भारतीय रेलवे का महा-कायाकल्प: 10 वर्षों में बदला नक्शा, विद्युतीकरण में भारत बना दुनिया का दूसरा सिरमौर

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने पिछले एक दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसकी चर्चा पूरे विश्व में हो रही है। नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान भारतीय रेल के विद्युतीकरण (Electrification) की गति में अभूतपूर्व तेजी आई है। साल 2014 तक देश का लगभग 33 प्रतिशत ब्रॉड गेज (Broad Gauge) रेल नेटवर्क ही बिजली की पटरियों से लैस था, जो अब बढ़कर 99.6 प्रतिशत से भी अधिक के आंकड़े तक पहुंच चुका है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही भारत अब वैश्विक स्तर पर रेल नेटवर्क विद्युतीकरण के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अब इस दौड़ में दुनिया का केवल एक ही देश — स्विट्जरलैंड (100% विद्युतीकृत) — भारत से आगे बचा है। चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे विकसित देश भी अब रेलवे लाइन के विद्युतीकरण के प्रतिशत के मामले में भारत से काफी पीछे छूट चुके हैं।

2014 से पहले बनाम अब: आंकड़ों की जुबानी विद्युतीकरण की क्रांति

अगर भारतीय रेलवे के इतिहास और बीते 10 से 12 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अंतर साफ नजर आता है।

  • 2014 से पहले की स्थिति: आजादी के बाद से लेकर वर्ष 2014 तक (लगभग 6-7 दशकों में) भारतीय रेल का केवल 21,801 किलोमीटर रूट ही electrified (विद्युतीकृत) हो पाया था। तब विद्युतीकरण का काम महज 1.4 किलोमीटर प्रति दिन की औसत रफ्तार से आगे बढ़ रहा था।
  • मोदी सरकार के कार्यकाल में तेजी: 2014 के बाद से रेलवे विद्युतीकरण को “मिशन मोड” पर शुरू किया गया। वर्ष 2014 से 2026 के बीच 47,000 किलोमीटर से अधिक नए रेल मार्ग का विद्युतीकरण पूरा किया गया। इसके साथ ही कार्य की गति बढ़कर 15 से 19 किलोमीटर प्रति दिन तक पहुंच गई।

वर्ष 2014 में जहां देश का सिर्फ एक-तिहाई नेटवर्क बिजली से चलता था, वहीं आज लगभग संपूर्ण ब्रॉड गेज नेटवर्क हरित ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

विश्व पटल पर विभिन्न देशों की स्थिति

विश्व के प्रमुख देशों के रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण की तुलना की जाए तो आंकड़े भारतीय रेलवे की इस कामयाबी को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं:

देश (Country)रेल विद्युतीकरण प्रतिशत (% Electrified)
स्विट्जरलैंड100%
भारत99.6%
चीन82%
स्पेन67%
जापान64%
फ्रांस60%
यूनाइटेड किंगडम (UK)39%

विश्व के विशालतम और सबसे जटिल रेल नेटवर्क में से एक होने के बावजूद भारत का 99.6% नेटवर्क विद्युतीकृत हो जाना अपने आप में इंजीनियरिंग और प्रशासनिक दक्षता की एक अनोखी मिसाल है।

रेलवे के पूर्ण विद्युतीकरण से देश को होने वाले मुख्य लाभ

रेलवे लाइन के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण की ओर बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और यात्रियों को कई सीधे और बड़े फायदे मिले हैं:

1. ईंधन आयात और डीजल पर निर्भरता में भारी कटौती

विद्युतीकरण के कारण रेलवे द्वारा डीजल की खपत में अभूतपूर्व गिरावट आई है। वर्ष 2015-16 में रेलवे जहा लगभग 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत करता था, वहीं वर्ष 2024-25 तक यह घटकर केवल 108 करोड़ लीटर रह गई। यानी लगभग 185 करोड़ लीटर डीजल की सीधी बचत हुई है। इससे भारत सरकार को कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाले अरबों डॉलर की कीमती विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है।

2. ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण संरक्षण

भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक भारतीय रेलवे को पूरी तरह से “नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक” (Net-Zero Carbon Emitter) बनाने का लक्ष्य रखा है। डीजल इंजनों के हटने से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में भारी गिरावट आई है। सड़क परिवहन की तुलना में रेल परिवहन प्रति टन माल ढुलाई पर 89% कम CO₂ उत्सर्जित करता है।

3. सौर और पवन ऊर्जा का व्यापक समावेश

भारतीय रेलवे अब बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए हरित ऊर्जा पर भी तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है। देश भर के 2,600 से अधिक स्टेशनों और रेलवे पटरियों के किनारे 1,260 मेगावाट से अधिक क्षमता के सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

4. ट्रेनों की गति और क्षमता में इजाफा

इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (विद्युत इंजन) डीजल इंजनों की तुलना में अधिक शक्तिशाली और त्वरित गति पकड़ने वाले होते हैं। इससे न केवल मालगाड़ियों की लोड खींचने की क्षमता (Haulage Capacity) बढ़ी है, बल्कि ‘वंदे भारत’ और ‘अमृत भारत’ जैसी अत्याधुनिक हाई-स्पीड पैसेंजर ट्रेनों के निर्बाध संचालन में भी मदद मिली है। इससे रेल यात्रियों के सफर के समय में उल्लेखनीय कमी आई है।

राज्यों और रेलवे जोन का प्रदर्शन

आज भारत के लगभग 18 से अधिक राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, ओडिशा आदि) का रेल नेटवर्क 100% विद्युतीकृत हो चुका है। इसके साथ ही सेंट्रल रेलवे, नॉर्दर्न रेलवे, ईस्टर्न रेलवे, वेस्टर्न रेलवे और नॉर्थ सेंट्रल रेलवे समेत 15 रेलवे जोन्स पूरी तरह से बिजली ट्रैक्शन पर शिफ्ट हो चुके हैं। पूर्वोत्तर के कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों में भी शेष बचे छोटे खंडों पर कार्य अंतिम चरण में चल रहा है।

भविष्य का मार्ग: 100% विद्युतीकरण की ओर अंतिम कदम

भारतीय रेल नेटवर्क की इस कायाकल्प यात्रा ने न केवल भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता को सुदृढ़ किया है, बल्कि वैश्विक मंच पर देश के इंफ्रास्ट्रक्चर की साख को भी नए शिखर पर पहुंचाया है। आने वाले समय में 100% विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर भारत स्विट्जरलैंड की बराबरी कर दुनिया का पहला ऐसा विशाल रेल नेटवर्क वाला देश बन जाएगा, जहाँ कोई भी ट्रेन डीजल धुआं नहीं छोड़ेगी।

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  • Rahul Kaushik

    Senior Editor

    राहुल कौशिक एक युवा पत्रकार एवं मीडिया लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, तकनीक, शिक्षा, ऑटोमोबाइल, डिजिटल ट्रेंड्स और जनहित से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष एवं प्रभावशाली लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें समाचार जगत में तेजी से बदलते विषयों को सरल और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में विशेष रुचि है।

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