विमल इलायची विज्ञापन विवाद: महाराष्ट्र FDA के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय पहुंचे अभिनेता अजय देवगन

मुंबई: बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता अजय देवगन ने ‘विमल इलायची’ (Vimal Elaichi) के विज्ञापनों को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show-Cause Notice) को बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) में चुनौती दी है। खाद्य नियामक FDA का आरोप है कि ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन वास्तव में राज्य में प्रतिबंधित ‘विमल पान मसाला’ का परोक्ष या सरोगेट विज्ञापन (Surrogate Advertising) हैं। अभिनेता अजय देवगन ने इस नोटिस की वैधता और प्रशासनिक कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए अदालत से राहत की गुहार लगाई है।

1. मामला क्या है? FDA की कार्रवाई और सरोगेट विज्ञापन का आरोप

महाराष्ट्र में गुटखा और पान मसाला उत्पादों के निर्माण, बिक्री और प्रचार-प्रसार पर कड़ा प्रतिबंध लागू है। FDA का दावा है कि ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन के जरिए सीधे तौर पर प्रतिबंधित ‘विमल पान मसाला’ ब्रांड को प्रमोट किया जा रहा है।

नियामक संस्था के अनुसार, हालांकि विज्ञापन में सिल्वर कोटेड इलायची (माउथ फ्रेशनर) दिखाई जाती है, लेकिन ब्रांड का नाम, लोगो, टैगलाइन और थीम पूरी तरह से पान मसाला उत्पाद से जुड़ी हुई है। FDA का तर्क है कि यह खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act) और उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत भ्रामक विज्ञापन और सरोगेट प्रचार की श्रेणी में आता है।

इसी सिलसिले में FDA ने अभिनेता अजय देवगन के साथ-साथ बॉलीवुड के अन्य दिग्गज कलाकारों—शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ—को भी नोटिस जारी किए थे।

2. अजय देवगन ने याचिका में क्या तर्क दिए हैं?

अजय देवगन की ओर से दायर याचिका में FDA के नोटिस को मनमाना, असंवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन बताया गया है। याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु उठाए गए हैं:

  • उत्पादक के बजाय अभिनेता को निशाना बनाना: अजय देवगन का कहना है कि वे केवल एक ब्रांड एंबेसडर और पेशेवर कलाकार के रूप में काम कर रहे थे। FDA को यदि कोई आपत्ति थी, तो उसे मुख्य रूप से विनिर्माण कंपनी (Manufacturer) के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी, न कि सीधे विज्ञापन करने वाले कलाकारों पर कानूनी शिकंजा कसना चाहिए था।
  • कानूनी प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती: याचिका में उन नियमों और प्रावधानों की संवैधानिक वैधता (Constitutional Validity) पर सवाल उठाया गया है, जिनके आधार पर यह नोटिस जारी किया गया है।
  • अनुबंध समाप्त होने का दावा: रिपोर्टों के अनुसार, अभिनेता ने यह भी पक्ष रखा है कि वे वर्तमान में इस ब्रांड के साथ अपने अनुबंध को समाप्त कर चुके हैं या आगे इससे नहीं जुड़े हैं, इसलिए उन पर यह दंडात्मक नोटिस लागू नहीं होना चाहिए।
  • कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: याचिका में यह तर्क भी शामिल है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और एफएसएसए (FSSA) के नियमों की गलत व्याख्या करके कलाकारों को बिना किसी उचित आधार के चेतावनी नोटिस जारी किया गया है।

3. बंबई हाईकोर्ट में सुनवाई की संभावना

यह याचिका बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायाधीश अद्वैत सेठना की पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई है।

मुख्य विवरण: बंबई उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायाधीश अद्वैत सेठना की खंडपीठ द्वारा इस याचिका पर 4 नवंबर को सुनवाई किए जाने की संभावना है।

इससे पहले, निर्माता कंपनी पीबी एग्रो (PB Agro) ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने क्षेत्राधिकार (Territorial Jurisdiction) का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि चूंकि कार्रवाई महाराष्ट्र FDA द्वारा की गई है, इसलिए मामला महाराष्ट्र की अदालत में ही उठाया जाना चाहिए। इसके बाद अभिनेता ने स्वयं बंबई हाईकोर्ट का रुख किया है।

4. FDA कमिश्नर का बयान और आगे की कानूनी कार्यवाही

महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा कि विभाग ने शाह रुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के खिलाफ चल रही जांच प्रक्रिया पूरी कर ली है और उल्लंघन पाए गए हैं।

नियामक संस्था के अनुसार, मामला अगले सप्ताह निर्णायक निर्णय (Adjudication) के लिए संयुक्त आयुक्त के समक्ष भेजा जाएगा। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अजय देवगन द्वारा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर FDA की विभागीय प्रक्रिया जारी रहेगी।

5. सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और सरोगेट विज्ञापनों पर बड़ा असर

यह विवाद भारतीय विज्ञापन जगत और बॉलीवुड हस्तियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

मुख्य बिंदुविवरण
मुद्दा (Issue)सरोगेट विज्ञापन (इलायची के नाम पर पान मसाला का प्रचार)
संबंधित पक्ष (Parties)अजय देवगन vs महाराष्ट्र FDA (तथा अन्य अभिनेता)
कानूनी धाराएं (Acts Involved)FSSA 2006, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, COTPA 2003
संभावित जुर्माना (Potential Penalty)भ्रामक विज्ञापनों पर ₹10 लाख तक का जुर्माना प्रावधान

उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) और FSSAI की नई गाइडलाइंस के तहत ब्रांड एंबेसडर की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वे किसी उत्पाद का प्रचार करने से पहले उसके दावों की पड़ताल करें। यदि अदालत इस मामले में FDA के पक्ष में फैसला देती है, तो भविष्य में बॉलीवुड और खेल जगत की हस्तियों को हानिकारक या प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाले ब्रांड्स का प्रचार स्वीकार करते समय अत्यधिक सतर्क रहना होगा।

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  • Rashika Sharma

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