नई दिल्ली: क्रिकेट के मैदान पर कब क्या देखने को मिल जाए, कोई नहीं जानता। कभी खुशी के आंसू छलकते हैं, तो कभी निराशा का ऐसा गुबार फूटता है जो देखने वाले हर शख्स को हैरान कर देता है। कुछ ऐसा ही नजारा उस वक्त देखने को मिला जब महज 14 साल के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी मैदान पर बल्लेबाजी कर रहे थे। एक तरफ जहाँ स्टेडियम में बैठे दर्शक और स्टैंड्स में मौजूद पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज और राष्ट्रीय चयनकर्ता आरपी सिंह उनकी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी को देखकर मंत्रमुग्ध थे, वहीं दूसरी तरफ वैभव का एक फैसला और फिर शतक से चूकने की हताशा ने हर किसी को सन्न कर दिया।
विस्फोटक बल्लेबाजी से उड़ाए गेंदबाजों के होश
मैदान पर उतरते ही वैभव सूर्यवंशी ने अपने तेवर साफ कर दिए थे। विपक्षी गेंदबाजों के पास उनके मैदान के चारों ओर लगाए जा रहे शॉट्स का कोई जवाब नहीं था। क्या स्पिनर और क्या तेज गेंदबाज, वैभव ने हर गेंद को सीमा रेखा के पार भेजने का जिम्मा उठा रखा था। उनकी टाइमिंग इतनी सटीक थी और शॉट्स में इतनी परिपक्वता दिख रही थी कि कोई भी यह मानने को तैयार नहीं था कि क्रीज पर खड़ा यह खिलाड़ी अभी अपनी उम्र के 15वें पड़ाव में भी नहीं पहुंचा है।
एक के बाद एक आकर्षक बाउंड्रीज और लंबे छक्कों की मदद से वैभव तेजी से अपने शतक की ओर बढ़ रहे थे। डगआउट में बैठे उनके साथी खिलाड़ी हर शॉट पर तालियां बजा रहे थे, जबकि स्टैंड्स में बैठे चयनकर्ता आरपी सिंह उनकी तकनीकी बारीकियों और आक्रामक रवैये को अपनी डायरी में नोट कर रहे थे। ऐसा लग रहा था कि आज मैदान पर एक ऐतिहासिक शतक दर्ज होने जा रहा है।
90 के फेर में फंसा युवा सितारा, शतक से चूके
जब वैभव 90 के आंकड़े को पार कर चुके थे, तब स्टेडियम में मौजूद हर शख्स की सांसें थमी हुई थीं। शतक महज कुछ रन दूर था। दबाव के इस पल में जहाँ आमतौर पर बल्लेबाज संयम बरतते हैं, वहीं वैभव ने अपने स्वाभाविक आक्रामक खेल को ही जारी रखने का फैसला किया। लेकिन यही फैसला उन पर भारी पड़ गया।
एक ओवर-पिच गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में गेंद बल्ले के ऊपरी हिस्से पर लगी और हवा में टांग गई। बाउंड्री लाइन पर मौजूद फील्डर ने बिना कोई गलती किए कैच लपक लिया। वैभव सूर्यवंशी अपने बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक शतक से केवल कुछ ही रन दूर रहकर आउट हो गए।
गुस्से में पटका बल्ला, निराशा में लटकाया चेहरा
जैसे ही गेंद फील्डर के हाथों में समाई, मैदान का माहौल पूरी तरह बदल गया। अपने इस तरह आउट होने से वैभव इतने निराश और आहत हुए कि वे अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख पाए। आउट होते ही उन्होंने गुस्से में अपना बल्ला जोर से पिच पर दे मारा। इसके बाद सिर झुकाकर और चेहरा लटकाकर वे पवेलियन की ओर कदम बढ़ाने लगे।
उनके चेहरे पर शतक न बना पाने का मलाल साफ झलक रहा था। एक युवा खिलाड़ी का अपने खेल के प्रति यह जुनून और शतक चूकने का दर्द देखकर मैदान में सन्नाटा पसर गया। वे खुद से इतने नाराज दिख रहे थे कि डगआउट की ओर जाते वक्त उन्होंने किसी की तरफ देखा तक नहीं।
चयनकर्ता आरपी सिंह हुए हैरान
स्टैंड्स में मौजूद पूर्व भारतीय दिग्गज और चयनकर्ता आरपी सिंह यह पूरा वाकया अपनी आंखों से देख रहे थे। वैभव की बल्लेबाजी से वे बेहद प्रभावित थे, लेकिन जिस तरह से वैभव आउट हुए और उसके बाद उन्होंने अपनी हताशा जाहिर की, उसने आरपी सिंह को भी हैरान कर दिया।
आरपी सिंह के चेहरे पर आश्चर्य के भाव साफ देखे जा सकते थे। एक तरफ जहाँ वे वैभव की अद्भुत प्रतिभा और आक्रामक शैली के मुरीद दिखे, वहीं दूसरी तरफ एक 14 साल के बच्चे के भीतर शतक न बना पाने का ऐसा भयंकर गुस्सा देखकर वे भी कुछ पल के लिए सन्न रह गए।
उज्ज्वल भविष्य की ओर एक बड़ा कदम
भले ही वैभव सूर्यवंशी इस मुकाबले में अपना शतक पूरा नहीं कर सके और निराशा में पवेलियन लौटे, लेकिन उन्होंने अपनी इस पारी से एक बात साबित कर दी कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य बेहद सुरक्षित हाथों में है। 14 साल की छोटी सी उम्र में इस स्तर की परिपक्वता, निडरता और रनों की भूख यह दर्शाती है कि आने वाले समय में यह युवा खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट के बड़े-बड़े कीर्तिमान स्थापित करने वाला है।
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