ऑस्कर 2027 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए फिल्मों की रेस में बड़े बजट और हिंदी ब्लॉकबस्टर फिल्मों को पछाड़ते हुए एक क्षेत्रीय कृति ने बाजी मार ली है। जहां एक ओर फिल्म जगत में आदित्य धर की बहुचर्चित फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) को ऑस्कर की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर देखा जा रहा था, वहीं दूसरी ओर ‘फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (FFI) की जूरी ने सभी को चौंकाते हुए मराठी फिल्म ‘गोंधल’ (Gondhal) को ऑस्कर 2027 (99वें अकादमी पुरस्कार) के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि (Official Entry) चुना है।
यह निर्णय भारतीय सिनेमा के इतिहास में क्षेत्रीय और कलात्मक फिल्मों की बढ़ती साख को दर्शाता है। पी. शेषाद्रि की अध्यक्षता वाली 14 सदस्यीय जूरी ने हिंदी, तमिल, तेलुगु, गुजराती और मलयालम सहित विभिन्न भाषाओं की 33 फिल्मों को देखने के बाद सर्वसम्मति से ‘गोंधल’ का चयन किया। इस रेस में ‘धुरंधर’ के अलावा ‘इक्कीस’, ‘अंग’, ‘हनुमान अंश’, ‘बॉर्डर 2’ और ‘120 बहादुर’ जैसी कई बड़ी और भव्य फिल्में शामिल थीं।
क्या है फिल्म ‘गोंधल’ की कहानी और इसकी सांस्कृतिक जड़ें?
संतोष दवाखरे द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म ‘गोंधल’ महाराष्ट्र की समृद्ध लोक परंपरा, पौराणिक मान्यताओं और मानवीय संबंधों की कड़वी सच्चाई का एक अनूठा संगम है। ‘गोंधल’ मूल रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में देवी मां (अंबाबाई या भवानी) के सम्मान में रात भर किया जाने वाला एक पारंपरिक लोक-अनुष्ठान और नृत्य है।
फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में सेट है। यह एक नवविवाहित जोड़े और एक रात के दौरान आयोजित होने वाले इस पावन ‘गोंधल’ अनुष्ठान के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी की मुख्य पात्र सुमन (इशिता देशमुख) अपनी दुखी और घुटन भरी शादीशुदा जिंदगी से आजादी पाना चाहती है। वह अपने गुप्त प्रेमी के साथ मिलकर एक खतरनाक साजिश रचती है। जिस धार्मिक अनुष्ठान का उपयोग भक्ति और पवित्रता के लिए किया जाता है, उसी गोंधल की रात को सुमन अपनी महत्वाकांक्षा, बदले और रहस्य को छिपाने का जरिया बना लेती है।
यह थ्रिलर-ड्रामा धार्मिक आस्था और इंसान की आंतरिक कमियों के बीच के तनाव को इतनी बारीक परत-दर-परत उघाड़ता है कि दर्शक शुरुआत से अंत तक बंधे रहते हैं।
दमदार अभिनय और संगीत की दुनिया के दिग्गजों की जुगलबंदी
फिल्म की सफलता के पीछे इसके कलाकारों का सधा हुआ प्रदर्शन और विश्वस्तरीय संगीत है।
- प्रमुख स्टार कास्ट: फिल्म में इशिता देशमुख ने मुख्य भूमिका निभाई है। उनके साथ मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता किशोर कदम, योगेश सोहनी, निषाद भोईर और अनुज प्रभु ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
- इलियाराजा का संगीत: इस फिल्म का एक और सबसे मजबूत पहलू दिग्गज संगीतकार इलियाराजा (Ilaiyaraaja) द्वारा दिया गया बैकग्राउंड स्कोर और संगीत है। लोक संगीत और सस्पेंस का यह अद्भुत तालमेल फिल्म के मूड को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है।
संतोष दवाखरे ने इस फिल्म से अपने फीचर डेब्यू की शुरुआत की है और पहली ही फिल्म में वैश्विक पहचान हासिल की है। इससे पहले ‘गोंधल’ ने 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में स्पेशल जूरी प्राइज (सिल्वर पीकॉक बेस्ट डायरेक्टर) जीता था।
मराठी सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण
यह पहली बार नहीं है जब किसी मराठी फिल्म ने ऑस्कर में भारत का परचम लहराया हो, लेकिन ‘गोंधल’ का चयन कई मायनों में बेहद खास है। मराठी सिनेमा अब तक ऑस्कर के मंच पर चार बार भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बन चुका है:
- श्वास (Shwaas – 2005): संदीप सावंत द्वारा निर्देशित, जिसने मराठी सिनेमा का नया दौर शुरू किया।
- हरिश्चंद्राची फैक्ट्री (Harishchandrachi Factory – 2009): परेश मोकाशी की फिल्म, जो दादासाहेब फाल्के के शुरुआती दिनों पर आधारित थी।
- कोर्ट (Court – 2015): चैतन्य तम्हाणे की कोर्टरूम ड्रामा।
- गोंधल (Gondhal – 2027): संतोष दवाखरे की सांस्कृतिक थ्रिलर फिल्म।
‘धुरंधर’ जैसी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़कर कैसे बनी पहली पसंद?
जूरी के अध्यक्ष पी. शेषाद्रि के अनुसार, 33 फिल्मों के बीच कड़ा मुकाबला था। हालांकि ‘धुरंधर’ कमर्शियल स्तर पर बेहद सफल फिल्म रही थी, लेकिन ऑस्कर के बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के मानकों पर ‘गोंधल’ पूरी तरह खरी उतरी।
जूरी का मानना था कि ‘गोंधल’ में भारत की वास्तविक सांस्कृतिक जड़ें, विविधता और समाज की सच्चाई बहुत ही प्रामाणिक और कलात्मक ढंग से दिखाई गई है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर, सिनेमैटोग्राफी और निर्देशक की कहानी कहने की शैली अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को प्रभावित करने में सक्षम है।
ऑस्कर का सफर और आगे की चुनौतियां
ऑस्कर 2027 (99वें अकादमी पुरस्कार) का आयोजन 14 मार्च 2027 को लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थिएटर में होना तय हुआ है। आधिकारिक चयन के बाद अब ‘गोंधल’ को ऑस्कर की वोटिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा, जहां पहले 15 फिल्मों की शॉर्टलिस्ट तय की जाएगी और फिर फाइनल 5 फिल्मों का नामांकन (Nomination) होगा।
भारत के ऑस्कर इतिहास की बात करें तो ‘मदर इंडिया’ (1957), ‘सलाम बॉम्बे!’ (1988), और ‘लगान’ (2001) ही ऐसी भारतीय फिल्में रही हैं जो ऑस्कर के बेस्ट फॉरेन फीचर (अब इंटरनेशनल फीचर) कैटेगरी की टॉप 5 फिल्मों में जगह बना सकी थीं। अब देश को ‘गोंधल’ से काफी उम्मीदें हैं कि वह न केवल नामांकित होगी बल्कि दशकों पुराना सूखा खत्म करके भारत के लिए यह ऐतिहासिक ट्रॉफी लेकर आएगी।
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