलाका जलमग्न हो चुका है। बाढ़ का पानी इतनी तेज़ी से बढ़ा कि इंसानों के साथ-साथ बेज़ुबान मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुँचने का मौका नहीं मिला।

इसी दौरान, एक छोटा बछड़ा बाढ़ के तेज बहाव में बहकर एक उखड़े हुए पेड़ की डालियों के बीच फंस गया। पानी का स्तर इतना अधिक था कि बछड़ा केवल अपना सिर ही पानी से बाहर रख पा रहा था और लगातार मदद के लिए छटपटा रहा था।

बछड़े को इस तरह जिंदगी और मौत के बीच झूलते देख, वहां मौजूद एक स्थानीय नागरिक ने बिना एक पल गंवाए उफनते पानी में छलांग लगा दी।

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