जनसमाज संवाददाता, नई दिल्ली: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की बैठकों और बैठकों के दौर के बीच, पेंशन नियमों से जुड़ी एक ऐसी ऐतिहासिक मांग ने ज़ोर पकड़ा है, जो लागू हुई तो लगभग 40 साल पुराना नियम इतिहास बन जाएगा।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगी यूनियनों ने सरकार से कम्युटेड पेंशन (Commuted Pension) की रिकवरी अवधि को 15 साल से घटाकर 10 से 11 साल करने की मांग की है। यदि 8वां वेतन आयोग इस सिफारिश को स्वीकार कर लेता है, तो देश के लगभग 69 लाख पेंशनभोगियों के खातों में हर महीने आने वाली पेंशन राशि में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
क्या है यह 40 साल पुराना नियम?
साल 1986 में लागू किए गए नियमों के तहत, जब कोई केंद्रीय कर्मचारी सेवानिवृत्त (Retire) होता है, तो उसे अपनी मूल पेंशन (Basic Pension) का अधिकतम 40% हिस्सा एकमुश्त (Lump-sum) लेने का अधिकार मिलता है। इसे तकनीकी भाषा में ‘पेंशन का कम्यूटेशन’ (Commutation of Pension) कहा जाता है।
कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय एकमुश्त मोटी रकम तो मिल जाती है, लेकिन इसके बदले में सरकार अगले 15 वर्षों तक उसकी मासिक पेंशन से वह 40% हिस्सा काटती रहती है। 15 साल पूरे होने के बाद ही पेंशनभोगी को दोबारा पूरी (Full) पेंशन मिलने लगती है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि 1986 में बनाए गए इस नियम की गणनाएं और ब्याज दरें अब पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुकी हैं।
कैलकुलेशन का गणित: क्यों 15 साल की कटौती को बताया जा रहा गलत?
कर्मचारी यूनियनों और पेंशनर्स एसोसिएशंस ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष आंकड़े प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार 15 सालों तक कटौती करके पेंशनरों से अधिक राशि वसूल रही है।
- उदाहरण से समझें: नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के आंकड़ों के मुताबिक, यदि कोई 61 वर्ष का पेंशनर 100 रुपये की मासिक पेंशन कम्यूट कराता है, तो उसे करीब ₹9,833 एकमुश्त मिलते हैं।
- कटौती की हकीकत: इसके बदले उसकी पेंशन से हर महीने 100 रुपये काटे जाते हैं।
- 10 वर्षों में कुल कटौती = ₹12,000
- 15 वर्षों में कुल कटौती = ₹18,000
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि दी गई एकमुश्त राशि (मूलधन) और उस पर लगने वाले सामान्य ब्याज की भरपाई सरकार को 10 से 11 सालों में ही पूरी हो जाती है। इसके बावजूद 15 साल तक कटौती जारी रखना सेवानिवृत्त बुजुर्गों के साथ सीधा अन्याय है।
किस संगठन ने क्या रखी है मांग?
वेतन आयोग के सामने अलग-अलग कर्मचारी संघों ने अपनी सिफारिशें भेजी हैं:
| कर्मचारी संगठन / यूनियन | प्रस्तावित रिकवरी अवधि |
| NC-JCM, AIDEF, FNPO व भारत पेंशनर्स समाज | 11 वर्ष |
| ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन | 10 वर्ष |
| इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) | 12 वर्ष |
कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या मिलेगा बड़ा लाभ?
- जल्दी बहाल होगी पूरी पेंशन: यदि कटौती की सीमा 10 या 11 साल कर दी जाती है, तो 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारी को 70 या 71 वर्ष की आयु में ही पूरी पेंशन मिलने लगेगी, जबकि वर्तमान में उन्हें 75 वर्ष की उम्र तक इंतजार करना पड़ता है।
- वृद्धावस्था में आर्थिक संबल: 70 वर्ष की आयु के बाद चिकित्सा और स्वास्थ्य संबंधी खर्चे बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में पेंशन का पूरा हिस्सा वापस मिलने से बुजुर्गों को आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- लाखों परिवारों को राहत: इस फैसले का सीधा असर देश के 69 लाख से अधिक पेंशनभोगियों और उनके परिवारों की जेब पर पड़ेगा।
8वें वेतन आयोग का रुख और आगे की राह
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वां वेतन आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारियों, पेंशनर यूनियनों और हितधारकों से सीधा संवाद कर रहा है। चेन्नई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों के दौरों में कर्मचारी यूनियनों ने इस मांग को प्राथमिकता से उठाया है।
यदि 8वां वेतन आयोग इस 40 साल पुराने नियम को खत्म कर कम्यूटेशन रिकवरी अवधि घटाने की सिफारिश करता है, तो यह केंद्र सरकार की तरफ से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दिया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा तोहफा होगा।