जनसमाज संवाददाता, नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के प्रमुख छात्र केंद्र ‘सत्य निकेतन’ इलाके में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में इस्तेमाल की जा रही बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक और खौफनाक हादसे के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। हादसे के झटके इतने तेज थे कि गिरी हुई इमारत के ठीक बगल में स्थित दूसरी आवासीय इमारत की दीवारों और पिलरों में गंभीर दरारें आ गई हैं। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली नगर निगम (MCD) और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बगल वाली इमारत को तुरंत प्रभाव से खाली करने का सख्त नोटिस जारी कर दिया है।
कैसे और कब हुआ हादसा?
स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सत्य निकेतन की गली नंबर-2 में स्थित यह इमारत काफी पुरानी थी और इसमें मरम्मत का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोपहर के समय अचानक इमारत के निचले हिस्से से कुछ आवाजें आईं और देखते ही देखते पूरी तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। गनीमत यह रही कि मरम्मत कार्य के कारण अधिकांश छात्रों को पहले ही दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, मलबे की चपेट में आने से कुछ मजदूर और राहगीर घायल हो गए, जिन्हें तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसे के बाद चारों तरफ धूल का गुबार छा गया और चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। दिल्ली अग्निशमन सेवा और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला।

बगल की इमारत में आईं खतरनाक दरारें
हादसा केवल उस इमारत तक सीमित नहीं रहा जो गिरी थी। जब मुख्य इमारत ढही, तो उसके भारी मलबे और जमीन में हुए तेज कंपन की वजह से पास की चार मंजिला इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। बगल वाली इमारत की बाहरी दीवारों, मुख्य बीम और पिलरों में बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं।
इमारत में रहने वाले लोगों ने बताया कि जिस वक्त हादसा हुआ, ऐसा लगा जैसे कोई तीव्र झटका (भूकंप) आया हो। इमारत की दीवारें चटकने की आवाज सुनकर लोग बदहवास होकर अपने घरों से बाहर निकल आए। विशेषज्ञों का मानना है कि बगल वाली इमारत का ढांचागत संतुलन (Structural Stability) अब पूरी तरह बिगड़ चुका है और यह किसी भी क्षण गिर सकती है।
MCD का कड़ा रुख: इमारत खाली करने का नोटिस जारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) के वरिष्ठ अधिकारी, सिविल इंजीनियर और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंचे। MCD के इंजीनियरिंग विभाग ने आसपास की सभी इमारतों का तकनीकी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बगल वाली इमारत अब इंसानों के रहने योग्य नहीं रही है और वहां रहना जानलेवा साबित हो सकता है।
MCD ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बगल वाली इमारत के मालिक और उसमें रहने वाले किरायेदारों को इमारत खाली करने का ‘इमरजेंसी नोटिस’ थमा दिया। पुलिस ने एहतियात के तौर पर पूरी गली को बैरिकेडिंग करके सील कर दिया है ताकि कोई भी अप्रिय घटना न घटे। प्रशासन ने बिजली और पानी के कनेक्शन भी अस्थायी रूप से काट दिए हैं।
अवैध निर्माण और लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस के ठीक सामने स्थित है। यह इलाका हजारों बाहरी छात्रों का गढ़ है जो यहां किराए के कमरों और PG में रहते हैं। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के घने इलाकों में जारी अवैध निर्माण, घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और नागरिक नियमों की अनदेखी की पोल खोल कर रख दी है।
- बेसमेंट और नींव के साथ छेड़छाड़: प्राथमिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसके निचले हिस्से में बिना किसी ढांचागत सुरक्षा नियमों का पालन किए बदलाव किए जा रहे थे।
- क्षमता से अधिक निर्माण: सत्य निकेतन जैसे इलाकों में 50-60 गज के छोटे-छोटे प्लॉटों पर 4 से 5 मंजिला तक अवैध निर्माण कर लिया जाता है, जिससे इमारतों की नींव पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
- छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा: इस घटना के बाद यहां रहने वाले हजारों छात्र और उनके अभिभावक बेहद चिंतित हैं। कई PG मालिक अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में सुरक्षा मानकों (Fire and Structural Safety) को पूरी तरह दरकिनार कर देते हैं।
स्थानीय निवासियों और छात्रों में गुस्सा
घटना के बाद स्थानीय लोगों में MCD और बिल्डर माफिया के खिलाफ भारी रोष है। निवासियों का आरोप है कि इलाके में बिना किसी नक्शे के और बिना अनुमति के धड़ल्ले से निर्माण कार्य चलता रहता है, लेकिन शिकायत के बावजूद MCD अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते।
बगल की इमारत से निकाले गए एक छात्र ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, “हमारा सारा सामान, किताबें और जरूरी दस्तावेज अंदर ही रह गए हैं। अचानक नोटिस मिलने के बाद अब हमारे पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है। परीक्षा का समय नजदीक है और इस हादसे ने हमें सड़क पर ला खड़ा किया है।”
प्रशासन की आगे की रणनीति
MCD के प्रवक्ता ने बताया कि सत्य निकेतन हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि मरम्मत कार्य की अनुमति ली गई थी या नहीं। दोषी पाए जाने वाले इमारत मालिक और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई (FIR) दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, MCD पूरे सत्य निकेतन इलाके में जर्जर और अवैध रूप से बनी अन्य इमारतों का सर्वे शुरू करने जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी त्रासदी से बचा जा सके।
फिलहाल, NDRF की टीम मलबे को हटाने और क्षेत्र को सुरक्षित बनाने में जुटी हुई है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे जर्जर इमारतों में न रहें और किसी भी अवैध या असुरक्षित निर्माण की जानकारी तुरंत निगम को दें।