भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने एक बेहद अजीब और चिंताजनक मानसूनी घटनाक्रम उजागर किया है। देश के भू-भाग से करीब 90% बादल अचानक गायब दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई राज्यों में जलप्रलय का मंजर बना हुआ है। मानसूनी हवाओं की विषमता और वायुमंडलीय दबाव में आए तेज बदलावों के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां अधिकांश इलाकों में आसमान साफ हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल के तराई क्षेत्रों से सटे इलाकों में भारी तबाही मची हुई है।
बिहार के 13 जिलों में जलप्रलय: 27 लाख आबादी पर संकट
बिहार में बाढ़ का संकट दिन-ब-दिन बेहद गंभीर और भयावह रूप धारण करता जा रहा है। राज्य के 13 प्रमुख जिले वर्तमान में गंभीर बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे लगभग 27 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक और कमला बलान जैसी नदियां अपने रौद्र रूप में हैं। कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से कई फीट ऊपर बह रही हैं, जिससे सुरक्षा तटबंधों पर भारी दबाव बन गया है।
बाढ़ के कारण राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह कट चुका है। सड़कों पर कई फीट पानी जमा है, और दर्जनों पुल-पुलिया बह गए हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। लाखों लोग अपने घरों को छोड़कर ऊंचे स्थानों, राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारों और राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। बेघर हुए लोगों के सामने पीने के साफ पानी, भोजन और दवाओं का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF) के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की कई टीमों को राहत और बचाव कार्यों में तैनात किया गया है। नावों के जरिए जलमग्न गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में सूखी राहत सामग्री के पैकेट और पीने के पानी के पाउच बांटे जा रहे हैं, लेकिन पानी का तेज बहाव और विस्तृत फैलाव राहत कार्यों में बड़ी चुनौती बना हुआ है।
महाराष्ट्र का अंबोली बना नया ‘चेरापूंजी’: बारिश ने तोड़े रिकॉर्ड
मौसम के इस अनोखे मिजाज के बीच महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में स्थित खूबसूरत हिल स्टेशन अंबोली से हैरान कर देने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस मानसून सत्र में अंबोली में हुई कुल बारिश ने मेघालय के विश्व प्रसिद्ध चेरापूंजी (सोहरा) और मौसिनराम के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ दिया है।
पश्चिम घाट की पहाड़ियों में स्थित अंबोली में इस वर्ष असाधारण मानसूनी गतिविधियां दर्ज की गई हैं। अरब सागर से उठने वाली नमी से भरी हवाएं जब पश्चिमी घाट के पर्वतों से टकराईं, तो उन्होंने अंबोली और उसके आसपास के इलाकों में लगातार और भारी बारिश की। इसके परिणामस्वरूप इस छोटे से पर्वतीय क्षेत्र ने देश में सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड कायम किया है। अत्यधिक बारिश के कारण कोंकण क्षेत्र की कई स्थानीय नदियां उफान पर हैं, निचले इलाकों में पानी भर गया है और पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) का खतरा काफी बढ़ गया है।
सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण: क्यों गायब हुए 90% बादल?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और IMD के इनसैट (INSAT) सैटेलाइट्स द्वारा ली गई तस्वीरों से स्पष्ट होता है कि भारत के मुख्य भू-भाग के करीब 90% हिस्से में बादलों की सघनता में भारी कमी आई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह स्थिति ‘मानसून ब्रेक’ (Monsoon Break) या मानसूनी हवाओं की धुरी (Monsoon Trough) के उत्तर की ओर खिसकने के कारण उत्पन्न होती है।
जब मानसूनी ट्रफ रेखा खिसक कर हिमालय की तलहटी (Foothills) में चली जाती है, तो देश के मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी मैदानी भागों में बारिश अचानक थम जाती है और आसमान से बादल छंट जाते हैं। हालांकि, इसके विपरीत, हिमालय के तराई क्षेत्रों—जैसे बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, असम और नेपाल में—यह मानसूनी नमी एक जगह एकत्रित होकर अति-वृष्टि (Extreme Rainfall) का कारण बनती है। यही वजह है कि सैटेलाइट में देश का अधिकांश हिस्सा साफ दिखने के बावजूद बिहार और पूर्वोत्तर के राज्यों में विनाशकारी बाढ़ आ रही है।

कृषि और जनजीवन पर दूरगामी असर
मौसम के इस अत्यधिक विषम पैटर्न का देश की कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। एक तरफ बिहार में लाखों एकड़ में लगी धान की फसल बाढ़ के पानी में डूबकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। वहीं दूसरी ओर, जिन राज्यों से 90% बादल गायब हो चुके हैं, वहां यदि यह शुष्क दौर लंबा खींचता है, तो खरीफ की फसलों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलभराव के कारण जलजनित बीमारियों जैसे हैजा, टाइफाइड, डेंगू और त्वचा संबंधी संक्रमणों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित जिलों में मेडिकल कैंप लगाने और क्लोरीन की गोलियां बांटने के निर्देश जारी किए हैं।
आगामी दिनों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले 48 से 72 घंटों तक बिहार के तराई वाले जिलों और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। इससे बाढ़ की स्थिति में तुरंत सुधार होने की संभावना कम है और नदियों का जलस्तर स्थिर रहने या मामूली रूप से बढ़ने की आशंका है।
प्रशासन ने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों और निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। देश के अन्य भागों में धीरे-धीरे मानसूनी प्रणाली के पुनर्गठित होने और बादलों की वापसी की संभावना जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें: मेरठ के स्कूल वॉशरूम में 13 वर्षीय कुणाल की संदिग्ध मौत: ई-रिक्शा चालक की तलाश से खुली खौफनाक वारदात की परतें