साउथ सिनेमा के दिग्गज और बहुचर्चित अभिनेता चियान विक्रम हाल ही में एक नए विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर एक रील्स/वीडियो पोस्ट करना अभिनेता को काफी भारी पड़ गया है। दरअसल, विक्रम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वन्यजीव (लंगूर/बंदर) के साथ अपना एक वीडियो साझा किया था। जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग की नजर इस पर पड़ गई।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के कड़े नियमों के तहत इस प्रकार के जंगली जानवरों को निजी तौर पर रखने, उनके साथ वीडियो बनाने या उनका प्रदर्शन करने पर सख्त पाबंदी है। मामले के तूल पकड़ते ही तमिल नाडु वन विभाग तुरंत एक्शन मोड में आ गया और उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। हालांकि, स्थिति को भांपते हुए विक्रम ने तुरंत अपने सोशल मीडिया हैंडल से उस वीडियो को डिलीट कर दिया है, लेकिन तब तक बात काफी आगे बढ़ चुकी थी।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में चियान विक्रम ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक छोटा सा वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में विक्रम एक लंगूर (बंदर की एक प्रजाति) के साथ नजर आ रहे थे। वीडियो में अभिनेता जानवर के साथ दोस्ताना अंदाज में खेलते और समय बिताते दिख रहे थे। फैंस ने शुरुआत में इस वीडियो को काफी पसंद किया और इसे अभिनेता का जानवरों के प्रति प्रेम मानकर शेयर करना शुरू कर दिया।
लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर यह वीडियो वन्यजीव कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों की नजर में आ गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया कि क्या यह जानवर अभिनेता का पालतू है या इसे किसी शूटिंग के सिलसिले में लाया गया था? भारत में ‘ग्रे लंगूर’ या बंदरों की विभिन्न प्रजातियां ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972’ की अनुसूची (Schedule) के तहत संरक्षित श्रेणी में आती हैं। इनका निजी स्वामित्व, प्रदर्शन या इन्हें बिना अनुमति के पास रखना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।
वन विभाग का कड़ा एक्शन और जांच
वीडियो के वायरल होते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। तमिलनाडु वन विभाग की एक टीम ने तुरंत इस बात की पड़ताल शुरू कर दी कि यह वीडियो कहां और कब शूट किया गया था।
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:
“हमें सोशल मीडिया के माध्यम से इस वीडियो की जानकारी मिली। भारतीय वन्यजीव कानून के तहत किसी भी संरक्षित जंगली जानवर को बिना वैध परमिट और अनुमति के किसी भी व्यावसायिक या निजी वीडियो में इस्तेमाल करना गैर-कानूनी है। हम यह जांच कर रहे हैं कि यह लंगूर कहां से लाया गया था, क्या इसे बंदी बनाकर रखा गया था और क्या इसके लिए कोई आधिकारिक मंजूरी ली गई थी।”
अधिकारियों का कहना है कि भले ही अभिनेता ने वीडियो डिलीट कर दिया हो, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों और वीडियो के स्रोत की जांच की जा रही है। अगर यह पाया जाता है कि किसी भी नियम का उल्लंघन हुआ है, तो कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो डिलीट, लेकिन विवाद जारी
जैसे ही वन विभाग की सक्रियता की खबर फैली और सोशल मीडिया पर आलोचना की लहर उठी, चियान विक्रम और उनकी टीम ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत उस विवादित वीडियो को अपने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा (delete) दिया।
हालांकि, कानून विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वीडियो डिलीट कर देने से कानूनी जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता। यदि जांच में यह साबित होता है कि जानवर को अवैध रूप से कब्जे में रखा गया था या उसके साथ किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार या प्रदर्शन हुआ था, तो अभिनेता के साथ-साथ उन लोगों से भी पूछताछ हो सकती है जिन्होंने उस जानवर को उपलब्ध कराया था।
क्या कहता है भारत का वन्यजीव संरक्षण कानून?
भारत में ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972’ (Wildlife Protection Act, 1972) वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बेहद कड़ा कानून है।
- संरक्षित प्रजाति: लंगूर और बंदरों की अधिकांश प्रजातियां इस कानून के तहत संरक्षित हैं।
- निजी स्वामित्व पर रोक: किसी भी भारतीय नागरिक को जंगली जानवरों को बिना विभाग की विशेष अनुमति के अपने घर में रखने, पालने या उनका इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है।
- सोशल मीडिया पर प्रदर्शन: कानून के अनुसार, ऐसे जानवरों का इस्तेमाल किसी भी प्रकार के प्रचार, रील्स, यूट्यूब वीडियो या फिल्मों में बिना ‘एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया’ (AWBI) और वन विभाग की एनओसी (NOC) के नहीं किया जा सकता।
- सजा का प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने के साथ-साथ 3 से 7 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
सेलेब्रिटीज और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी
हाल के दिनों में यह देखा गया है कि सोशल मीडिया पर ‘लाइक’ और ‘व्यूज’ पाने के चक्कर में कई मशहूर हस्तियां और इन्फ्लुएंसर्स जंगली जानवरों या दुर्लभ प्रजातियों के जीवों के साथ रील्स और फोटोज पोस्ट कर देते हैं। लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मशहूर हस्तियों के लाखों फॉलोअर्स होते हैं, और जब वे इस तरह के वीडियो डालते हैं, तो आम जनता में भी गलत संदेश जाता है। लोग इसे ट्रेंड मानकर फॉलो करने लगते हैं, जिससे अवैध वन्यजीव व्यापार (Wildlife Trafficking) को बढ़ावा मिल सकता है।
यही कारण है कि वन विभाग अब ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से ले रहा है ताकि समाज में एक सख्त संदेश दिया जा सके कि कानून सभी के लिए समान है—चाहे वह आम नागरिक हो या फिर कोई बड़ा सिनेमा स्टार।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल वन विभाग चियान विक्रम की टीम से संपर्क करने और उनका पक्ष जानने की कोशिश कर रहा है। विक्रम की तरफ से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान या सफाई जारी नहीं की गई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। क्या यह केवल एक अनजाने में हुई भूल थी, या फिर इसके पीछे नियमों की अनदेखी की गई थी? आने वाले दिनों में वन विभाग की रिपोर्ट के बाद ही विक्रम की मुश्किलें कम होंगी या बढ़ेंगी, इसका फैसला हो पाएगा।
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